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निस्वार्थ समाज सेवा में रोड़े अटका रहे है संबंधित अधिकारी:-रवि भूषण गर्ग
Updated Mon, 09 Oct 2017 12:31 AM IST
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विभागीय लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे कैथल की बाल देखरेख संस्थाएं
बाल संरक्षण आयोग सदस्या के निरीक्षण में आरोपों पर भड़के आश्रम संचालक
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। दो दिन पूर्व बाल संरक्षण आयोग सदस्य रमनदीप कौर द्वारा किए गए बाल आश्रमों के निरीक्षण के बाद सनातन धर्म मंदिर में चल रहे बाल उपवन संचालकों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि जिले कैथल में दो सीसीआई केंद्र एवं एक ओपन शेल्टर होम सरकारी नियमानुसार चलते हुए समाज की सेवा कर रहे है परंतु जिला बाल संरक्षण अधिकारी, बाल कल्याण समिति कैथल एवं संबंधित विभाग की लचर कार्रवाई और लापरवाही की मार झेल रहे है। बाल उपवन आश्रम भी इन अधिकारियों की कार्यप्रणाली का दंश झेल रहा है।
भाजपा नेता एवं सनातन धर्म मंदिर सभा के प्रधान रविभूषण गर्ग ने कहा कि बाल उपवन आश्रम जिला कैथल में पिछले 6 सालो से जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के अंतर्गत एवं हरियाणा सरकार के नियमों के अनुसार चल रहा है। इस आश्रम में 34 बच्चे रह रहे हैं जिनकी सारी देखभाल व व्यवस्था श्री सनातन धर्म मंदिर सभा समाज के सहयोग से निस्वार्थ भाव से कर रही है। लेकिन जिला बाल संरक्षण अधिकारी एवं बाल कल्याण समिति कैथल की कार्यप्रणाली से यह बाल उपवन आश्रम बुरी तरह प्रभावित है। व्यवस्थाओं के लिए सभा ने आज तक हरियाणा सरकार से कोई वित्तीय सहायता नहीं ली है। प्रशासन द्वारा चलाए गए ऑपरेशन मुस्कान के तहत पकड़े बच्चे और स्पेशल कटेगरी के तहत मिले बच्चों को भी इन सामान्य बच्चों के साथ रखने के आदेश दे दिए जाते हैं, जो की गलत है।
इसी तरह एक बच्चा राजू उम्र 17 वर्ष दिनांक 3/5/2017 को बाल कल्याण समित कैथल के पत्र क्रमांक 586/2/3.5.2017 अनुसार बाल उपवन आश्रम में भेजा गया था जो कि स्पेशल कटेगरी में आता था, जिसे बाल उपवन आश्रम में रखने के लिए मना कर दिया गया था। लेकिन विभाग के निवेदन पर 1 दिन के लिए यह कह कर रखवाया गया था कि दूसरे दिन इसे स्पेशल होम भेज दिया जाएगा। बालक को सौंपने के बाद विभाग से न ही कोई इसे देखने आया और न ही कोई खोज खबर ली गई। उस बच्चे ने कई बार भागने की भी कोशिश की। अंतत: वह 14 मई को बिना किसी को बताए चलाया गया। जिसकी सूचना संबंधित विभाग ही नहीं पुलिस को भी दी गई। बाल आयोग की सदस्य रमनदीप कौर के आश्रम विजिट के दौरान उपरोक्त विषय की सारी जानकारी मौखिक रूप से दे दी गई थी।
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महिला एवं बाल विकास विभाग हरियाणा पंचकूला द्वारा अनुभाग 34 (3) जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखरेख और सुरक्षा) एक्ट 2000 के अंतर्गत दिनांक 30/5/2013 को बाल उपवन आश्रम का पंजीकरण एक वर्ष के लिए किया गया। रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण के लिए 20.6.2017 को संबंधित दस्तावेज संबंधित अधिकारी को आगामी कार्रवाई हेतु सौंपा गया लेकिन अभी तक कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। इस अवसर पर रवि भूषण गर्ग, इंद्र बंसल, मोमन चंद गुप्ता, अजय श्रीवास्तव मौजूद थे।
दूसरी ओर बाल संरक्षण आयोग सदस्य रमनदीप कौर का कहना है कि उनका मुख्य मकसद बच्चे का संरक्षण करना है। बाल समिति, पुलिस व आश्रम तीनों की लापरवाही की रिपोर्ट भेजी जा रही है। रही बात फाइल पेंडिंग की तो उनके पास ऐसी कोई फाइल लंबित नहीं है।
