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Chandigarh-Haryana News: हरियाणा की नई ताकत... सुपर-100 ने तैयार किए 28 ग्लोबल इंजीनियर
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-किसान-मजदूर परिवारों के मेधावी बच्चों को माइक्रोसॉफ्ट, वॉलमार्ट और तारापुर एटॉमिक पावर स्टेशन जैसी दिग्गज कंपनियों में प्लेसमेंट
कुलदीप शुक्ला
चंडीगढ़। प्रदेश सरकार के महत्वाकांक्षी सुपर-100 शैक्षणिक कार्यक्रम का शानदार परिणाम सामने आया है। कार्यक्रम से जुड़े पहले दो बैचों के 28 छात्रों को नवंबर 2024 से नवंबर 2025 के बीच 13 लाख से 31 लाख रुपये वार्षिक तक के पैकेज पर देश-विदेश की नामी कंपनियों में प्लेसमेंट मिला है। खास बात यह है कि ये सभी बच्चे किसान, मजदूर, शिक्षक और साधारण परिवारों से संबंध रखते हैं, जिन्होंने सरकारी स्कूलों से पढ़ाई कर आईआईटी-एनआईटी जैसे शीर्ष संस्थानों में दाखिला लिया और अब प्रतिष्ठित कंपनियों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
हरियाणा के सुपर-100 कार्यक्रम के दूसरे बैच से निकलकर गांवों के सामान्य परिवारों के बच्चों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में शानदार स्थान हासिल किया है। वर्ष 2020 और 2021 में आईआईटी-एनआईटी में दाखिला लेने वाले इन छात्रों ने बीटेक पूरी करते ही माइक्रोसॉफ्ट, पब्लिसिस सैपिएंट, वॉलमार्ट, फेनोम, टारापुर एटॉमिक पावर स्टेशन, लेटेंटफोर्स और टीरेस्टा जैसी कंपनियों से ऑफर प्राप्त किए हैं। सबसे ऊंचा पैकेज 31 लाख रुपये का आईआईटी मुंबई की छात्रा काजल (फतेहाबाद) को मिला है, जिनके पिता किसान हैं। इसके अलावा दिशत (सोनीपत), आईआईटी रोपड़ - 20 लाख, कमल शर्मा (फरीदाबाद), एनआईटी कुरुक्षेत्र - 20 लाख,
परवीन (सिरसा), आईआईटी दिल्ली – 18 लाख, स्वाति (भिवानी), एनआईटी पटना – 18 लाख, योगेश (गुरुग्राम), आईआईटी मंडी – 18 लाख, इन्हें 13 से 20 लाख तक के पैकेज मिले हैं। अनेक विद्यार्थियों के पिता दिहाड़ी मजदूर, किसान, बिजली मिस्त्री और सरकारी शिक्षक हैं। ऐसे परिवारों के बच्चों की यह उपलब्धि पूरे हरियाणा के लिए प्रेरणास्रोत बनी है।
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चार साल में 226 छात्र पहुंचे आईआईटी-एनआईटी
सुपर-100 कार्यक्रम के तहत पिछले चार वर्षों में 226 बच्चे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) में दाखिला ले चुके हैं। इनमें 107 छात्र आईआईटी और 119 छात्र आईआईआईटी-एनआईटी में पहुंचे। इनमें 33 छात्राएं शामिल हैं।
इस कार्यक्रम की शुरुआत 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने की थी, जिसके तहत ग्रामीण पृष्ठभूमि के मेधावी छात्रों को बिना फीस, बिना कोचिंग खर्च और विशेषज्ञ मार्गदर्शन के साथ निशुल्क तैयारी कराई जाती है।
सुपर-100 कार्यक्रम ने साबित किया है कि यदि सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो छोटे गांवों का बच्चा भी माइक्रोसॉफ्ट और वॉलमार्ट जैसी दिग्गज कंपनियों में जगह बना सकता है। यह उपलब्धि इन परिवारों के लिए गर्व और प्रदेश के छात्रों के लिए प्रेरणा है।
