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Ambala News: बारिश में टपकने लगी अस्पताल की छत, मरीजों ने झेली परेशानी
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सरोज बाला, मरीज
- फोटो : Samvad
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। गणतंत्र दिवस व रविवार की दो लगातार छुट्टियों के बाद मंगलवार को नागरिक अस्पताल के द्वार मरीजों के लिए खुले। हालांकि, बारिश के कारण अस्पताल में सामान्य दिनों के मुकाबले भीड़ कुछ कम नजर आई लेकिन जो मरीज इलाज के लिए पहुंचे उन्हें अस्पताल की जर्जर हालत व सुविधाओं के अभाव से जूझना पड़ा। सुबह 12 बजे यह नजारा था कि अस्पताल के ओपीडी ब्लॉक में रजिस्ट्रेशन काउंटर के ठीक साथ में छत से पानी टपक रहा था।
मजबूरन स्टाफ ने टपक रही छत के ठीक नीचे पानी की बाल्टी लगाई ताकि किचड़ न हो। ऐसे में मरीज व तीमारदार अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर रहे थे। जैसे-तैसे मरीज ओपीडी में पहुंचे डॉक्टर के कमरे के बाहर लाइनों में लगे।
कार्ड पर दवा लिखने के बाद फिर दवा की लाइन लगी। आखिर में उन्हें टेस्ट करवाने के लिए अगले दिन खाली पेट आने के लिए बोला गया। मंगलवार को बरसात के कारण अस्पताल की ओपीडी 1287 तक सिमट गई।
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व्हीलचेयर के लिए भटकते रहे : ओपीडी समय के दौरान इमरजेंसी व ओपीडी के बाहर स्ट्रेचर व व्हीलचेयर की कमी देखने को मिली। गंभीर स्थिति में आए मरीजों के परिजन अस्पताल परिसर में एक कोने से दूसरे कोने तक व्हीलचेयर की तलाश में भटकते नजर आए।
कुछ तीमारदार अपने मरीजों को सहारा देकर पैदल ले जाते दिखे तो कुछ को मजबूरी में गोद में उठाकर ले जाना पड़ा। जबकि अस्पताल प्रबंधन की तरफ से पर्याप्त व्हीलचेयर व स्ट्रेचर होने का दावा किया जा रहा है। इमरजेंसी में आए नवजोत सिंह ने बताया कि वह आधे घंटे से बीमार मां के लिए व्हीलचेयर ढूंढ रहे हैं ताकि ओपीडी के बाहर ले जा सके। कोई भी व्हीलचेयर उपलब्ध नहीं है। सिक्योरिटी गार्ड एक से दूसरी मंजिल पर भेज देते हैं कि ढूंढकर ले आओ।
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अंबाला। गणतंत्र दिवस व रविवार की दो लगातार छुट्टियों के बाद मंगलवार को नागरिक अस्पताल के द्वार मरीजों के लिए खुले। हालांकि, बारिश के कारण अस्पताल में सामान्य दिनों के मुकाबले भीड़ कुछ कम नजर आई लेकिन जो मरीज इलाज के लिए पहुंचे उन्हें अस्पताल की जर्जर हालत व सुविधाओं के अभाव से जूझना पड़ा। सुबह 12 बजे यह नजारा था कि अस्पताल के ओपीडी ब्लॉक में रजिस्ट्रेशन काउंटर के ठीक साथ में छत से पानी टपक रहा था।
मजबूरन स्टाफ ने टपक रही छत के ठीक नीचे पानी की बाल्टी लगाई ताकि किचड़ न हो। ऐसे में मरीज व तीमारदार अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर रहे थे। जैसे-तैसे मरीज ओपीडी में पहुंचे डॉक्टर के कमरे के बाहर लाइनों में लगे।
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कार्ड पर दवा लिखने के बाद फिर दवा की लाइन लगी। आखिर में उन्हें टेस्ट करवाने के लिए अगले दिन खाली पेट आने के लिए बोला गया। मंगलवार को बरसात के कारण अस्पताल की ओपीडी 1287 तक सिमट गई।
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व्हीलचेयर के लिए भटकते रहे : ओपीडी समय के दौरान इमरजेंसी व ओपीडी के बाहर स्ट्रेचर व व्हीलचेयर की कमी देखने को मिली। गंभीर स्थिति में आए मरीजों के परिजन अस्पताल परिसर में एक कोने से दूसरे कोने तक व्हीलचेयर की तलाश में भटकते नजर आए।
कुछ तीमारदार अपने मरीजों को सहारा देकर पैदल ले जाते दिखे तो कुछ को मजबूरी में गोद में उठाकर ले जाना पड़ा। जबकि अस्पताल प्रबंधन की तरफ से पर्याप्त व्हीलचेयर व स्ट्रेचर होने का दावा किया जा रहा है। इमरजेंसी में आए नवजोत सिंह ने बताया कि वह आधे घंटे से बीमार मां के लिए व्हीलचेयर ढूंढ रहे हैं ताकि ओपीडी के बाहर ले जा सके। कोई भी व्हीलचेयर उपलब्ध नहीं है। सिक्योरिटी गार्ड एक से दूसरी मंजिल पर भेज देते हैं कि ढूंढकर ले आओ।

सरोज बाला, मरीज- फोटो : Samvad

सरोज बाला, मरीज- फोटो : Samvad

सरोज बाला, मरीज- फोटो : Samvad

सरोज बाला, मरीज- फोटो : Samvad