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आंगनबाड़ी केंद्रों में अब गेहूं की बजाए मिलेगा आटा
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06-कैथल। एक आंगनबाड़ी केन्द्र में मौजूद महिलाये व बच्चे।
- फोटो : Kaithal
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आंगनबाड़ी वर्कर्स को अब बच्चों के लिए गेहूं लेकर आटा चक्की तक जाने के झंझट से छुटकारा मिलेगा। सरकार द्वारा इस महीने से प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र पर गेहूं की बजाय फोर्टिफाइड आटा भेजा जाएगा। जिसके लिए एक आटा मिल से अनुबंध किया गया है। फोर्टिफाइड आटे को स्वास्थ्य के लिए लाभदायक बताया जा रहा है। दलिये के लिए गेहूं ही भेजी जाएगी।
प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र पर भेजा जाता है 2 क्विंटल प्रति माह गेहूं:
जिले में 1270 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। जहां पर हर माह 2 क्विंटल गेहूं भेजा जाता है। इस गेहूं से इन सेंटरों पर सप्ताह में चपाती, परांठे व पूड़ियां बनाई जाती हैं। इस गेहूं को वर्कर्स द्वारा भंडारित करके रखा जाता है। बाद में इसका आटा बनवाया जाता है। लेकिन अब उन्हें इस झंझट से मुक्ति मिलेगी।
केवल दलिया बनाने के लिए मिलेगा 50 किलो गेहूं: विभाग के फैसले के अनुसार सप्ताह में एक दिन के लिए दलिया बनाने के लिए ही 50 किलो गेहूं दिया जाएगा। 2 क्विंटल प्रति माह दी जाने वाली गेहूं में से बाकी का 1 क्विंटल 50 किलो आटा दिया जाएगा। जो 50 किलो की पैकिंग में होगा। बताया जा रहा है कि कलायत में स्थित एक आटा मिल के साथ इसके लिए अनुबंध किया गया है।
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मौसम व बच्चों की हाजिरी के हिसाब से भेजा जाए आटा: आंगनबाड़ी वर्कर्स यूनियन की राज्य महासचिव शकुंतला ने कहा कि पौष्टिक आटा भेजे जाने की सूचना मिली है। यह सही फैसला है। लेकिन बच्चों की हाजिरी व मौसम के हिसाब से आटा भेजा जाए। ताकि वर्कर्स को रखरखाव में परेशानी न हो। ज्यादा मात्रा में यदि आटा भेज दिया गया तो यह खराब भी हो सकता है। इसलिए जरूरत के अनुसार आटा भेजा जाए। वर्कर्स को गेहूं पिसवाने, गेहूं के भंडारण करने जैसी समस्या से छुटकारा मिलेगा। यह सराहनीय फैसला है।
जिला महिला एवं बाल कल्याण परियोजना अधिकारी रेनू पसरीचा ने बताया कि विभाग द्वारा इस संबंध में आदेश जारी किया गया है। जुलाई माह में सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर आटा भेजा जा रहा है। यह वर्कर्स के लिए भी काफी राहत देने वाला रहेगा। इससे उन्हें अब आटा चक्की तक नहीं जाना पड़ेगा। न ही गेहूं भंडारण में उन्हें परेशान होना पड़ेगा। आटा पैकिंग में आएगा। जिले में 1270 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
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प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र पर भेजा जाता है 2 क्विंटल प्रति माह गेहूं:
जिले में 1270 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। जहां पर हर माह 2 क्विंटल गेहूं भेजा जाता है। इस गेहूं से इन सेंटरों पर सप्ताह में चपाती, परांठे व पूड़ियां बनाई जाती हैं। इस गेहूं को वर्कर्स द्वारा भंडारित करके रखा जाता है। बाद में इसका आटा बनवाया जाता है। लेकिन अब उन्हें इस झंझट से मुक्ति मिलेगी।
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केवल दलिया बनाने के लिए मिलेगा 50 किलो गेहूं: विभाग के फैसले के अनुसार सप्ताह में एक दिन के लिए दलिया बनाने के लिए ही 50 किलो गेहूं दिया जाएगा। 2 क्विंटल प्रति माह दी जाने वाली गेहूं में से बाकी का 1 क्विंटल 50 किलो आटा दिया जाएगा। जो 50 किलो की पैकिंग में होगा। बताया जा रहा है कि कलायत में स्थित एक आटा मिल के साथ इसके लिए अनुबंध किया गया है।
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मौसम व बच्चों की हाजिरी के हिसाब से भेजा जाए आटा: आंगनबाड़ी वर्कर्स यूनियन की राज्य महासचिव शकुंतला ने कहा कि पौष्टिक आटा भेजे जाने की सूचना मिली है। यह सही फैसला है। लेकिन बच्चों की हाजिरी व मौसम के हिसाब से आटा भेजा जाए। ताकि वर्कर्स को रखरखाव में परेशानी न हो। ज्यादा मात्रा में यदि आटा भेज दिया गया तो यह खराब भी हो सकता है। इसलिए जरूरत के अनुसार आटा भेजा जाए। वर्कर्स को गेहूं पिसवाने, गेहूं के भंडारण करने जैसी समस्या से छुटकारा मिलेगा। यह सराहनीय फैसला है।
जिला महिला एवं बाल कल्याण परियोजना अधिकारी रेनू पसरीचा ने बताया कि विभाग द्वारा इस संबंध में आदेश जारी किया गया है। जुलाई माह में सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर आटा भेजा जा रहा है। यह वर्कर्स के लिए भी काफी राहत देने वाला रहेगा। इससे उन्हें अब आटा चक्की तक नहीं जाना पड़ेगा। न ही गेहूं भंडारण में उन्हें परेशान होना पड़ेगा। आटा पैकिंग में आएगा। जिले में 1270 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए निर्देश जारी कर दिए गए हैं।