-महिपाल ढांडा, शिक्षा मंत्री
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कुलदीप शुक्ला
चंडीगढ़। प्रदेश सरकार के महत्वाकांक्षी सुपर-100 शैक्षणिक कार्यक्रम का शानदार परिणाम सामने आया है। कार्यक्रम से जुड़े पहले दो बैचों के 28 छात्रों को नवंबर 2024 से नवंबर 2025 के बीच 13 लाख से 31 लाख रुपये वार्षिक तक के पैकेज पर देश-विदेश की नामी कंपनियों में प्लेसमेंट मिला है। खास बात यह है कि ये सभी बच्चे किसान, मजदूर, शिक्षक और साधारण परिवारों से संबंध रखते हैं, जिन्होंने सरकारी स्कूलों से पढ़ाई कर आईआईटी-एनआईटी जैसे शीर्ष संस्थानों में दाखिला लिया और अब प्रतिष्ठित कंपनियों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
हरियाणा के सुपर-100 कार्यक्रम के दूसरे बैच से निकलकर गांवों के सामान्य परिवारों के बच्चों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में शानदार स्थान हासिल किया है। वर्ष 2020 और 2021 में आईआईटी-एनआईटी में दाखिला लेने वाले इन छात्रों ने बीटेक पूरी करते ही माइक्रोसॉफ्ट, पब्लिसिस सैपिएंट, वॉलमार्ट, फेनोम, टारापुर एटॉमिक पावर स्टेशन, लेटेंटफोर्स और टीरेस्टा जैसी कंपनियों से ऑफर प्राप्त किए हैं। सबसे ऊंचा पैकेज 31 लाख रुपये का आईआईटी मुंबई की छात्रा काजल (फतेहाबाद) को मिला है, जिनके पिता किसान हैं। इसके अलावा दिशत (सोनीपत), आईआईटी रोपड़ - 20 लाख, कमल शर्मा (फरीदाबाद), एनआईटी कुरुक्षेत्र - 20 लाख,
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परवीन (सिरसा), आईआईटी दिल्ली – 18 लाख, स्वाति (भिवानी), एनआईटी पटना – 18 लाख, योगेश (गुरुग्राम), आईआईटी मंडी – 18 लाख, इन्हें 13 से 20 लाख तक के पैकेज मिले हैं। अनेक विद्यार्थियों के पिता दिहाड़ी मजदूर, किसान, बिजली मिस्त्री और सरकारी शिक्षक हैं। ऐसे परिवारों के बच्चों की यह उपलब्धि पूरे हरियाणा के लिए प्रेरणास्रोत बनी है।
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चार साल में 226 छात्र पहुंचे आईआईटी-एनआईटी
सुपर-100 कार्यक्रम के तहत पिछले चार वर्षों में 226 बच्चे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) में दाखिला ले चुके हैं। इनमें 107 छात्र आईआईटी और 119 छात्र आईआईआईटी-एनआईटी में पहुंचे। इनमें 33 छात्राएं शामिल हैं।
इस कार्यक्रम की शुरुआत 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने की थी, जिसके तहत ग्रामीण पृष्ठभूमि के मेधावी छात्रों को बिना फीस, बिना कोचिंग खर्च और विशेषज्ञ मार्गदर्शन के साथ निशुल्क तैयारी कराई जाती है।
सुपर-100 कार्यक्रम ने साबित किया है कि यदि सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो छोटे गांवों का बच्चा भी माइक्रोसॉफ्ट और वॉलमार्ट जैसी दिग्गज कंपनियों में जगह बना सकता है। यह उपलब्धि इन परिवारों के लिए गर्व और प्रदेश के छात्रों के लिए प्रेरणा है।
-महिपाल ढांडा, शिक्षा मंत्री