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Ambala News: एनडीपीएस में तीन आरोपी बरी, जांच में निकलीं खामियां
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माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। एनडीपीएस की विशेष अदालत ने नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट से जुड़े एक मामले में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने तीन आरोपियों बलजीत सिंह, राहुल और नीरू को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट) डॉ. अशोक कुमार की अदालत ने यह फैसला सुनाया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश और मादक पदार्थ की बरामदगी के आरोपों को पुख्ता सबूतों के साथ साबित करने में विफल रहा। तलाशी और जब्ती के दस्तावेजों पर एफआईआर दर्ज होने से पहले ही उसका नंबर अंकित पाया गया, जिसका संतोषजनक स्पष्टीकरण पुलिस नहीं दे पाई।
पुलिस टीम ने इतनी बड़ी कार्रवाई के दौरान किसी भी स्वतंत्र या सार्वजनिक गवाह को शामिल नहीं किया, जिससे पूरी कार्रवाई संदिग्ध प्रतीत हुई। सुप्रीम कोर्ट के नियमों और एनडीपीएस के दिशा-निर्देशों के विपरीत, बरामद सैंपल को 72 घंटे के भीतर एफएल मधुबन भेजने की बजाय करीब 14 दिन बाद यानी 19 दिसंबर 2019 को भेजा गया। आरोपियों द्वारा पुलिस हिरासत में दिए गए खुलासे भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 25 के तहत अदालत में मुख्य सबूत के रूप में स्वीकार्य नहीं माने गए।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार, 5 दिसंबर 2019 को थाना पड़ाव पुलिस ने सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए बलजीत सिंह नामक युवक को बंधु नगर ओवरब्रिज के पास से गिरफ्तार करने का दावा किया था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 5.83 ग्राम हेरोइन बरामद करने का आरोप लगाया था। इसके बाद बलजीत सिंह के खुलासे पर राहुल और फिर राहुल के खुलासे के आधार पर नीरू को इस मामले में नामजद किया गया था।
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अंबाला सिटी। एनडीपीएस की विशेष अदालत ने नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट से जुड़े एक मामले में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने तीन आरोपियों बलजीत सिंह, राहुल और नीरू को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट) डॉ. अशोक कुमार की अदालत ने यह फैसला सुनाया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश और मादक पदार्थ की बरामदगी के आरोपों को पुख्ता सबूतों के साथ साबित करने में विफल रहा। तलाशी और जब्ती के दस्तावेजों पर एफआईआर दर्ज होने से पहले ही उसका नंबर अंकित पाया गया, जिसका संतोषजनक स्पष्टीकरण पुलिस नहीं दे पाई।
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पुलिस टीम ने इतनी बड़ी कार्रवाई के दौरान किसी भी स्वतंत्र या सार्वजनिक गवाह को शामिल नहीं किया, जिससे पूरी कार्रवाई संदिग्ध प्रतीत हुई। सुप्रीम कोर्ट के नियमों और एनडीपीएस के दिशा-निर्देशों के विपरीत, बरामद सैंपल को 72 घंटे के भीतर एफएल मधुबन भेजने की बजाय करीब 14 दिन बाद यानी 19 दिसंबर 2019 को भेजा गया। आरोपियों द्वारा पुलिस हिरासत में दिए गए खुलासे भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 25 के तहत अदालत में मुख्य सबूत के रूप में स्वीकार्य नहीं माने गए।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार, 5 दिसंबर 2019 को थाना पड़ाव पुलिस ने सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए बलजीत सिंह नामक युवक को बंधु नगर ओवरब्रिज के पास से गिरफ्तार करने का दावा किया था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 5.83 ग्राम हेरोइन बरामद करने का आरोप लगाया था। इसके बाद बलजीत सिंह के खुलासे पर राहुल और फिर राहुल के खुलासे के आधार पर नीरू को इस मामले में नामजद किया गया था।