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Ambala News: कपड़ों पर सुई और धागे की सहायता कढ़ाई व फुलकारी कर महिलाएं बना रही पहचान

Sun, 14 Dec 2025 11:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला Updated Sun, 14 Dec 2025 11:40 PM IST
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Women are creating identity by embroidering and doing phulkari on clothes with the help of needle and thread.
गांव अधोया एम निवासी ऊषा फुलकारी के बारे में जानकारी देते हुए। स्वयं
अंबाला। हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। महिलाएं अपना और अपने परिवार का पालन पोषण करने के साथ अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं। अंबाला के गांव अधोया एम, कोंकपुर, ठरवा, बरौली, बिलासपुर सहित 20 ग्रुप की महिलाएं सूट, दुपट्टे, साड़ी, चुन्नी, बैड शीट, कुशन कवर पर सुई धागे की सहायता से कढ़ाई करते हुए फुलकारी कर रही हैं। ये महिलाएं राजस्थान, मुंबई, गुरुग्राम, देहरादून सहित अन्य जगह पर लगने वाली प्रदर्शनी में स्टाॅल लगाती हैं। जहां इनकी फुलकारी की डिमांड रहती है।
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गांव अधोया एम निवासी ऊषा ने बताया कि उन्होंने 2019 में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी थीं। इसके बाद वह न्यू लक्ष्मी समूह से जुड़ी। इस दौरान उन्होंने फुलकारी का प्रशिक्षण लेकर फुलकारी करना शुरू कर दिया। अब वह सूट, दुपट्टे, साड़ी, चुन्नी, बैड शीट, कुशन कवर पर सुईं-धागे की सहायता से फुलकारी कर रही हैं। इसके साथ ही वेे ग्रुप की अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं। वे महिलाओं से एडवांस में कपड़ों पर फुलकारी करवाकर रखती हैं। जैसे ही भारत के विभिन्न राज्यों में प्रदर्शनी लगती है वह अपने कपड़ो की इन प्रदर्शनी में स्टॉल लगाती हैं और अच्छा कारोबार कर रहीं हैं। वह अभी तक फरीदाबाद के सूरजकुंड मेला, दिल्ली का प्रगति मैदान, गुरुग्राम, श्रीनगर, अहमदाबाद, छत्तीसगढ़, देहरादून, मुंबई, लुधियाना, संगरूर, जयपुर सहित अन्य जगहों पर प्रदर्शनी में स्टाॅल लगा चुकी हैं। उन्होंने बताया कि फुलकारी के लिए वह कच्चा माल दिल्ली से लाती हैं।
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बिलासपुर निवासी मंजीत ने बताया कि चार साल पहले वह स्वयं सहायता समूह के राशी ग्रुप से जुड़ीं। इसके बाद उन्होंने शहजादपुर से फुलकारी का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण लेने के बाद वह बाजार से अच्छी क्वालिटी की चुन्नी की खरीदारी करती हैं। इसके बाद वह इस चुन्नी पर धागे, मोती, सिप्पी, झालर लगाकर, फूल, पत्ती, बेल व अन्य प्रकार के डिजाइन बनाकर फुलकारी करती हैं। फुलकारी के बाद वह इस चुन्नी को एक हजार रुपये में शहजादपुर में सीमा को देती हैं जो इन्हें आगे सेल करती हैं।
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बिलासपुर निवासी ममतेश ने बताया कि वह पांच साल पहले स्वयं सहायता समूह के ममता ग्रुप से जुड़ीं। इसके बाद उन्होंने शहजादपुर से फुलकारी का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद से वह चुन्नी पर फुलकारी कर रही हैं। उन्होंने बताया कि एक चुन्री पर फुलकारी करने में 10 दिन का समय लग जाता है। इस चुन्री पर विभिन्न तरह के डिजाइन बनाती हैं। फुलकारी होने पर वह चुन्नी को ग्रुप इंचार्ज रेखा को दे देती हैं।

गांव अधोया एम निवासी ऊषा फुलकारी के बारे में जानकारी देते हुए। स्वयं

गांव अधोया एम निवासी ऊषा फुलकारी के बारे में जानकारी देते हुए। स्वयं

गांव अधोया एम निवासी ऊषा फुलकारी के बारे में जानकारी देते हुए। स्वयं

गांव अधोया एम निवासी ऊषा फुलकारी के बारे में जानकारी देते हुए। स्वयं

गांव अधोया एम निवासी ऊषा फुलकारी के बारे में जानकारी देते हुए। स्वयं

गांव अधोया एम निवासी ऊषा फुलकारी के बारे में जानकारी देते हुए। स्वयं

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