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Kaithal News: पराली जलाने में प्रशासन सख्त
Mon, 14 Oct 2024 05:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 14 Oct 2024 05:13 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। लघु सचिवालय में रविवार को डीसी डॉ. विवेक भारती ने फसल अवशेष प्रबंधन विषय पर संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों की बैठक ली और पराली जलाने की घटनाओं की समीक्षा की। उन्होंने सख्त आदेश देते हुए कहा कि सभी संबंधित अधिकारी फील्ड में
रहे और अलर्ट मोड पर कार्य करते हुए फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाएं।
इसके साथ किसानों को फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुकसान तथा नहीं जलाने से होने वाले फायदे के बारे में जागरूक करें। डीसी ने बताया कि अभी तक जिले में 20 से अधिक मामले में पराली जलाने के आ चुके हैं। यदि कोई किसान फसल अवशेष जलाता हुआ मिले तो उस पर नियमानुसार जुर्माना लगाया जाए। कहा कि फसल अवशेष विशेषकर पराली को लेकर सरकार ने अनेक योजनाएं चलाई हैं, जिनका किसानों को लाभ उठाना चाहिए।
फसल अवशेषों को नष्ट नहीं करते हुए किसानों को उनका समुचित प्रबंधन करना चाहिए, क्योंकि पराली जलाने से जहां पर्यावरण प्रदूषण होता है वहीं जमीन की उर्वरा शक्ति कमजोर होती है। उन्होंने बताया कि पराली का प्रबंधन करने वाले 20 हजार 481 किसानों के खातों में 21.87 करोड़ रुपये जमा कराए गए हैं। तकनीक के इस युग में अब फसल अवशेष परेशानी ना होकर कमाई का साधन बनता जा रहा हैं और बहुत से किसान व लोग अब फसलों के अवशेष से लाखों रुपए भी कमा रहे हैं।
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सरकार भी फसल अवशेष प्रबंधन के लिए प्रति एकड़ एक हजार रुपये की राशि प्रोत्साहन के रूप में दे रही है। इसके
लिए किसान वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने फसल अवशेष प्रबंधन की समस्या को गंभीरता से लेते हुए कई योजनाएं चलाई और योजनाओं को लेकर किसानों को जागरूक किया जा रहा है। सरकार के इस कदम से फसल अवशेष प्रबंधन को बल मिला और आज कई लोग केवल फसल के अवशेषों से ही लाखों रुपए कमा रहे हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे फसल कटाई के बाद फसल अवशेषों में कोई भी आगजनी की घटना ना करें।
सरकार किसानों को इन सीटू एक्स सीटू प्रबंधन के लिए एक हजार रुपये प्रति एकड़ अनुदान देती है। कंट्रोल रूम किया स्थापित- डीसी ने बताया कि जिले में अब तक 58 पराली जलाने की घटनाएं हो चुकी हैं। इसको देखते हुए कृषि विभाग ने एक कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है, जहां कोई भी व्यक्ति सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक सूचना दे सकता है।
कंट्रोल रूम के दो नंबर जारी किए गए हैं 70156-27885 तथा 70155-64644 पर कॉल करें।
वेबसाइट www.agriharyana.gov.in
जिला में किसानों को अनुदान पर उपलब्ध कराए कृषि यंत्र
कृषि विभाग के उप निदेशक डॉ. बाबूलाल व अतिरिक्त सहायक अभियंता कैथल जगदीश चंद्र ने बताया कि जिला में 5016 इन सीटू तथा 422 एक्स सीटू कृषि यंत्र किसानों को अनुदान पर उपलब्ध कराए गए हैं। वित्त वर्ष के दौरान किसानों को 1524 कृषि यंत्रों पर करीब 17 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा एक्स सीटू मशीनों द्वारा 17 हजार एकड़ तथा इन सीटू मशीनों की ओर से सात हज़ार एकड़ पर फसल अवशेष प्रबंधन किया जा चुका है।
गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करेंगे दो प्रचार वाहन
डीसी डॉ विवेक भारती रविवार को किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के लिए 2 जागरूकता वाहनों को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया। ये जागरूकता वाहन गांव गांव जाकर किसानों को फसल अवशेष नहीं जलाने के प्रति प्रेरित करेंगे।
