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निगम की व्यवस्था से परेशान, गांवों में पंचायती राज लागू करने की मांग
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अंबाला सिटी। नगर निगम में शामिल हुए विभिन्न गांव के लोगों ने उपायुक्त कार्यालय पर हल्ला बोला। करीब आधा दर्जन गांव के लोगों ने सरकार के खिलाफ नारेेबाजी करते हुए उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। जिसमें उन्होंने गांवों को नगर निगम से बाहर कर फिर से पंचायती राज लागू करने की मांग की। उन्होंने बताया कि जब से उनके गांव को नगर निगम में शामिल किया गया है तब से गांव का विकास नहीं हुआ है।
लोगों ने कहा कि उन पर शहरी कर थोपे जा रहे हैं जो पूरी तरह से गलत हैं। गांव को निगम में शामिल करते समय सभी को आश्वासन दिया गया था कि उनसे कोई कर नहीं लगाया जाएगा। इसके अलावा नगर निगम को डेयरी मुक्त करने की कड़ी में लोगों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गांव में होने के कारण वे अपनी सुविधा के लिए डेयरी चलाने का कार्य करते आ रहे हैं, अब उनके पशुओं को क्षेत्र से बाहर किया जा रहा है। इसके अलावा भी उन्होंने अन्य परेशानियों के बारे में उपायुक्त को अवगत करवाते हुए समस्याओं का निपटान करने की मांग की।
कोई काम नहीं हुआ
जब से गांव को निगम में शामिल किया गया तब से कोई विकास नहीं हुआ है। उन्हें न पर्याप्त पानी और बिजली की आपूर्ति नहीं मिली है। यहां तक कि पंचायत खत्म होने के बाद क्षेत्र में कोई ज्यादा काम भी नहीं हुआ है। गांव को निगम से बाहर करना चाहिए।
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-शरणपाल सचदेवा, गांव सौड़ा।
भारी भरकम टैक्स लगाए
गांव को निगम से बाहर करना चाहिए। एक तो कोई सुविधा नहीं दी जा रही है, ऊपर से भारी भरकम टैक्स लगाए जा रहे हैं। जिसको भरना गांव वासियों के लिए बहुत ही मुश्किल है। हमारे गांव को फिर से पंचायती राज में शामिल करना चाहिए।
- गुलाब सिंह, गांव मानकपुर।
दिए जा रहे नोटिस
गांव वालों ने अपनी सुविधा के लिए पशु रखे हुए हैं। इससे आसपास के लोगों को दिक्कत भी नहीं है। नगर निगम के कर्मचारी आए दिन नोटिस थमा जाते हैं कि अपने पशुओं को यहां से ले जाओ। अगर पशु ले जाएंगे तो गुजारा चलाना मुश्किल हो जाएगा।
- बलवंत सिंह, गांव छोटी घेल।
वादे हुए हवा हवाई
जिस समय गांव को निगम में शामिल करने की बात चल रही थी उस समय बड़े-बड़े वादे किए गए थे, परंतु कोई भी वादा पूरा नहीं हुआ। न विकास हुआ और न ही सुविधाएं मिली। इससे परेशान होकर गांव को निगम से बाहर करने की बात कह रहे हैं।
- गुरमीत सिंह, गांव डंगडेहरी।
निगम के काटते हैं चक्कर
जब से गांव को नगर निगम में शामिल किया गया है, तब से हमारी दौड़ बहुत लंबी हो गई है। पहले तो कोई भी काम होता था गांव के सरपंच को कह देते थे। अब तो नगर निगम और पार्षदों के चक्कर काट कर थक जाते हैं फिर भी काम नहीं होते हैं।
-जरनैल सिंह, गांव लोहगढ़।
नहीं भर सकते कर
हम गांव वासियों पर भारी भरकम टैक्स लगाए जा रहे हैं। जिसे भर पाना हमारे लिए किसी भी स्थिति में संभव नहीं है। यहां तक कि हमें कोई सुविधा भी नहीं मिल रही है। प्रशासन को चाहिए कि हमारे गांव में फिर से पंचायती राज लागू किया जाए।
