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Ambala News: आधार तैयार कर दिया पर बलिदानी कैप्टन अतुल की प्रतिमा कर दी गायब

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 05 Feb 2026 01:23 AM IST
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The foundation was prepared but the statue of martyr Captain Atul was made to disappear.
अंबाला छावनी के महेशनगर में राजमार्ग किनारे अधूरा पड़ा ​स्मारक। संवाद
- पिता बोले- सरकारी विभागों के चक्कर काटे लेकिन किसी ने नहीं सुनी
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वैभव शर्मा

अंबाला। बलिदानियों के सम्मान में बड़ी-बड़ी घोषणाएं करना आसान है, मगर धरातल पर उन्हें अमलीजामा पहनाने में सरकारी तंत्र सुस्त है। इसकी बानगी अंबाला-जगाधरी राजमार्ग पर देखने को मिलती है जहां ऑपरेशन पराक्रम के नायक कैप्टन अतुल सोमरा, जिन्होंने आतंकवादियों से लड़ते हुए जान दे दी, उनकी याद में बनाए जा रहे स्मारक का आधार तैयार कर दिया, रेलिंग भी बना दी मगर बलिदानी की प्रतिमा गायब कर दी। अब अपने दिवंगत बेटे के लिए लंबे समय से पिता भटक रहे हैं। प्रशासन ने इतने चक्कर कटवा दिए कि अब वह निराश हो चुके हैं। इतना ही नहीं जहां पर प्रतिमा लगाने के लिए आधार बनाया है उससे चंद कदमों की दूरी पर शराब का ठेका है।

स्व. कैप्टन अतुल सोमरा के पिता आरएस सोमरा बताते हैं कि वह 15 साल पहले अंबाला छावनी से पानीपत परिवार सहित शिफ्ट हो गए थे। अंबाला जगाधरी राजमार्ग बनने के समय में प्रशासन ने प्रतिमा को चौक से हटा दिया था। भरोसा दिया था कि राजमार्ग बनने के बाद नए रूप से प्रतिमा स्थापित की जाएगी, मगर ऐसा नहीं किया। आरएस सोमरा से प्रतिमा के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि उन्हें यह भी पता नहीं है कि प्रतिमा कहां हैं। यहां तक कि चार महीने पहले ही उन्होंने नगर परिषद को चिट्ठी लिखी थी।
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एनएचएआई ने बलिदानियों के परिजनों को प्रतिमा दी थी: नप

राजमार्ग बनने के बाद नगर परिषद को जिम्मेदारी दी गई थी कि वह राजमार्ग के किनारे महेश नगर के पास बलिदानी की प्रतिमा स्थापित कराएंगे। नगर परिषद ने यहां पर प्रतिमा लगाने को आधार बना दिया और इसकी रेलिंग भी लगा दी मगर प्रतिमा नहीं लगाई। नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी देवेंद्र नरवाल से जब इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने बताया कि राजमार्ग का निर्माण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने कराया है। उन्हें सिर्फ बलिदानी के स्मारक के लिए आधार तैयार करने के निर्देश मिले थे। प्रतिमा के बारे में राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों से बात हुई थी तो उन्होंने कहा था कि प्रतिमा बलिदानियों के परिजनों को सौंप दी गई है। वहीं एनएचएआई के तत्कालीन अधिकारियों का भी स्थानांतरण हो गया है तो किसी को पता नहीं है।
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इस प्रकार कैप्टन अतुल ने दिया था बलिदान



कैप्टन अतुल छावनी के गोविंद नगर के निवासी थे। उन्होंने भारतीय पब्लिक स्कूल से 12वीं की उत्तीर्ण की थी। उन्होंने 1995 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) की परीक्षा और ट्रेनिंग के बाद उन्हें 77 मीडियम रेजिमेंट में कमीशन मिला था। इसके बाद कैप्टन अतुल ने 12 राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन में प्रतिनियुक्ति के लिए स्वेच्छा से आवेदन किया था। जुलाई 2002 में कैप्टन अतुल सोमरा जम्मू कश्मीर में 12 राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन में सेवारत थे। 18 सितंबर 2002 को रामबन जिले के बनिहाल क्षेत्र में ऑपरेशन पराक्रम के दौरान उन्हें एक इनपुट मिला कि हथियारों से लैस आतंकवादी छिपे हुए हैं। कैप्टन सोमरा की इकाई ने इस पर आतंकवादियों के खात्मे की योजना बनाई और रात्रि को ऑपरेशन चलाया। इस दौरान गोलीबारी में कैप्टन सोमरा गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में वीरगति को प्राप्त हुए। वह बलिदान के समय 26 वर्ष के थे।
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