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Chandigarh-Haryana News: हरियाणा पुलिस ने हटाए 16,308 अवैध ऑनलाइन कंटेंट, साइबर अपराध पर शिकंजा
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पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल बोले- डिजिटल दौर में अपराध की प्रकृति तेजी से बदल रही
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा पुलिस ने साइबर अपराध और ऑनलाइन दुष्प्रचार के खिलाफ सख्ती दिखाई है। इस वर्ष जनवरी से जुलाई तक पुलिस ने 16,308 अवैध ऑनलाइन कंटेंट (सामग्री) हटाईं हैं। पुलिस ने सोशल मीडिया पर नजर रखकर और यूनिफॉर्म रिसोर्स लोकेटर (यूआरएल) के माध्यम से ऑनलाइन निगरानी के बाद यह कार्रवाई की।
पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने कहा कि फिशिंग कड़ियों, फर्जी वेबसाइटों, धोखाधड़ी वाले आवेदनों, भ्रामक विज्ञापनों और फर्जी प्रोफाइल पर कार्रवाई की गई है। आज के डिजिटल दौर में अपराध की प्रकृति तेजी से बदल रही है। अपराधी तकनीक का दुरुपयोग कर लोगों को निशाना बनाते हैं। हरियाणा पुलिस की प्राथमिकता है कि तकनीक का उपयोग अपराधियों से एक कदम आगे रहकर किया जाए। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया निगरानी, यूआरएल अवरोधन और ऑनलाइन सामग्री हटाने के माध्यम से साइबर अपराध पर नियंत्रण किया जा रहा है। साइबर दल रोजाना उन पोस्ट, वीडियो, कड़ियों और प्रोफाइल की पहचान करता है जिनमें गलत जानकारी होती है। उकसाने वाली भाषा या सार्वजनिक शांति भंग करने वाली सामग्री भी इसमें शामिल है। ऐसी सामग्री का संज्ञान लेते ही सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3)(बी) के तहत नोटिस जारी होता है। संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से इसे तुरंत हटाने की मांग की जाती है। यह प्रक्रिया डिजिटल क्षेत्र में अपराधियों की गतिविधियों की पहचान, सत्यापन और हटाने को तेज बनाती है।
ऑनलाइन महिला एवं बच्चों के विरुद्ध अपराध इकाई हानिकारक और गैर-कानूनी ऑनलाइन सामग्री की विशेष निगरानी करती है। ऐसे कंटेंट की पहचान होते ही संबंधित प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट की जाती है। इसको शीघ्र हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों को ऑनलाइन उत्पीड़न और शोषण से बचाना है। यह तकनीक आधारित डिजिटल निगरानी मॉडल फर्जी डिजिटल पहचान, ऑनलाइन धोखाधड़ी और फर्जी सूचनाओं पर भी कार्रवाई करता है।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा पुलिस ने साइबर अपराध और ऑनलाइन दुष्प्रचार के खिलाफ सख्ती दिखाई है। इस वर्ष जनवरी से जुलाई तक पुलिस ने 16,308 अवैध ऑनलाइन कंटेंट (सामग्री) हटाईं हैं। पुलिस ने सोशल मीडिया पर नजर रखकर और यूनिफॉर्म रिसोर्स लोकेटर (यूआरएल) के माध्यम से ऑनलाइन निगरानी के बाद यह कार्रवाई की।
पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने कहा कि फिशिंग कड़ियों, फर्जी वेबसाइटों, धोखाधड़ी वाले आवेदनों, भ्रामक विज्ञापनों और फर्जी प्रोफाइल पर कार्रवाई की गई है। आज के डिजिटल दौर में अपराध की प्रकृति तेजी से बदल रही है। अपराधी तकनीक का दुरुपयोग कर लोगों को निशाना बनाते हैं। हरियाणा पुलिस की प्राथमिकता है कि तकनीक का उपयोग अपराधियों से एक कदम आगे रहकर किया जाए। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया निगरानी, यूआरएल अवरोधन और ऑनलाइन सामग्री हटाने के माध्यम से साइबर अपराध पर नियंत्रण किया जा रहा है। साइबर दल रोजाना उन पोस्ट, वीडियो, कड़ियों और प्रोफाइल की पहचान करता है जिनमें गलत जानकारी होती है। उकसाने वाली भाषा या सार्वजनिक शांति भंग करने वाली सामग्री भी इसमें शामिल है। ऐसी सामग्री का संज्ञान लेते ही सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3)(बी) के तहत नोटिस जारी होता है। संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से इसे तुरंत हटाने की मांग की जाती है। यह प्रक्रिया डिजिटल क्षेत्र में अपराधियों की गतिविधियों की पहचान, सत्यापन और हटाने को तेज बनाती है।
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ऑनलाइन महिला एवं बच्चों के विरुद्ध अपराध इकाई हानिकारक और गैर-कानूनी ऑनलाइन सामग्री की विशेष निगरानी करती है। ऐसे कंटेंट की पहचान होते ही संबंधित प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट की जाती है। इसको शीघ्र हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों को ऑनलाइन उत्पीड़न और शोषण से बचाना है। यह तकनीक आधारित डिजिटल निगरानी मॉडल फर्जी डिजिटल पहचान, ऑनलाइन धोखाधड़ी और फर्जी सूचनाओं पर भी कार्रवाई करता है।
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