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राज्य की बेस्ट एथलीट रही सुधा अब तैयार कर रही है भविष्य के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एथलीट
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sports
- फोटो : Ambala
अंबाला। कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से लगातार पांच बार बेस्ट एथलीट का खिताब हासिल कर चुकी शक्तिनगर की सुधा भसीन अब राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर के एथलीट तैयार कर रही हैं। राजीव गांधी खेल स्टेडियम में इनकी सीटी की आवाज सुनते ही खिलाड़ियों के कदम तेज हो जाते हैं। उनके इस प्रयास की सराहना हो रही है।
राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाने का सपना देख रहे एथलीट भी उनके द्वारा बताए जा रहे गुर पर पूरी तरह फोकस रखकर अपने आपको तैयार कर रहे हैं।
100-200 मीटर के साथ लोंग जंप में मारी बाजी
खेल के मैदान में खिलाड़ियों को दौड़ते देखकर ही सुधा के कदम भी ट्रैक की ओर बढ़ गए थे। माता-पिता की अकेली बेटी होने के बावजूद सुधा ने बचपन से कड़ी मेहनत शुरू की दी। 100 मीटर के साथ 200 मीटर की तैयारी शुरू की। साथ ही लोंग जंप में भी उड़ान भरी। पहले जिला फिर राज्य स्तर पर मिली कामयाबी के बाद सुधा करे नेशनल गेम में हिस्सा लेने का मौका मिला। तीनों स्पर्धाओं में एक साथ सुधा ने मेडल हासिल कर राज्य का नाम रोशन किया। इसके बाद उनके कदम कभी नहीं रुके। कदम दर कदम कामयाबी मिलती गई।
बेस्ट एथलीट का रिकॉड अब भी कायम
एथलेटिक कोच सुधा भसीन ने बताया कि बतौर बेस्ट एथलीट उनका रिकॉड अब भी कायम हैं। राज्य स्तर पर 1983 से 88 तक लगातार पांच साल बेस्ट एथलीट रही। इसके बाद कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में भी वे पांच साल तक बेस्ट एथलीट घोषित की गई। शानदार गेम होने की वजह से बाद में उनकी नियुक्ति एथलेटिक कोच के तौर पर हो गई। बेहतर गेेम होने के बावजूद सुधा को देश के लिए मेडल न लाने का मलाल है। मगर अब वे ऐसे एथलीट तैयार कर रही हैं जोकि उनके सपने को साकार कर सकें।
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सेना व पुलिस में सेवाएं दे रहे हैं कई खिलाड़ी
सुधा की अगुवाई में तैयार हुए कई खिलाड़ी इस समय सेना व पुलिस में सेवाएं दे रहे हैं। भसीन ने बताया कि कोचिंग के दौरान कई खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन के दम वे राज्य व राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में छाप छोड़ने में कामयाब रही। इसी आधार पर उनकी सेना व पुलिस में नियुक्ति हो गई। वे बताती हैं कि अभी कई लड़कियों को भी वे तैयार कर रही हैं ताकि ये भी बड़े स्तर पर अपनी प्रतिभा की धूम मचा सके।
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राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाने का सपना देख रहे एथलीट भी उनके द्वारा बताए जा रहे गुर पर पूरी तरह फोकस रखकर अपने आपको तैयार कर रहे हैं।
100-200 मीटर के साथ लोंग जंप में मारी बाजी
खेल के मैदान में खिलाड़ियों को दौड़ते देखकर ही सुधा के कदम भी ट्रैक की ओर बढ़ गए थे। माता-पिता की अकेली बेटी होने के बावजूद सुधा ने बचपन से कड़ी मेहनत शुरू की दी। 100 मीटर के साथ 200 मीटर की तैयारी शुरू की। साथ ही लोंग जंप में भी उड़ान भरी। पहले जिला फिर राज्य स्तर पर मिली कामयाबी के बाद सुधा करे नेशनल गेम में हिस्सा लेने का मौका मिला। तीनों स्पर्धाओं में एक साथ सुधा ने मेडल हासिल कर राज्य का नाम रोशन किया। इसके बाद उनके कदम कभी नहीं रुके। कदम दर कदम कामयाबी मिलती गई।
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बेस्ट एथलीट का रिकॉड अब भी कायम
एथलेटिक कोच सुधा भसीन ने बताया कि बतौर बेस्ट एथलीट उनका रिकॉड अब भी कायम हैं। राज्य स्तर पर 1983 से 88 तक लगातार पांच साल बेस्ट एथलीट रही। इसके बाद कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में भी वे पांच साल तक बेस्ट एथलीट घोषित की गई। शानदार गेम होने की वजह से बाद में उनकी नियुक्ति एथलेटिक कोच के तौर पर हो गई। बेहतर गेेम होने के बावजूद सुधा को देश के लिए मेडल न लाने का मलाल है। मगर अब वे ऐसे एथलीट तैयार कर रही हैं जोकि उनके सपने को साकार कर सकें।
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सेना व पुलिस में सेवाएं दे रहे हैं कई खिलाड़ी
सुधा की अगुवाई में तैयार हुए कई खिलाड़ी इस समय सेना व पुलिस में सेवाएं दे रहे हैं। भसीन ने बताया कि कोचिंग के दौरान कई खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन के दम वे राज्य व राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में छाप छोड़ने में कामयाब रही। इसी आधार पर उनकी सेना व पुलिस में नियुक्ति हो गई। वे बताती हैं कि अभी कई लड़कियों को भी वे तैयार कर रही हैं ताकि ये भी बड़े स्तर पर अपनी प्रतिभा की धूम मचा सके।