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कैथल। लघु सचिवालय में रविवार को डीसी डॉ. विवेक भारती ने फसल अवशेष प्रबंधन विषय पर संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों की बैठक ली और पराली जलाने की घटनाओं की समीक्षा की। उन्होंने सख्त आदेश देते हुए कहा कि सभी संबंधित अधिकारी फील्ड में
रहे और अलर्ट मोड पर कार्य करते हुए फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाएं।
इसके साथ किसानों को फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुकसान तथा नहीं जलाने से होने वाले फायदे के बारे में जागरूक करें। डीसी ने बताया कि अभी तक जिले में 20 से अधिक मामले में पराली जलाने के आ चुके हैं। यदि कोई किसान फसल अवशेष जलाता हुआ मिले तो उस पर नियमानुसार जुर्माना लगाया जाए। कहा कि फसल अवशेष विशेषकर पराली को लेकर सरकार ने अनेक योजनाएं चलाई हैं, जिनका किसानों को लाभ उठाना चाहिए।
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फसल अवशेषों को नष्ट नहीं करते हुए किसानों को उनका समुचित प्रबंधन करना चाहिए, क्योंकि पराली जलाने से जहां पर्यावरण प्रदूषण होता है वहीं जमीन की उर्वरा शक्ति कमजोर होती है। उन्होंने बताया कि पराली का प्रबंधन करने वाले 20 हजार 481 किसानों के खातों में 21.87 करोड़ रुपये जमा कराए गए हैं। तकनीक के इस युग में अब फसल अवशेष परेशानी ना होकर कमाई का साधन बनता जा रहा हैं और बहुत से किसान व लोग अब फसलों के अवशेष से लाखों रुपए भी कमा रहे हैं।
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सरकार भी फसल अवशेष प्रबंधन के लिए प्रति एकड़ एक हजार रुपये की राशि प्रोत्साहन के रूप में दे रही है। इसके
लिए किसान वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने फसल अवशेष प्रबंधन की समस्या को गंभीरता से लेते हुए कई योजनाएं चलाई और योजनाओं को लेकर किसानों को जागरूक किया जा रहा है। सरकार के इस कदम से फसल अवशेष प्रबंधन को बल मिला और आज कई लोग केवल फसल के अवशेषों से ही लाखों रुपए कमा रहे हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे फसल कटाई के बाद फसल अवशेषों में कोई भी आगजनी की घटना ना करें।
सरकार किसानों को इन सीटू एक्स सीटू प्रबंधन के लिए एक हजार रुपये प्रति एकड़ अनुदान देती है। कंट्रोल रूम किया स्थापित- डीसी ने बताया कि जिले में अब तक 58 पराली जलाने की घटनाएं हो चुकी हैं। इसको देखते हुए कृषि विभाग ने एक कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है, जहां कोई भी व्यक्ति सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक सूचना दे सकता है।
कंट्रोल रूम के दो नंबर जारी किए गए हैं 70156-27885 तथा 70155-64644 पर कॉल करें।
वेबसाइट www.agriharyana.gov.in
जिला में किसानों को अनुदान पर उपलब्ध कराए कृषि यंत्र
कृषि विभाग के उप निदेशक डॉ. बाबूलाल व अतिरिक्त सहायक अभियंता कैथल जगदीश चंद्र ने बताया कि जिला में 5016 इन सीटू तथा 422 एक्स सीटू कृषि यंत्र किसानों को अनुदान पर उपलब्ध कराए गए हैं। वित्त वर्ष के दौरान किसानों को 1524 कृषि यंत्रों पर करीब 17 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा एक्स सीटू मशीनों द्वारा 17 हजार एकड़ तथा इन सीटू मशीनों की ओर से सात हज़ार एकड़ पर फसल अवशेष प्रबंधन किया जा चुका है।
गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करेंगे दो प्रचार वाहन
डीसी डॉ विवेक भारती रविवार को किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के लिए 2 जागरूकता वाहनों को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया। ये जागरूकता वाहन गांव गांव जाकर किसानों को फसल अवशेष नहीं जलाने के प्रति प्रेरित करेंगे।