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Charkhi Dadri News: विमान हादसे पर आधारित दादरी के देवदूत पुस्तक का किया विमोचन
Sat, 06 Jun 2026 11:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sat, 06 Jun 2026 11:30 PM IST
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अनाज मंडी में पुस्तक का विमोचन करते हुए गणमाण्य लोग।
- फोटो : 1
चरखी दादरी। 1996 के चरखी दादरी विमान हादसे के प्रत्यक्षदर्शी और वरिष्ठ लेखक अतुल सिंघल तथा सह-लेखक नरेंद्र वर्मा शनिवार को दादरी पहुंचे। नई अनाज मंडी में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान लेखकों ने अपनी बहुचर्चित पुस्तक ‘12 नवंबर 1996 दादरी के देवदूत’ और ‘विकसित भारत 2047’ के विभिन्न संस्करणों का विमोचन कर इन्हें जारी किया।
मुख्य लेखक अतुल सिंघल ने कहा कि चरखी दादरी मेरी जन्मभूमि है। यहां ‘दादरी के देवदूत’ पुस्तक का विमोचन करना मेरे लिए अत्यंत गौरव और भावुकता का विषय है। इस पुस्तक का मुख्य उद्देश्य हादसे के समय दादरी के स्वयंसेवकों द्वारा दिखाए गए अदम्य साहस, सेवा भावना और उनकी गौरव गाथा को पूरी दुनिया के सामने लाना है, जिसमें हम काफी हद तक सफल रहे हैं।
लेखक ने बताया कि इस पुस्तक की रूपरेखा और सामग्री जुटाने का काम पिछले एक दशक से चल रहा था लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी समारोह के अवसर पर संघ चालक डॉ. मोहन भागवत के उद्बोधन से प्रेरित होकर इस पुस्तक को अंतिम रूप दिया गया। वैश्विक स्तर पर पाठकों तक पहुंच बनाने के लिए इस पुस्तक का 6 भाषाओं में अनुवाद किया गया है।
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इस पुस्तक का भव्य राष्ट्रीय विमोचन नई दिल्ली के प्रधानमंत्री सभागार में आयोजित किया गया था जिसमें चरखी दादरी के स्थानीय स्वयंसेवकों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। दिल्ली में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में देश के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने संघ के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की उपस्थिति में इस पुस्तक का विमोचन किया था।
बता दें कि वर्ष 1996 के इस भीषण विमान हादसे में न्यायमूर्ति अमानुल्लाह के माता-पिता का भी देहांत हो गया था और वे पिछले वर्ष अपने माता-पिता को श्रद्धांजलि देने चरखी दादरी आए थे। अतुल सिंघल केंद्र सरकार की नीतियों पर भी कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिख चुके हैं।
अतुल सिंघल ने भावुक अपील करते हुए कहा कि यह पुस्तक केवल एक घटना का विवरण नहीं है, बल्कि यह चरखी दादरी के लोगों के संस्कारों और उनके सेवाभावी स्वभाव का जीवंत दस्तावेज है। मेरी स्थानीय निवासियों, युवाओं और सामाजिक संस्थाओं से विशेष प्रार्थना है कि वे इस पुस्तक के प्रचार-प्रसार में अपना अमूल्य योगदान दें।
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मुख्य लेखक अतुल सिंघल ने कहा कि चरखी दादरी मेरी जन्मभूमि है। यहां ‘दादरी के देवदूत’ पुस्तक का विमोचन करना मेरे लिए अत्यंत गौरव और भावुकता का विषय है। इस पुस्तक का मुख्य उद्देश्य हादसे के समय दादरी के स्वयंसेवकों द्वारा दिखाए गए अदम्य साहस, सेवा भावना और उनकी गौरव गाथा को पूरी दुनिया के सामने लाना है, जिसमें हम काफी हद तक सफल रहे हैं।
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लेखक ने बताया कि इस पुस्तक की रूपरेखा और सामग्री जुटाने का काम पिछले एक दशक से चल रहा था लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी समारोह के अवसर पर संघ चालक डॉ. मोहन भागवत के उद्बोधन से प्रेरित होकर इस पुस्तक को अंतिम रूप दिया गया। वैश्विक स्तर पर पाठकों तक पहुंच बनाने के लिए इस पुस्तक का 6 भाषाओं में अनुवाद किया गया है।
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इस पुस्तक का भव्य राष्ट्रीय विमोचन नई दिल्ली के प्रधानमंत्री सभागार में आयोजित किया गया था जिसमें चरखी दादरी के स्थानीय स्वयंसेवकों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। दिल्ली में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में देश के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने संघ के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की उपस्थिति में इस पुस्तक का विमोचन किया था।
बता दें कि वर्ष 1996 के इस भीषण विमान हादसे में न्यायमूर्ति अमानुल्लाह के माता-पिता का भी देहांत हो गया था और वे पिछले वर्ष अपने माता-पिता को श्रद्धांजलि देने चरखी दादरी आए थे। अतुल सिंघल केंद्र सरकार की नीतियों पर भी कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिख चुके हैं।
अतुल सिंघल ने भावुक अपील करते हुए कहा कि यह पुस्तक केवल एक घटना का विवरण नहीं है, बल्कि यह चरखी दादरी के लोगों के संस्कारों और उनके सेवाभावी स्वभाव का जीवंत दस्तावेज है। मेरी स्थानीय निवासियों, युवाओं और सामाजिक संस्थाओं से विशेष प्रार्थना है कि वे इस पुस्तक के प्रचार-प्रसार में अपना अमूल्य योगदान दें।