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Kaithal News: खेड़ी लांबा में प्रशासन ने ढहाए अवैध निर्माण
Thu, 30 Nov 2023 12:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 30 Nov 2023 12:29 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। करनाल मंडल आयुक्त के आदेश के बाद खेड़ी लांबा गांव में बुधवार को 12 से ज्यादा अवैध निर्माण गिराए गए। गलियों के बीचोंबीच बने इन कथित अवैध निर्माणों को जेसीबी ने ढहा दिया। दूसरी ओर प्रशासन की कार्रवाई पर दूसरा पक्ष खफा नजर आया।
गौरतलब है कि करीब एक दशक से गांव के भीम सिंह ये कब्जा हटवाने के लिए विभिन्न स्तरों पर फरियाद लगा रहे थे। इनकी सुनवाई करते हुए आयुक्त ने गलियों से नाजायज कब्जे हटाने के आदेश सुनाए। तब बुधवार को प्रशासन की टीम पुलिस प्रशासन के साथ मौके पर पहुंची और कार्रवाई शुरू की। इस दौरान मजिस्ट्रेट तहसीलदार दिनेश कुमार व बीडीपीओ कंचन लता को बनाया गया। पटवारी दिलबाग सिंह विभागीय प्रक्रिया को पूरा करने में लगे रहे।
मौके पर भारी पुलिस बल के साथ सब इंसपेक्टर रामबीर सिंह मौजूद रहे। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि भीम सिंह ने दायर याचिका में उसके मकान से संबंधित खसरा नंबर 229 व 235 पर नाजायज कब्जा हटाने की फरियाद लगाई थी। इसमें तमाम पहलुओं पर सुनवाई करते हुए आयुक्त ने कलायत प्रशासन को गलियों से कब्जा हटाने के आदेश दिए थे। इसके आधार पर भारी पुलिस बल के साथ प्रशासन के अधिकारी गांव में पहुंचे। काफी समय तक दोनों पक्षों के साथ प्रशासन की बैठकों का दौर चला। इसके बाद कार्रवाई की गई। इस प्रशासन पूरी तरह चौकस रहा।
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याचिकाकर्ता भीम सिंह का कहना है कि उसका गांव खेड़ी लांबा में करीब 600 वर्ग गज में मकान है। शुरू से ही उसके घर में आने-जाने के लिए गलियों में नाजायज कब्जों के कारण रास्ता नहीं है। वर्ष 2013 से आवागमन के हक को लेकर विभिन्न स्तरों पर आवाज उठाता आया है। जब उसे न्याय नहीं मिला तो उसने एसडीएम, उपायुक्त और आयुक्त की अदालत की क्रमवार शरण ली। आखिरकार उसकी जीत हुई। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि न्यायालय के आदेशों के बाद भी प्रशासन नाजायज कब्जा हटाने में ढिलाई करता रहा। इसके मद्देनजर उसे सीएम विंडों पर फरियाद लगानी पड़ी। इस कार्रवाई के बाद भी उसे फिलहाल रास्ता नहीं मिला है। उन्होंने प्रशासन से समुचित रूप से कार्यवाही करते हुए न्यायालय के आदेशों का पालन करने की मांग की।
दूसरा पक्ष प्रशासन की इस कार्रवाई से खफा नजर आया। उनका कहना था कि प्रशासन ने आनन-फानन में निर्माण ढहाने का कार्य किया। मौके पर जो स्थिति बनी है उसके अनुसार अधिकारी सही मायने में निजी क्षेत्र व सरकारी गलियों की निशानदेही नहीं कर पाएं। यह भी कहा कि वे इसे लेकर जिला व हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
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कलायत। करनाल मंडल आयुक्त के आदेश के बाद खेड़ी लांबा गांव में बुधवार को 12 से ज्यादा अवैध निर्माण गिराए गए। गलियों के बीचोंबीच बने इन कथित अवैध निर्माणों को जेसीबी ने ढहा दिया। दूसरी ओर प्रशासन की कार्रवाई पर दूसरा पक्ष खफा नजर आया।
गौरतलब है कि करीब एक दशक से गांव के भीम सिंह ये कब्जा हटवाने के लिए विभिन्न स्तरों पर फरियाद लगा रहे थे। इनकी सुनवाई करते हुए आयुक्त ने गलियों से नाजायज कब्जे हटाने के आदेश सुनाए। तब बुधवार को प्रशासन की टीम पुलिस प्रशासन के साथ मौके पर पहुंची और कार्रवाई शुरू की। इस दौरान मजिस्ट्रेट तहसीलदार दिनेश कुमार व बीडीपीओ कंचन लता को बनाया गया। पटवारी दिलबाग सिंह विभागीय प्रक्रिया को पूरा करने में लगे रहे।
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मौके पर भारी पुलिस बल के साथ सब इंसपेक्टर रामबीर सिंह मौजूद रहे। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि भीम सिंह ने दायर याचिका में उसके मकान से संबंधित खसरा नंबर 229 व 235 पर नाजायज कब्जा हटाने की फरियाद लगाई थी। इसमें तमाम पहलुओं पर सुनवाई करते हुए आयुक्त ने कलायत प्रशासन को गलियों से कब्जा हटाने के आदेश दिए थे। इसके आधार पर भारी पुलिस बल के साथ प्रशासन के अधिकारी गांव में पहुंचे। काफी समय तक दोनों पक्षों के साथ प्रशासन की बैठकों का दौर चला। इसके बाद कार्रवाई की गई। इस प्रशासन पूरी तरह चौकस रहा।
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याचिकाकर्ता भीम सिंह का कहना है कि उसका गांव खेड़ी लांबा में करीब 600 वर्ग गज में मकान है। शुरू से ही उसके घर में आने-जाने के लिए गलियों में नाजायज कब्जों के कारण रास्ता नहीं है। वर्ष 2013 से आवागमन के हक को लेकर विभिन्न स्तरों पर आवाज उठाता आया है। जब उसे न्याय नहीं मिला तो उसने एसडीएम, उपायुक्त और आयुक्त की अदालत की क्रमवार शरण ली। आखिरकार उसकी जीत हुई। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि न्यायालय के आदेशों के बाद भी प्रशासन नाजायज कब्जा हटाने में ढिलाई करता रहा। इसके मद्देनजर उसे सीएम विंडों पर फरियाद लगानी पड़ी। इस कार्रवाई के बाद भी उसे फिलहाल रास्ता नहीं मिला है। उन्होंने प्रशासन से समुचित रूप से कार्यवाही करते हुए न्यायालय के आदेशों का पालन करने की मांग की।
दूसरा पक्ष प्रशासन की इस कार्रवाई से खफा नजर आया। उनका कहना था कि प्रशासन ने आनन-फानन में निर्माण ढहाने का कार्य किया। मौके पर जो स्थिति बनी है उसके अनुसार अधिकारी सही मायने में निजी क्षेत्र व सरकारी गलियों की निशानदेही नहीं कर पाएं। यह भी कहा कि वे इसे लेकर जिला व हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।