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हड़ताल पर ग्रामीण बैंक कर्मचारी, लोग परेशान
fatehabad/bureau
Updated Fri, 11 Mar 2016 12:42 AM IST
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ग्रामीण व सहकारी बैंकों का निजीकरण के विरोधस्वरूप वीरवार को जिले के सभी ग्रामीण बैंक के कर्मचारी दो दिन की हड़ताल पर चले गए। जिले भर में 29 सहकारी एवं 28 सर्वहरियाणा ग्रामीण बैंक बंद रहे। बैंकों में काम नहीं होने से खाताधारकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक फतेहाबाद जोन के ऑफिसर यूनियन के महासचिव संदीप बैनिवाल ने बताया कि उनकी सरकार से काफी समय से मांगे लंबित थी जिस पर सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही है। इसी के चलते ग्रामीण बैंक के कर्मचारियों व अधिकारियों ने मांगो को लेकर दो दिन की हड़ताल करने का निर्णय लिया है।
उन्होंने बताया कि उनकी मांगें हैं कि ग्रामीण बैंक अधिनियम 1976 में संशोधन को वापिस लिया जाएं, अनुकंपा नियुक्ति का आदेश लागू किया जाएं, पेंशन व पी.एफ भी अन्य बैंकों की भांति मिले, 10वें वेतन समझौते को ग्रामीण बैंकों में भी पूर्णरूपेण लागू, वेतन भत्ते व अन्य लाभों में समानता, मित्रा कमेटी की रिपोर्ट को रद्द हो, ग्रामीण बैंकों में आउटसोर्सिंग बंद हो, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित करें, नवीन भर्ती में लिपिकीय स्टाफ को स्नातक वेतन वृद्धि हो, ग्रामीण बैंक के सभी अधिकारियों व लिपिकीय स्टाफ को एक समान ग्रेच्युटी, ग्रामीण बैंक कर्मियों को प्रायोजक बैंक कर्मचारियों के समान सेवा शर्तें लागू की जाएं।
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बैनिवाल ने बताया कि ग्रामीण बैंक अधिनियम 1976 ग्रामीण बैंको के निजीकरण के लिए ताबड़ तोड़ एक्ट में संशोधन कर यह पूंजीवादी सरकार अपने 50 फीसदी शेयर को 16 फीसदी करने को ठान चुकी है। संदीप बैनिवाल ने बताया कि उनकी जानकारी में आया है कि निजीकरण की शुरुआत गुजरात की सौराष्ट्र ग्रामीण बैंक से होना तय हो गई है। जिस भी सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई में सरकार की हिस्सेदारी 50 फीसदी से कम होती है वे उपक्रम निजी कहलाते हैं। जब निजी ग्रामीण बैंक हो जाएंगे तो हमारी जॉब सिक्यूरिटी पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा।
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सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक फतेहाबाद जोन के ऑफिसर यूनियन के महासचिव संदीप बैनिवाल ने बताया कि उनकी सरकार से काफी समय से मांगे लंबित थी जिस पर सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही है। इसी के चलते ग्रामीण बैंक के कर्मचारियों व अधिकारियों ने मांगो को लेकर दो दिन की हड़ताल करने का निर्णय लिया है।
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उन्होंने बताया कि उनकी मांगें हैं कि ग्रामीण बैंक अधिनियम 1976 में संशोधन को वापिस लिया जाएं, अनुकंपा नियुक्ति का आदेश लागू किया जाएं, पेंशन व पी.एफ भी अन्य बैंकों की भांति मिले, 10वें वेतन समझौते को ग्रामीण बैंकों में भी पूर्णरूपेण लागू, वेतन भत्ते व अन्य लाभों में समानता, मित्रा कमेटी की रिपोर्ट को रद्द हो, ग्रामीण बैंकों में आउटसोर्सिंग बंद हो, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित करें, नवीन भर्ती में लिपिकीय स्टाफ को स्नातक वेतन वृद्धि हो, ग्रामीण बैंक के सभी अधिकारियों व लिपिकीय स्टाफ को एक समान ग्रेच्युटी, ग्रामीण बैंक कर्मियों को प्रायोजक बैंक कर्मचारियों के समान सेवा शर्तें लागू की जाएं।
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बैनिवाल ने बताया कि ग्रामीण बैंक अधिनियम 1976 ग्रामीण बैंको के निजीकरण के लिए ताबड़ तोड़ एक्ट में संशोधन कर यह पूंजीवादी सरकार अपने 50 फीसदी शेयर को 16 फीसदी करने को ठान चुकी है। संदीप बैनिवाल ने बताया कि उनकी जानकारी में आया है कि निजीकरण की शुरुआत गुजरात की सौराष्ट्र ग्रामीण बैंक से होना तय हो गई है। जिस भी सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई में सरकार की हिस्सेदारी 50 फीसदी से कम होती है वे उपक्रम निजी कहलाते हैं। जब निजी ग्रामीण बैंक हो जाएंगे तो हमारी जॉब सिक्यूरिटी पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा।