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भाकियू का बिजली बिल बहिष्कार का ऐलान

Mon, 06 Jan 2014 11:02 PM IST
अमर उजाला, जींद
अमर उजाला, जींद Updated Mon, 06 Jan 2014 11:02 PM IST
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Bakiu announced a boycott of the electricity bill
जींद में बिजली बिलों के खिलाफ एक बार फिर भारतीय किसान यूनियन ने अपने तेवर कड़े कर लिए हैं। भाकियू ने सरकार और बिजली निगम पर समझौते से पलटने के आरोप लगाते हुए बिजली बिल नहीं भरने का ऐलान किया है। इस तरह दोबारा किसानों और सरकार के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है।
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जींद की धरती पर 2002 में किसानों ने बिजली बिलों के विरोध में इनेलो सरकार के खिलाफ संघर्ष का बिगुल बजाया था। इसमें कई किसान पुलिस की गोलियां लगने से शहीद हो गए थे। हालांकि तब किसान यूनियन में सांगठनिक एकता थी।
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भारतीय किसान यूनियन के जींद जिला प्रधान महेंद्र सिंह घिमाना की अध्यक्षता में घिमाना गांव में हुई बैठक में यूनियन के प्रदेश महासचिव रामफल कंडेला, हिसार के प्रधान बिल्लू खांडा, राजकुमार उचाना, नफे सिंह, छज्जुराम कंडेला, रामफल गुलकनी और प्रदीप मिर्चपुर भी मौजूद रहेे।
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घिमाना ने बताया कि पिछले साल मार्च में मुख्यमंत्री हुड्डा, बिजली निगम के एमडी और भारतीय किसान यूनियन के बीच बातचीत में बिजली के बकाया बिलों को लेकर एक समझौता हुआ था। समझौते के तहत यह तय हुआ था कि किसान और दूसरे ग्रामीण बिजली उपभोक्ता 31 मार्च 2013 से पहले के अपने बकाया बिजली बिलों को एक निर्धारित दर पर जमा करवाएंगे। इसके लिए एक किलोवाट के बिजली कनेक्शन के लिए 120, दो किलोवोट के लिए 240 और तीन किलोवाट के लिए 360 रुपये की राशि तय हुई थी।

अब बिजली निगम के अधिकारी डिफाल्टर उपभोक्ताओं से एक किलोवाट के लिए 170, दो किलोवोट के लिए 390 और तीन किलोवाट के लिए 720 रुपये की मांग कर रहे हैं। यह समझौते का उल्लंघन है। इसके साथ-साथ जब किसान और दूसरे बिजली उपभोक्ता अपने बकाया बिल निगम के पास जमा करवाते हैं तो उन्हें इसकी एवज में नो ड्यूज सर्टिफिकेट भी जारी नहीं किया जा रहा है।

इसे लेकर निगम अधिकारियों से बात की गई, लेकिन उन्होंने एक नहीं सुनी। इसके चलते भाकियू ने अब किसानों और दूसरे बिजली उपभोक्ताओं से अपने बिजली बिल निगम के पास जमा नहीं करवाने का आह्वान किया है।


बिल भरने पर भी नहीं जोड़ रहे कनेक्शन
घिमाना ने कहा कि किसान यूनियन के आंदोलन के दौरान जिन किसानों के ट्यूबवेलों के बिजली कनेक्शन निगम ने रिकार्ड में काट दिए थे, उन किसानों से बिल के पूरे पैसे भरवाने के बावजूद कनेक्शन चालू नहीं किए गए हैं। उन्होंने कहा कि बिजली कनेक्शन के लिए चीफ इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर को पहले लाइन और ट्रांसफार्मर और दूसरे बिजली सामान की मौके पर आकर जांच करनी होती है, लेकिन हिसार के यह इंस्पेक्टर कभी भी मौके पर आकर जांच नहीं करते। इसमें भारी भ्रष्टाचार मचा हुआ है और इसका बोझ किसानों व दूसरे बिजली उपभोक्ताओं पर डाला जा रहा है। इसकी स्टेट विजिलेंस ब्यूरो से जांच करवाए जाने की मांग भारतीय किसान यूनियन ने की है।
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