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विधानसभा की तरह चलाएंगे सदन : मेयर
Gurgaon
Updated Thu, 06 Dec 2012 05:30 AM IST
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गुड़गांव। मेेयर विमल यादव ने कहा कि सदन को चलाने के विधानसभा की प्रणाली के तहत काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्षदों की ओर से उनकी समस्याओं को एजेंडे का हिस्सा बनाया जाएगा। इसके लिए पिछली बैठक में फैसला लिया गया था, जिसके बाद चार पार्षदों की ओर से मिले प्रस्ताव एजेंडे का हिस्सा बनाए गए हैं। अगली बैठक को पूरी शांति के साथ चलाया जाएगा।
मेयर ने कहा कि निगम के नए आयुक्त को सदन की प्राथमिकताओं से अवगत कराया जाएगा। इसके बाद उनके साथ विकास के मुद्दों को बढ़ाने के लिए विमर्श किया जाएगा। हर पार्षद को बोलने के लिए तय समय दिया जाएगा। बिना वजह की बहस को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि सदन में संसदीय भाषा का उपयोग करने के लिए पहले ही हिदायत जारी की जाएगी। उन्होंने कहा कि अब तक अधिकारियों की ओर से ही एजेंडा तैयार किया जाता था, जिस कारण कई बिना काम के प्रस्ताव इसमें डाले गए थे। ऐसे प्रस्ताव को एजेंडे से बाहर निकाला जाएगा। इसके लिए काम शुरू हो गया है। पार्षदों की ओर से मिलने वाले सुझाव और शिकायतों को एजेंडे में रखा जाएगा। अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा।
उन्होंने कहा कि विधानसभा की तरह पार्षद अपने प्रस्ताव और सवाल पहले भजेंगे। सदन की बैठक में अधिकारी इन पर अपना जवाब भेजेंगे। अधिकारियों को भी अपना पक्ष रखने के लिए पूरा मौका मिलेगा, जिससे वह अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकेंगे। एक सवाल के जवाब में उन्हाेंने कहा कि विकास कार्यों के लिए फाइनेंस समिति की बैठक अलग से होती है। फाइनेंस समिति की बैठक की पूरी कार्यवाही सदन में रखी जाती है।
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मेयर ने कहा कि निगम के नए आयुक्त को सदन की प्राथमिकताओं से अवगत कराया जाएगा। इसके बाद उनके साथ विकास के मुद्दों को बढ़ाने के लिए विमर्श किया जाएगा। हर पार्षद को बोलने के लिए तय समय दिया जाएगा। बिना वजह की बहस को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि सदन में संसदीय भाषा का उपयोग करने के लिए पहले ही हिदायत जारी की जाएगी। उन्होंने कहा कि अब तक अधिकारियों की ओर से ही एजेंडा तैयार किया जाता था, जिस कारण कई बिना काम के प्रस्ताव इसमें डाले गए थे। ऐसे प्रस्ताव को एजेंडे से बाहर निकाला जाएगा। इसके लिए काम शुरू हो गया है। पार्षदों की ओर से मिलने वाले सुझाव और शिकायतों को एजेंडे में रखा जाएगा। अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा।
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उन्होंने कहा कि विधानसभा की तरह पार्षद अपने प्रस्ताव और सवाल पहले भजेंगे। सदन की बैठक में अधिकारी इन पर अपना जवाब भेजेंगे। अधिकारियों को भी अपना पक्ष रखने के लिए पूरा मौका मिलेगा, जिससे वह अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकेंगे। एक सवाल के जवाब में उन्हाेंने कहा कि विकास कार्यों के लिए फाइनेंस समिति की बैठक अलग से होती है। फाइनेंस समिति की बैठक की पूरी कार्यवाही सदन में रखी जाती है।
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