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Ambala News: स्कार एंडोमेट्रियोसिस की सफल सर्जरी, मिली दर्द से मुक्ति
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अंबाला। अटल कैंसर केयर केंद्र में महिलाओं का स्कार एंडोमेट्रियोसिस का सफल ऑपरेशन हुआ। अस्पताल के चार डॉक्टरों की टीम ने मिलकर करीब चार घंटे तक यह ऑपरेशन कर महिला को असहनीय दर्द से राहत दिलाई। करीब दो सप्ताह तक ब्राह्मण माजरा गांव निवासी 40 वर्षीय नीलम को डॉक्टरों ने अपनी निगरानी में रखने के बाद मंगलवार को छुट्टी दे दी।
इस ऑपरेशन में डॉ. मीनाक्षी राणा भूषण के अलावा बेहोशी के डॉक्टर वेद पाठक, सर्जन डॉ. अभिषेक भूषण, डॉ. तुलित छाबड़ा ने अहम भूमिका निभाई। साथ ही नर्सिंग ऑफिसर दिव्या, चेतराम और अरुण, लखविंद्र शामिल रहे। टिश्यू निकालने के बाद एबडोमन खाली होने पर जाली भी डाली है। यह ऑपरेशन आयुष्मान मित्रा शंकर के सहयोग से निशुल्क हुआ है। प्राइवेट अस्पताल में इसका हजारों का खर्च आता है।
ऑपरेशन से हुए थे तीन बच्चे
ब्राह्मण माजरा गांव निवासी 40 वर्षीय नीलम ने एक माह पहले अत्याधिक रक्त बहने व असहनीय दर्द के चलते महिला व कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. मिनाक्षी की ओपीडी में दिखाया था। पता चला कि महिला के पास पहले तीन बच्चे हैं और वो भी ऑपरेशन के जरिए ही हुए थे। ऐसे में महिला के गर्भाशय के अंदर सामान्य रूप से बढ़ने वाली एक टिश्यू परत पहले ऑपरेशन वाली जगह पर निशान बनती है। जो रसाैलीनुमा गांठ का रूप ले लेती है। यह काफी पीड़ादायक और दर्दनाक स्थिति होती है। इस स्थिति से बचाव के लिए ऑपरेशन किया जाता है।
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डिलीवरी के समय ऑपरेशन से हो रही बीमारी
डॉ. मीनाक्षी ने बताया कि ऑपरेशन से डिलीवरी होने के कारण महिलाओं में इस तरह की परेशानी बढ़ गई है। एक के बाद एक ऑपरेशन होने पर अक्सर यह दिक्कत आती है। इस बीमारी के लक्षण बताते हुए कहा कि जब महिला को महावारी आती है, तब-तब रसाैलीनुमा गांठ यानी पहले हुए ऑपरेशन वाली जगह पर दर्द होता है। इसलिए समय रहते महिला रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। ताकि समय रहते उपचार किया जा सके।
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इस ऑपरेशन में डॉ. मीनाक्षी राणा भूषण के अलावा बेहोशी के डॉक्टर वेद पाठक, सर्जन डॉ. अभिषेक भूषण, डॉ. तुलित छाबड़ा ने अहम भूमिका निभाई। साथ ही नर्सिंग ऑफिसर दिव्या, चेतराम और अरुण, लखविंद्र शामिल रहे। टिश्यू निकालने के बाद एबडोमन खाली होने पर जाली भी डाली है। यह ऑपरेशन आयुष्मान मित्रा शंकर के सहयोग से निशुल्क हुआ है। प्राइवेट अस्पताल में इसका हजारों का खर्च आता है।
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ऑपरेशन से हुए थे तीन बच्चे
ब्राह्मण माजरा गांव निवासी 40 वर्षीय नीलम ने एक माह पहले अत्याधिक रक्त बहने व असहनीय दर्द के चलते महिला व कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. मिनाक्षी की ओपीडी में दिखाया था। पता चला कि महिला के पास पहले तीन बच्चे हैं और वो भी ऑपरेशन के जरिए ही हुए थे। ऐसे में महिला के गर्भाशय के अंदर सामान्य रूप से बढ़ने वाली एक टिश्यू परत पहले ऑपरेशन वाली जगह पर निशान बनती है। जो रसाैलीनुमा गांठ का रूप ले लेती है। यह काफी पीड़ादायक और दर्दनाक स्थिति होती है। इस स्थिति से बचाव के लिए ऑपरेशन किया जाता है।
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डिलीवरी के समय ऑपरेशन से हो रही बीमारी
डॉ. मीनाक्षी ने बताया कि ऑपरेशन से डिलीवरी होने के कारण महिलाओं में इस तरह की परेशानी बढ़ गई है। एक के बाद एक ऑपरेशन होने पर अक्सर यह दिक्कत आती है। इस बीमारी के लक्षण बताते हुए कहा कि जब महिला को महावारी आती है, तब-तब रसाैलीनुमा गांठ यानी पहले हुए ऑपरेशन वाली जगह पर दर्द होता है। इसलिए समय रहते महिला रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। ताकि समय रहते उपचार किया जा सके।