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परमात्मा की कृपा से मिलती है सच्ची खुशी : ज्ञानानंद
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प्रवचन करते गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज का आशीर्वाद लेते श्रद्धालु। संस्था
हुडा मैदान में तीन दिवसीय दिव्य गीता सत्संग आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
नारायणगढ़। हुडा मैदान में आयोजित तीन दिवसीय दिव्य गीता सत्संग का समापन हुआ। अंतिम दिन गीता मनीषी महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि परमात्मा की कृपा से कम साधनों में भी प्रसन्नता मिल सकती है, जबकि ईश्वर से विमुख होने पर मन अशांत रहता है।
महाराज ने सुदामा, शबरी और मीरा को इसके जीवंत उदाहरण बताया। श्री कृष्ण कृपा सेवा समिति एवं जियो गीता के तत्वावधान में हुए इस कार्यक्रम में उन्होंने जीवन का अंतिम लक्ष्य परमात्मा की प्राप्ति बताया। उन्होंने कंस और दुर्योधन का उदाहरण दिया। महाराज ने कहा कि भौतिक संपदा के बावजूद ईश्वर रूपी संपदा न होने से वे दुखी रहे। प्रथम नवरात्र पर सत्संग स्थल पर हवन यज्ञ भी हुआ। मुस्तफाबाद के निआसरे दा आसरा आश्रम के सेवादारों को सम्मानित किया गया।
सादा जीवन और प्रकृति का महत्व
स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने सादा जीवन और उच्च विचारों को अच्छे जीवन का आधार बताया। उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच से बड़ी चिंताएं भी छोटी हो जाती हैं। संत कबीर दास की वाणी का स्मरण करते हुए उन्होंने प्रकृति को सजीव बताया, जो हमें जीवन जीने का पाठ पढ़ाती है। सत्संग के अंत में समिति के प्रधान अशोक मेहता ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर कई गणमान्य व्यक्ति और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नारायणगढ़। हुडा मैदान में आयोजित तीन दिवसीय दिव्य गीता सत्संग का समापन हुआ। अंतिम दिन गीता मनीषी महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि परमात्मा की कृपा से कम साधनों में भी प्रसन्नता मिल सकती है, जबकि ईश्वर से विमुख होने पर मन अशांत रहता है।
महाराज ने सुदामा, शबरी और मीरा को इसके जीवंत उदाहरण बताया। श्री कृष्ण कृपा सेवा समिति एवं जियो गीता के तत्वावधान में हुए इस कार्यक्रम में उन्होंने जीवन का अंतिम लक्ष्य परमात्मा की प्राप्ति बताया। उन्होंने कंस और दुर्योधन का उदाहरण दिया। महाराज ने कहा कि भौतिक संपदा के बावजूद ईश्वर रूपी संपदा न होने से वे दुखी रहे। प्रथम नवरात्र पर सत्संग स्थल पर हवन यज्ञ भी हुआ। मुस्तफाबाद के निआसरे दा आसरा आश्रम के सेवादारों को सम्मानित किया गया।
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सादा जीवन और प्रकृति का महत्व
स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने सादा जीवन और उच्च विचारों को अच्छे जीवन का आधार बताया। उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच से बड़ी चिंताएं भी छोटी हो जाती हैं। संत कबीर दास की वाणी का स्मरण करते हुए उन्होंने प्रकृति को सजीव बताया, जो हमें जीवन जीने का पाठ पढ़ाती है। सत्संग के अंत में समिति के प्रधान अशोक मेहता ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर कई गणमान्य व्यक्ति और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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