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Haryana: एचकेआरएन कर्मियों की तीन दिन में मांगी रिपोर्ट, बच्चों की पढ़ाई पर असर का सवाल
Wed, 17 Sep 2025 02:47 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 17 Sep 2025 02:47 PM IST
सार
एचकेआरएन के ज़रिए बड़ी संख्या में कंप्यूटर ऑपरेटर, क्लर्क, लैब सहायक और कभी-कभी शिक्षण कार्य में सहयोग देने वाले कर्मचारी स्कूलों में लगाए जाते हैं। इनकी नियुक्ति और स्थिति स्पष्ट न होने से कई बार स्कूलों में दिक्कतें सामने आती हैं।
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कंप्यूटर
- फोटो : Adobe Stock
विस्तार
हरियाणा शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और एससीईआरटी गुरुग्राम से तीन दिन में यह सूचना मांगी है कि कौशल रोजगार निगम (एचकेआरएन) के तहत स्कूलों और कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों की स्थिति क्या है। इसके लिए विस्तृत प्रोफार्मा जारी किया गया है जिसमें हर कर्मचारी का नाम, पद, तैनाती स्थान, नियुक्ति का तरीका और सेवा सुरक्षा कानून के तहत पात्रता जैसी जानकारियां भरनी होंगी।
दरअसल, एचकेआरएन के ज़रिए बड़ी संख्या में कंप्यूटर ऑपरेटर, क्लर्क, लैब सहायक और कभी-कभी शिक्षण कार्य में सहयोग देने वाले कर्मचारी स्कूलों में लगाए जाते हैं। इनकी नियुक्ति और स्थिति स्पष्ट न होने से कई बार स्कूलों में दिक्कतें सामने आती हैं। कहीं कंप्यूटर लैब खाली पड़ी मिलती है तो कहीं क्लेरिकल काम के लिए पर्याप्त स्टाफ न होने से शिक्षकों को दफ्तर के कामों में उलझना पड़ता है। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है।
पंचकूला के एक अभिभावक जसविंदर ने बताया कि स्कूलों में स्टाफ की कमी का खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ता है। अगर कंप्यूटर टीचर ही नहीं होगा तो बच्चे लैब में क्या सीखेंगे? कई बार तो क्लास में पढ़ाई की जगह बच्चे खाली बैठे रहते हैं। अब जब विभाग ने सभी जिलों से सटीक जानकारी मांगी है तो उम्मीद है कि तैनाती का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा।
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दरअसल, एचकेआरएन के ज़रिए बड़ी संख्या में कंप्यूटर ऑपरेटर, क्लर्क, लैब सहायक और कभी-कभी शिक्षण कार्य में सहयोग देने वाले कर्मचारी स्कूलों में लगाए जाते हैं। इनकी नियुक्ति और स्थिति स्पष्ट न होने से कई बार स्कूलों में दिक्कतें सामने आती हैं। कहीं कंप्यूटर लैब खाली पड़ी मिलती है तो कहीं क्लेरिकल काम के लिए पर्याप्त स्टाफ न होने से शिक्षकों को दफ्तर के कामों में उलझना पड़ता है। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है।
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पंचकूला के एक अभिभावक जसविंदर ने बताया कि स्कूलों में स्टाफ की कमी का खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ता है। अगर कंप्यूटर टीचर ही नहीं होगा तो बच्चे लैब में क्या सीखेंगे? कई बार तो क्लास में पढ़ाई की जगह बच्चे खाली बैठे रहते हैं। अब जब विभाग ने सभी जिलों से सटीक जानकारी मांगी है तो उम्मीद है कि तैनाती का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा।
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