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Charkhi Dadri News: कृष्ण ने गोवर्धन उठा ब्रजवासियों को बचाया
Sun, 21 Sep 2025 12:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sun, 21 Sep 2025 12:46 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। पुराना बस स्टैंड पर चल रही रासलीला के 10वें दिन गिरिराज भगवान की पूजा का मंचन किया गया। वृंदावन से रासलीला आचार्य मुकेशचंद्र ठाकुर एवं उनकी मंडली ने इस प्रसंग का सजीव मंचन किया।
मंचन के दौरान दर्शाया गया कि नंदबाबा के आंगन में ब्रजमंडल की पंचायत होती है। यहां हर वर्ष की तरह इंद्रदेव की पूजा की तैयारियों पर चर्चा की जाती है। इसी बीच भगवान कृष्ण अपने स्वप्न का उल्लेख करते हुए बताते हैं कि इस बार गिरिराज भगवान की पूजा की जाए, इससे सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।
प्रारंभ में पंचायत के सरपंच इस प्रस्ताव का विरोध करते हैं, बाद में ब्रजवासी कृष्ण के पक्ष में होकर गिरिराज भगवान की पूजा के लिए सहमत हो जाते हैं। इसके बाद सभी भक्त हर्षोल्लास से गिरिराज पूजन की तैयारी करते हैं और निश्चित समय पर पूजन सम्पन्न होता है।
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यह देखकर इंद्रदेव क्रोधित हो जाते हैं और सात दिन तक लगातार वर्षा करते हैं, जिससे पूरा ब्रजमंडल जलमग्न हो जाता है। ब्रजवासी कृष्ण की शरण में जाते हैं। तब भगवान कृष्ण अपनी तर्जनी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत धारण कर बारिश से सभी की रक्षा करते हैं। इंद्रदेव को अपनी भूल का एहसास होता है और वह कृष्ण एवं गिरिराज भगवान से क्षमा मांगते हैं।
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चरखी दादरी। पुराना बस स्टैंड पर चल रही रासलीला के 10वें दिन गिरिराज भगवान की पूजा का मंचन किया गया। वृंदावन से रासलीला आचार्य मुकेशचंद्र ठाकुर एवं उनकी मंडली ने इस प्रसंग का सजीव मंचन किया।
मंचन के दौरान दर्शाया गया कि नंदबाबा के आंगन में ब्रजमंडल की पंचायत होती है। यहां हर वर्ष की तरह इंद्रदेव की पूजा की तैयारियों पर चर्चा की जाती है। इसी बीच भगवान कृष्ण अपने स्वप्न का उल्लेख करते हुए बताते हैं कि इस बार गिरिराज भगवान की पूजा की जाए, इससे सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।
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प्रारंभ में पंचायत के सरपंच इस प्रस्ताव का विरोध करते हैं, बाद में ब्रजवासी कृष्ण के पक्ष में होकर गिरिराज भगवान की पूजा के लिए सहमत हो जाते हैं। इसके बाद सभी भक्त हर्षोल्लास से गिरिराज पूजन की तैयारी करते हैं और निश्चित समय पर पूजन सम्पन्न होता है।
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यह देखकर इंद्रदेव क्रोधित हो जाते हैं और सात दिन तक लगातार वर्षा करते हैं, जिससे पूरा ब्रजमंडल जलमग्न हो जाता है। ब्रजवासी कृष्ण की शरण में जाते हैं। तब भगवान कृष्ण अपनी तर्जनी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत धारण कर बारिश से सभी की रक्षा करते हैं। इंद्रदेव को अपनी भूल का एहसास होता है और वह कृष्ण एवं गिरिराज भगवान से क्षमा मांगते हैं।