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गीता जयंती के पहले दिन पंडाल खाली रहने के बाद स्कूली बच्चों का करवाया गया भ्रमण
Updated Thu, 30 Nov 2017 12:30 AM IST
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पहले दिन पंडाल खाली रहने पर दूसरे दिन बच्चों की लगवा दी लाइन
-जिला प्रशासन ने जिले के सभी स्कूल कॉलेजों के मुखियाओं को बच्चों को गीता जयंती दिखाने के जारी किए आदेश
-पूरा दिन स्कूलों के विद्यार्थियों दी गई गीता की जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। गीता जयंती समारोह में पहले दिन पंडाल खाली देखते हुए जिला प्रशासन ने जिले के सभी स्कूल कॉलेजों के मुखियाओं को गीता जयंती दिखाने के आदेश जारी किए। जनता की भागीदारी सुनिश्चित करवाने की जुगत में सफलता न मिलती देख बुधवार को सरकारी स्कूलों के बच्चों को प्रदर्शनी दिखाई गई। सुबह से ही गीता जयंती समारोह में जिला शिक्षा अधिकारी सहित अन्य अधिकारियों ने राजकीय कन्या स्कूल, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय व कई प्राइवेट स्कूलों को गीता जयंती समारोह देखने के आदेश जारी किए गए।
छह सांस्कृतिक टीमों ने दिन भर दी प्रस्तुति : जिला स्तरीय गीता जयंती महोत्सव के दौरान प्रदर्शनी स्थल पर कला एवं सांस्कृतिक विभाग की 6 सांस्कृतिक टीमों द्वारा दिनभर लोगों का भव्य प्रस्तुतियों से स्वागत किया जा रहा है। इन्हीं टीमों में राजस्थान के बुंदी जिला की कच्ची घोड़ी टीम भी शामिल है, जो सत्य नारायण चौबदार के नेतृत्व में 8 कलाकारों की टीम है। इस टीम में कच्ची घोड़ी नृत्य व लंबू का नृत्य लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।
कच्ची घोड़ी टीम द्वारा तेजा महाराज की जीवनी को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है तथा इस टीम में लंबू भी अपने करतब दिखाता है। हरियाणा में प्रथम बार पहुंचने वाली कच्ची घोड़ी की इस टीम के सदस्यों में सत्यनारायण के अलावा दशरथ, नयनका, रामबाबू, महावीर मीणा, सोजी लाल मीणा, रामप्रसाद सैनी व अरूण शामिल हैं। बुंदी जिला के करवर गांव से शुरू हुआ इस कच्ची घोड़ी टीम का सफर बदस्तूर जारी है। श्री सत्यनारायण चौबदार ने बताया कि उन्होंने आठवीं कक्षा में 1990 से कच्ची घोड़ी की शुरूआत ग्राम स्तर पर आयोजित होने वाली रामलीला के मंच से की थी। अब तक अपने सफर में यह टीम राजस्थान में आयोजित होने वाले सबसे बड़े व्यवसायिक मेले के अतिरिक्त मारवाड़ महोत्सव, जोधपुर, जयपुर, बुंदी, माउंटआबू, वाराणसी, अहमदाबाद व ऐर्णाकुलम में अपने कार्यक्रम प्रस्तुत कर चुके हैं। टीम द्वारा कच्ची घोड़ी नृत्य की शुरूआत गणेश वंदना से की जाती है तथा इस नृत्य में ठुमरैया, पचीड़ा व रसीया राग शामिल होते हैं।
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-जिला प्रशासन ने जिले के सभी स्कूल कॉलेजों के मुखियाओं को बच्चों को गीता जयंती दिखाने के जारी किए आदेश
-पूरा दिन स्कूलों के विद्यार्थियों दी गई गीता की जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। गीता जयंती समारोह में पहले दिन पंडाल खाली देखते हुए जिला प्रशासन ने जिले के सभी स्कूल कॉलेजों के मुखियाओं को गीता जयंती दिखाने के आदेश जारी किए। जनता की भागीदारी सुनिश्चित करवाने की जुगत में सफलता न मिलती देख बुधवार को सरकारी स्कूलों के बच्चों को प्रदर्शनी दिखाई गई। सुबह से ही गीता जयंती समारोह में जिला शिक्षा अधिकारी सहित अन्य अधिकारियों ने राजकीय कन्या स्कूल, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय व कई प्राइवेट स्कूलों को गीता जयंती समारोह देखने के आदेश जारी किए गए।
छह सांस्कृतिक टीमों ने दिन भर दी प्रस्तुति : जिला स्तरीय गीता जयंती महोत्सव के दौरान प्रदर्शनी स्थल पर कला एवं सांस्कृतिक विभाग की 6 सांस्कृतिक टीमों द्वारा दिनभर लोगों का भव्य प्रस्तुतियों से स्वागत किया जा रहा है। इन्हीं टीमों में राजस्थान के बुंदी जिला की कच्ची घोड़ी टीम भी शामिल है, जो सत्य नारायण चौबदार के नेतृत्व में 8 कलाकारों की टीम है। इस टीम में कच्ची घोड़ी नृत्य व लंबू का नृत्य लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।
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कच्ची घोड़ी टीम द्वारा तेजा महाराज की जीवनी को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है तथा इस टीम में लंबू भी अपने करतब दिखाता है। हरियाणा में प्रथम बार पहुंचने वाली कच्ची घोड़ी की इस टीम के सदस्यों में सत्यनारायण के अलावा दशरथ, नयनका, रामबाबू, महावीर मीणा, सोजी लाल मीणा, रामप्रसाद सैनी व अरूण शामिल हैं। बुंदी जिला के करवर गांव से शुरू हुआ इस कच्ची घोड़ी टीम का सफर बदस्तूर जारी है। श्री सत्यनारायण चौबदार ने बताया कि उन्होंने आठवीं कक्षा में 1990 से कच्ची घोड़ी की शुरूआत ग्राम स्तर पर आयोजित होने वाली रामलीला के मंच से की थी। अब तक अपने सफर में यह टीम राजस्थान में आयोजित होने वाले सबसे बड़े व्यवसायिक मेले के अतिरिक्त मारवाड़ महोत्सव, जोधपुर, जयपुर, बुंदी, माउंटआबू, वाराणसी, अहमदाबाद व ऐर्णाकुलम में अपने कार्यक्रम प्रस्तुत कर चुके हैं। टीम द्वारा कच्ची घोड़ी नृत्य की शुरूआत गणेश वंदना से की जाती है तथा इस नृत्य में ठुमरैया, पचीड़ा व रसीया राग शामिल होते हैं।
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