- ओमप्रकाश, गांव देवीनगर।
हमारे पास क्षेत्र वासी आए थे। हमने उनकी बात को सुना है जो भी संभव होगा काम किया जाएगा।
-विक्रम सिंह, उपायुक्त, अंबाला।
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लोगों ने कहा कि उन पर शहरी कर थोपे जा रहे हैं जो पूरी तरह से गलत हैं। गांव को निगम में शामिल करते समय सभी को आश्वासन दिया गया था कि उनसे कोई कर नहीं लगाया जाएगा। इसके अलावा नगर निगम को डेयरी मुक्त करने की कड़ी में लोगों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गांव में होने के कारण वे अपनी सुविधा के लिए डेयरी चलाने का कार्य करते आ रहे हैं, अब उनके पशुओं को क्षेत्र से बाहर किया जा रहा है। इसके अलावा भी उन्होंने अन्य परेशानियों के बारे में उपायुक्त को अवगत करवाते हुए समस्याओं का निपटान करने की मांग की।
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कोई काम नहीं हुआ
जब से गांव को निगम में शामिल किया गया तब से कोई विकास नहीं हुआ है। उन्हें न पर्याप्त पानी और बिजली की आपूर्ति नहीं मिली है। यहां तक कि पंचायत खत्म होने के बाद क्षेत्र में कोई ज्यादा काम भी नहीं हुआ है। गांव को निगम से बाहर करना चाहिए।
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-शरणपाल सचदेवा, गांव सौड़ा।
भारी भरकम टैक्स लगाए
गांव को निगम से बाहर करना चाहिए। एक तो कोई सुविधा नहीं दी जा रही है, ऊपर से भारी भरकम टैक्स लगाए जा रहे हैं। जिसको भरना गांव वासियों के लिए बहुत ही मुश्किल है। हमारे गांव को फिर से पंचायती राज में शामिल करना चाहिए।
- गुलाब सिंह, गांव मानकपुर।
दिए जा रहे नोटिस
गांव वालों ने अपनी सुविधा के लिए पशु रखे हुए हैं। इससे आसपास के लोगों को दिक्कत भी नहीं है। नगर निगम के कर्मचारी आए दिन नोटिस थमा जाते हैं कि अपने पशुओं को यहां से ले जाओ। अगर पशु ले जाएंगे तो गुजारा चलाना मुश्किल हो जाएगा।
- बलवंत सिंह, गांव छोटी घेल।
वादे हुए हवा हवाई
जिस समय गांव को निगम में शामिल करने की बात चल रही थी उस समय बड़े-बड़े वादे किए गए थे, परंतु कोई भी वादा पूरा नहीं हुआ। न विकास हुआ और न ही सुविधाएं मिली। इससे परेशान होकर गांव को निगम से बाहर करने की बात कह रहे हैं।
- गुरमीत सिंह, गांव डंगडेहरी।
निगम के काटते हैं चक्कर
जब से गांव को नगर निगम में शामिल किया गया है, तब से हमारी दौड़ बहुत लंबी हो गई है। पहले तो कोई भी काम होता था गांव के सरपंच को कह देते थे। अब तो नगर निगम और पार्षदों के चक्कर काट कर थक जाते हैं फिर भी काम नहीं होते हैं।
-जरनैल सिंह, गांव लोहगढ़।
नहीं भर सकते कर
हम गांव वासियों पर भारी भरकम टैक्स लगाए जा रहे हैं। जिसे भर पाना हमारे लिए किसी भी स्थिति में संभव नहीं है। यहां तक कि हमें कोई सुविधा भी नहीं मिल रही है। प्रशासन को चाहिए कि हमारे गांव में फिर से पंचायती राज लागू किया जाए।
- ओमप्रकाश, गांव देवीनगर।
हमारे पास क्षेत्र वासी आए थे। हमने उनकी बात को सुना है जो भी संभव होगा काम किया जाएगा।
-विक्रम सिंह, उपायुक्त, अंबाला।