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Ambala News: अंबाला की दो महिला किसानों को मिला राज्य स्तरीय सम्मान
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अंबाला जिले की दो महिला किसानों को जींद में सम्मानित करते गणमान्य। प्रवक्ता
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। कृषि के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और उनके अप्रतिम योगदान को नई पहचान मिली है। अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026 के तहत जींद स्थित हरियाणा कृषि प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान (हमेटी) में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में अंबाला की दो महिला किसानों को सम्मानित किया गया। इसमें बराड़ा के अधोया गांव की अमरजीत कौर और सिटी के जंधेड़ी गांव की किसान महेंद्र कौर शामिल हैं।
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. वंजीर सिंह ने बताया कि यह राज्य स्तरीय आयोजन सशक्त महिला किसान, समृद्ध कृषि, विकसित भारत की थीम पर आधारित था। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में महिलाओं के कड़े परिश्रम को मान्यता देना और उन्हें आधुनिक व प्राकृतिक खेती की तकनीकों के प्रति जागरूक करना रहा।
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प्राकृतिक खेती अपनाने पर जोर
समारोह में विशेषज्ञों ने प्राकृतिक खेती को समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया। वक्ताओं ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करके न केवल कृषि लागत में भारी कमी लाई जा सकती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता और जन-स्वास्थ्य को भी सुरक्षित रखा जा सकता है। महिला किसानों को प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय जैविक घटकों का समझदारी से उपयोग करने की बारीकियां सिखाई गईं।
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अंबाला। कृषि के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और उनके अप्रतिम योगदान को नई पहचान मिली है। अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026 के तहत जींद स्थित हरियाणा कृषि प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान (हमेटी) में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में अंबाला की दो महिला किसानों को सम्मानित किया गया। इसमें बराड़ा के अधोया गांव की अमरजीत कौर और सिटी के जंधेड़ी गांव की किसान महेंद्र कौर शामिल हैं।
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. वंजीर सिंह ने बताया कि यह राज्य स्तरीय आयोजन सशक्त महिला किसान, समृद्ध कृषि, विकसित भारत की थीम पर आधारित था। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में महिलाओं के कड़े परिश्रम को मान्यता देना और उन्हें आधुनिक व प्राकृतिक खेती की तकनीकों के प्रति जागरूक करना रहा।
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प्राकृतिक खेती अपनाने पर जोर
समारोह में विशेषज्ञों ने प्राकृतिक खेती को समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया। वक्ताओं ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करके न केवल कृषि लागत में भारी कमी लाई जा सकती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता और जन-स्वास्थ्य को भी सुरक्षित रखा जा सकता है। महिला किसानों को प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय जैविक घटकों का समझदारी से उपयोग करने की बारीकियां सिखाई गईं।
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