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परमात्मा से मिलन का एकमात्र मार्ग गुरु की शरण : गरिमा
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कार्यक्रम में उपस्थित लोग। संस्था
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से श्री नगर खेड़ा मंदिर में श्री कृष्ण कथामृत आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
नारायणगढ़। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा श्री नगर खेड़ा मंदिर में आयोजित पांच दिवसीय श्री कृष्ण कथामृत के चौथे दिन गरिमा भारती ने प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि श्री कृष्ण कथा हमें शाश्वत शांति के साथ जीवन के प्रति जागरूक करती है।
गरिमा भारती ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का वास्तविक दर्शन अपने भीतर करने से ही सच्ची जागृति मिलती है। यह जागृति केवल दिव्य दृष्टि और पूर्ण गुरु के माध्यम से ही संभव है। कथा के दौरान उन्होंने भक्त मीराबाई और संत रविदास के प्रसंग का स्मरण किया। उन्होंने समझाया कि संत रविदास से ब्रह्म ज्ञान प्राप्त करने के बाद मीराबाई को अपने निज स्वरूप में श्रीकृष्ण के दर्शन हुए। इसके पश्चात उन्होंने ''पायो जी मैंने राम रतन धन पायो'' कहा।
कथा के मुख्य यजमानों में मार्केट कमेटी के अध्यक्ष नरेंद्र राणा, पवन धीमान, जतिन धीमान, राजेश लोहान, सरिता धीमान और नैब गुर्जर शामिल रहे। प्रसाद सेवा देवेंद्र गुप्ता द्वारा अर्पित की गई। प्रेमचंद बंसल ने लंगर सेवा का दायित्व संभाला। कार्यक्रम का समापन प्रभु की पावन आरती के साथ हुआ।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नारायणगढ़। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा श्री नगर खेड़ा मंदिर में आयोजित पांच दिवसीय श्री कृष्ण कथामृत के चौथे दिन गरिमा भारती ने प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि श्री कृष्ण कथा हमें शाश्वत शांति के साथ जीवन के प्रति जागरूक करती है।
गरिमा भारती ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का वास्तविक दर्शन अपने भीतर करने से ही सच्ची जागृति मिलती है। यह जागृति केवल दिव्य दृष्टि और पूर्ण गुरु के माध्यम से ही संभव है। कथा के दौरान उन्होंने भक्त मीराबाई और संत रविदास के प्रसंग का स्मरण किया। उन्होंने समझाया कि संत रविदास से ब्रह्म ज्ञान प्राप्त करने के बाद मीराबाई को अपने निज स्वरूप में श्रीकृष्ण के दर्शन हुए। इसके पश्चात उन्होंने ''पायो जी मैंने राम रतन धन पायो'' कहा।
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कथा के मुख्य यजमानों में मार्केट कमेटी के अध्यक्ष नरेंद्र राणा, पवन धीमान, जतिन धीमान, राजेश लोहान, सरिता धीमान और नैब गुर्जर शामिल रहे। प्रसाद सेवा देवेंद्र गुप्ता द्वारा अर्पित की गई। प्रेमचंद बंसल ने लंगर सेवा का दायित्व संभाला। कार्यक्रम का समापन प्रभु की पावन आरती के साथ हुआ।
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