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Ambala News: बाढ़ की मचाई तबाही नहीं भूले हमीदपुर के किसान
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किसान मारकंडा नदी किनारे दिखाते हुए
मुलाना। 11 महीने पहले बाढ़ की ओर से मचाई तबाही को आज तक हमीदपुर गांव के किसान भूले नहीं हैं। उस समय हमीदपुर गांव के खेतों को एक तरफ से मारकंडा नदी ने तो दूसरी तरफ से बेगना नदी ने तबाह कर दिया था।
गांव में करीब 200 एकड़ जमीन की फसल तहस-नहस हुई थी। मारकंडा नदी से तो खेतों में कई फीट रेत भर गया। जोकि अधिक समस्या पैदा कर रहा था। खेतों में कई जगह तो कई कई फीट गहरे गड्ढे तक बन गए थे। इसे किसानों ने दो महीने प्रशासन की बाट जाेहकर स्वयं के व्यय और मेहनत से समतल किया।
12-15 हजार रुपये का आया खर्चा
हमीदपुर के स्थानीय किसानों के अनुसार रेत से भरे खेतों को समतल कराने में करीब 12-15 हजार रुपये प्रति एकड़ का व्यय का खर्च आया था, जोकि किसानों स्वयं अपनी जेब से खर्च किया था। हालांकि किसानों को बाद में बाढ़ से खराब फसल का मुआवजा मिल गया था।
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कई महीनों से विभाग नहीं आया नजर
किसान गुरचरण, सतीश,देव सिंह, मान सिंह ने बताया कि बाढ़ के समय खेतों में मारकंडा नदी और बेगना नदी के पानी बहुत नुकसान किया था। इसके बाद प्रशासन व विभाग के अधिकारियों ने गांव का दौरा भी किया था। बाढ़ में भूमि कटाव बड़ी समस्या बनकर सामने आई थी। इसको रोकने के लिए मारकंडा नदी किनारे पत्थर लगाने की मांग की थी, लेकिन अब बरसात का समय नजदीक आने के बावजूद मारकंडा नदी किनारे कुछ कार्य होता नहीं दिखाई दे रहा है। कई महीनों से तो विभागीय अधिकारी तक नजर नहीं आए।
गुरचरण सिंह का कहना है कि उसकी 15 एकड़ फसल प्रभावित हुई थी। करीब आठ एकड़ में रेत ही रेत था। इसमें फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई थी। मुआवजा तो मिल गया था, लेकिन अब फिर वहीं समय आ गया है। अब तक विभाग ने मारकंडा नदी किनारे से हमीदपुर गांव में पानी न आने के लिए कोई समाधान नहीं किया है।
सतीश सिंह ने बताया कि उसने अपनी 14 एकड़ जमीन को ठेके पर लेकर खेती की थी, लेकिन बाढ़ की चपेट में सब तहस नहस हो गया था। हमें काफी नुकसान हुआ। सरकार से मुआवजा तो मिला, लेकिन अगर फसल होती तो मुनाफा अधिक होता। एक बार नदी का पानी उतरने के बाद फिर से धान लगाई लेकिन नदी के पानी ने फिर से मेहनत पर पानी फेर दिया।
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गांव में करीब 200 एकड़ जमीन की फसल तहस-नहस हुई थी। मारकंडा नदी से तो खेतों में कई फीट रेत भर गया। जोकि अधिक समस्या पैदा कर रहा था। खेतों में कई जगह तो कई कई फीट गहरे गड्ढे तक बन गए थे। इसे किसानों ने दो महीने प्रशासन की बाट जाेहकर स्वयं के व्यय और मेहनत से समतल किया।
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12-15 हजार रुपये का आया खर्चा
हमीदपुर के स्थानीय किसानों के अनुसार रेत से भरे खेतों को समतल कराने में करीब 12-15 हजार रुपये प्रति एकड़ का व्यय का खर्च आया था, जोकि किसानों स्वयं अपनी जेब से खर्च किया था। हालांकि किसानों को बाद में बाढ़ से खराब फसल का मुआवजा मिल गया था।
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कई महीनों से विभाग नहीं आया नजर
किसान गुरचरण, सतीश,देव सिंह, मान सिंह ने बताया कि बाढ़ के समय खेतों में मारकंडा नदी और बेगना नदी के पानी बहुत नुकसान किया था। इसके बाद प्रशासन व विभाग के अधिकारियों ने गांव का दौरा भी किया था। बाढ़ में भूमि कटाव बड़ी समस्या बनकर सामने आई थी। इसको रोकने के लिए मारकंडा नदी किनारे पत्थर लगाने की मांग की थी, लेकिन अब बरसात का समय नजदीक आने के बावजूद मारकंडा नदी किनारे कुछ कार्य होता नहीं दिखाई दे रहा है। कई महीनों से तो विभागीय अधिकारी तक नजर नहीं आए।
गुरचरण सिंह का कहना है कि उसकी 15 एकड़ फसल प्रभावित हुई थी। करीब आठ एकड़ में रेत ही रेत था। इसमें फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई थी। मुआवजा तो मिल गया था, लेकिन अब फिर वहीं समय आ गया है। अब तक विभाग ने मारकंडा नदी किनारे से हमीदपुर गांव में पानी न आने के लिए कोई समाधान नहीं किया है।
सतीश सिंह ने बताया कि उसने अपनी 14 एकड़ जमीन को ठेके पर लेकर खेती की थी, लेकिन बाढ़ की चपेट में सब तहस नहस हो गया था। हमें काफी नुकसान हुआ। सरकार से मुआवजा तो मिला, लेकिन अगर फसल होती तो मुनाफा अधिक होता। एक बार नदी का पानी उतरने के बाद फिर से धान लगाई लेकिन नदी के पानी ने फिर से मेहनत पर पानी फेर दिया।

किसान मारकंडा नदी किनारे दिखाते हुए