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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Monsoon's hide and seek: 50% rain completed in 35 days.

Monsoon in Haryana: 35 दिन में मानसून का 50 फीसदी कोटा पूरा, जीटी बेल्ट पर 38 फीसदी कम

Wed, 30 Jul 2025 01:32 AM IST
चण्डीगढ़-हरियाणा ब्यूरो आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: चण्डीगढ़-हरियाणा ब्यूरो Updated Wed, 30 Jul 2025 01:32 AM IST
सार

हरियाणा में 24 जून को मानसून का आगमन हुआ था और पांच दिन बाद पूरे हरियाणा में छा गया था। 24 जून से लेकर 29 जुलाई तक राज्य में 212 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से करीब 11 फीसदी अधिक है।

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Monsoon's hide and seek: 50% rain completed in 35 days.
हरियाणा में बरसात - फोटो : अमर उजाला/फाइल

विस्तार

हरियाणा में मानसून को आए 35 दिन बीत गए हैं। इन 35 दिनों में मानसून कोटे की 50 फीसदी बारिश हरियाणा में दर्ज की जा चुकी है। आगे भी अच्छी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं, बारिश का एक नया स्वरूप भी देखने को मिला है। जीटी बेल्ट पर स्थित जिलों में करीब 38 फीसदी बारिश कम देखने को मिली है। जबकि मध्य व दक्षिण हरियाणा के अधिकतर जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश देखने को मिली है। 
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विशेषज्ञ कहते हैं कि मानसून की बारिश का न कोई पैटर्न होता है और न ही स्थायी होती है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है। मानसून की बारिश मौसमी सिस्टम पर निर्भर करती है। मौसमी सिस्टम जहां भी सक्रिय होगा, वहां बारिश की संभावना बनी रहेगी।
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मानसून सीजन में सामान्यत: हरियाणा में 420 से 425 मिलीमीटर बारिश होती है। मानसून के अभी पूरा डेढ़ से दो महीने बाकी है। 

आमतौर पर मानसून की विदाई सितंबर के तीसरे हफ्ते से शुरू हो जाती है। मौसम विभाग ने अगस्त में भी अच्छी बारिश के संकेत दिए हैं। अगस्त में भी सामान्य के आसपास बारिश हुई तो किसानों के लिए मानसून बेहतर माना जाएगा। हालांकि इन 35 दिनों में सिर्फ एक दो ही दिन में मूसलाधार बारिश दर्ज की गई है।
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हरियाणा के नौ जिलों में सामान्य से कम बारिश

हरियाणा के 22 में से नौ जिलों में अभी तक सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। इनमें सबसे अधिक जिले जीटी बेल्ट पर स्थित हैं। मौसम विभाग के मुताबिक अंबाला में 44 फीसदी, कैथल में 41, करनाल में 34, पानीपत में 31 फीसदी व सोनीपत में 29 फीसदी कम बारिश दर्ज हुई है। खास बात यह है कि इन इलाकों में धान की खेती ज्यादा होती है। वहीं, पंचकूला में 52 फीसदी, फतेहाबाद में सात, फरीदाबाद में 27 और जींद में 42 फीसदी कम बारिश दर्ज हुई है।

महेंद्रगढ़ में 418 एमएम व नूंह में 389 एमएम बारिश

इस बार मानसून मध्य व दक्षिण हरियाणा पर पूरी तरह से मेहरबान है। पूरे प्रदेश में महेंद्रगढ़ में सबसे ज्यादा 418 मिलीमीटर बारिश हुई है, जो सामान्य से 121 फीसदी ज्यादा दर्ज की गई है। वहीं, नूंह में 389 एमएम, चरखीदादरी में 316 एमएम, रेवाड़ी में 344 एमएम, रोहतक में 281 एमएम, गुरुग्राम में 252 एमएम, झज्जर में 283 एमएम, कुरुक्षेत्र में 288 एमएम, पलवल में 223 एमएम बारिश रिकॉर्ड हुई है।

कम बारिश से खेतीबाड़ी पर फर्क नहीं पड़ेगा : विशेषज्ञ

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डाॅ वीरेंद्र सिंह लाठर का कहना है कि जीटी बेल्ट पर कम बारिश का असर धान की खेती पर नहीं पड़ेगा, क्योंकि इन इलाकों में ट्यूबवेल की सुविधा है। इसलिए चिंता की बात नहीं है। मानसून में बारिश का पैटर्न हर साल ऐसा ही कुछ देखने को मिलता है। करनाल में मानसून सीजन के दौरान 200-250 एमएम के आसपास होती थी, मगर इस बार अभी तक आधी भी बारिश नहीं हुई है। हालांकि मानसून का समय अभी रहता है, इसलिए उम्मीद है कि आने वाले दिनों में जीटी बेल्ट पर अच्छी बारिश होगी।
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