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Haryana: एनिमिया मुक्त अभियान में हरियाणा ने हासिल किया दूसरा स्थान, पहले पायदान पर रहा ये राज्य
Tue, 09 Sep 2025 04:42 PM IST
शाहिल शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Tue, 09 Sep 2025 04:42 PM IST
सार
हरियाणा ने एनीमिया मुक्त अभियान में 85.2 अंक प्राप्त कर देश में दूसरा स्थान हासिल किया है। इसका श्रेय लक्षित समूहों में आयरन और फोलिक एसिड के मजबूत कवरेज को जाता है।
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एनीमिया
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
विस्तार
हरियाणा ने 2025-26 की पहली तिमाही में एनीमिया मुक्त अभियान में 85.2 अंक प्राप्त कर देश में दूसरा स्थान हासिल किया है। पहले नंबर पर आंध्र प्रदेश है, जिसने 88 अंक हासिल किए हैं। हरियाणा के बेहतर प्रदर्शन का श्रेय लक्षित समूहों में आयरन और फोलिक एसिड के मजबूत कवरेज को जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा ने छह महीने से पांच साल तक के बच्चों में 90.5 फीसदी, 10 से 19 साल के आयु वर्ग और गर्भवती महिलाओं के कवरेज में 95 फीसदी लक्ष्य को हासिल किया।
मगर स्तनपान कराने वाली माताओं में यह 65.9 फीसदी तक सीमित रहा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक डॉ. वीरेंद्र यादव ने बताया, हरियाणा को एनिमिया मुक्त बनाने के लिए पिछले कुछ महीनों से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य टीमों ने आयरन और फोलिक एसिड की गोलियों और दूसरी महत्वपूर्ण सलाह को लोगों तक पहुंचाने का कार्य किया है। सरकार ने स्कूलों और समुदाय स्तर पर एनीमिया की जांच और उपचार की व्यवस्था की।
इसके साथ ही मलेरिया और फ्लोरोसिस जैसे गैर-पोषण संबंधी कारणों पर भी ध्यान दिया गया, ताकि एनीमिया के पीछे छिपे कारकों को खत्म किया जा सके। इसके अतिरिक्त, अटल (संपूर्ण एनीमिया सीमा सुनिश्चित करना) अभियान लागू किया गया। इस अभियान के अंतर्गत लाभार्थियों की ट्रैकिंग और डेटा विश्लेषण के लिए आईटी प्लेटफॉर्म का उपयोग किया गया, जिससे समय पर निगरानी और सुधार संभव हो पाया। कुछ समय पहले तक हरियाणा की 61 फीसदी से ज्यादा महिलाएं एनिमिया से ग्रसित थी। यानी राज्य की आधी महिलाओं में खून की कमी थी।
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मगर स्तनपान कराने वाली माताओं में यह 65.9 फीसदी तक सीमित रहा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक डॉ. वीरेंद्र यादव ने बताया, हरियाणा को एनिमिया मुक्त बनाने के लिए पिछले कुछ महीनों से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य टीमों ने आयरन और फोलिक एसिड की गोलियों और दूसरी महत्वपूर्ण सलाह को लोगों तक पहुंचाने का कार्य किया है। सरकार ने स्कूलों और समुदाय स्तर पर एनीमिया की जांच और उपचार की व्यवस्था की।
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इसके साथ ही मलेरिया और फ्लोरोसिस जैसे गैर-पोषण संबंधी कारणों पर भी ध्यान दिया गया, ताकि एनीमिया के पीछे छिपे कारकों को खत्म किया जा सके। इसके अतिरिक्त, अटल (संपूर्ण एनीमिया सीमा सुनिश्चित करना) अभियान लागू किया गया। इस अभियान के अंतर्गत लाभार्थियों की ट्रैकिंग और डेटा विश्लेषण के लिए आईटी प्लेटफॉर्म का उपयोग किया गया, जिससे समय पर निगरानी और सुधार संभव हो पाया। कुछ समय पहले तक हरियाणा की 61 फीसदी से ज्यादा महिलाएं एनिमिया से ग्रसित थी। यानी राज्य की आधी महिलाओं में खून की कमी थी।
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