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बाल संरक्षण आयोग सदस्या के निरीक्षण में आरोपों पर भड़के आश्रम संचालक
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। दो दिन पूर्व बाल संरक्षण आयोग सदस्य रमनदीप कौर द्वारा किए गए बाल आश्रमों के निरीक्षण के बाद सनातन धर्म मंदिर में चल रहे बाल उपवन संचालकों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि जिले कैथल में दो सीसीआई केंद्र एवं एक ओपन शेल्टर होम सरकारी नियमानुसार चलते हुए समाज की सेवा कर रहे है परंतु जिला बाल संरक्षण अधिकारी, बाल कल्याण समिति कैथल एवं संबंधित विभाग की लचर कार्रवाई और लापरवाही की मार झेल रहे है। बाल उपवन आश्रम भी इन अधिकारियों की कार्यप्रणाली का दंश झेल रहा है।
भाजपा नेता एवं सनातन धर्म मंदिर सभा के प्रधान रविभूषण गर्ग ने कहा कि बाल उपवन आश्रम जिला कैथल में पिछले 6 सालो से जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के अंतर्गत एवं हरियाणा सरकार के नियमों के अनुसार चल रहा है। इस आश्रम में 34 बच्चे रह रहे हैं जिनकी सारी देखभाल व व्यवस्था श्री सनातन धर्म मंदिर सभा समाज के सहयोग से निस्वार्थ भाव से कर रही है। लेकिन जिला बाल संरक्षण अधिकारी एवं बाल कल्याण समिति कैथल की कार्यप्रणाली से यह बाल उपवन आश्रम बुरी तरह प्रभावित है। व्यवस्थाओं के लिए सभा ने आज तक हरियाणा सरकार से कोई वित्तीय सहायता नहीं ली है। प्रशासन द्वारा चलाए गए ऑपरेशन मुस्कान के तहत पकड़े बच्चे और स्पेशल कटेगरी के तहत मिले बच्चों को भी इन सामान्य बच्चों के साथ रखने के आदेश दे दिए जाते हैं, जो की गलत है।
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इसी तरह एक बच्चा राजू उम्र 17 वर्ष दिनांक 3/5/2017 को बाल कल्याण समित कैथल के पत्र क्रमांक 586/2/3.5.2017 अनुसार बाल उपवन आश्रम में भेजा गया था जो कि स्पेशल कटेगरी में आता था, जिसे बाल उपवन आश्रम में रखने के लिए मना कर दिया गया था। लेकिन विभाग के निवेदन पर 1 दिन के लिए यह कह कर रखवाया गया था कि दूसरे दिन इसे स्पेशल होम भेज दिया जाएगा। बालक को सौंपने के बाद विभाग से न ही कोई इसे देखने आया और न ही कोई खोज खबर ली गई। उस बच्चे ने कई बार भागने की भी कोशिश की। अंतत: वह 14 मई को बिना किसी को बताए चलाया गया। जिसकी सूचना संबंधित विभाग ही नहीं पुलिस को भी दी गई। बाल आयोग की सदस्य रमनदीप कौर के आश्रम विजिट के दौरान उपरोक्त विषय की सारी जानकारी मौखिक रूप से दे दी गई थी।
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महिला एवं बाल विकास विभाग हरियाणा पंचकूला द्वारा अनुभाग 34 (3) जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखरेख और सुरक्षा) एक्ट 2000 के अंतर्गत दिनांक 30/5/2013 को बाल उपवन आश्रम का पंजीकरण एक वर्ष के लिए किया गया। रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण के लिए 20.6.2017 को संबंधित दस्तावेज संबंधित अधिकारी को आगामी कार्रवाई हेतु सौंपा गया लेकिन अभी तक कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। इस अवसर पर रवि भूषण गर्ग, इंद्र बंसल, मोमन चंद गुप्ता, अजय श्रीवास्तव मौजूद थे।
दूसरी ओर बाल संरक्षण आयोग सदस्य रमनदीप कौर का कहना है कि उनका मुख्य मकसद बच्चे का संरक्षण करना है। बाल समिति, पुलिस व आश्रम तीनों की लापरवाही की रिपोर्ट भेजी जा रही है। रही बात फाइल पेंडिंग की तो उनके पास ऐसी कोई फाइल लंबित नहीं है।