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Ambala News: टूटी गलियों व नालियों की परेशानी झेल रहे लोग
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टांगरी बांध के पास न्यू कॉलोनी में टूटी सड़कों के हालात। संवाद
अंबाला। नगर परिषद के अधीन आने वाले क्षेत्रों में अव्यवस्थाओं का आलम है। नई सड़कों के निर्माण से पुरानी सड़कों का लेवल नीचा हो गया है तो कहीं गंदगी से अटी नाली स्थानीय लोगों के लिए गले की फांस बन गई है। हद तो तब है कि हालात की जानकारी के बाद भी नगर परिषद इन अव्यवस्थाओं को व्यवस्थाओं में बदलने के लिए प्रयासरत नजर नहीं आ रहा।
यही कारण है कि इन समस्याओं से जुड़ी फाइलें आज भी नगर परिषद कार्यालय में एक से दूसरे टेबल पर घूम रही हैं। इस बात से सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि लोगों की परेशानी दूर करने वाले विभाग में किस प्रकार से काम हो रहा है जबकि विभागीय अधिकारी प्रत्येक समस्या के समुचित समाधान का आश्वासन देते हैं।
ऐसी ही परेशानी पिछले लगभग एक साल से टांगरी बांध के नजदीक बसी कॉलोनी के वासियों को भुगतनी पड़ रही है जोकि संतरी से लेकर मंत्री तक गुहार लगा चुके है, बावजूद इसके न तो उनकी गलियां ऊंची हो पाई हैं और न ही पानी निकासी के लिए नालियां बन पाई हैं।
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कागजों तक सीमित कार्रवाई
अर्जुन नगर निवासी कमल कांत व न्यू कॉलोनी निवासी जसविंदर सिंह ने बताया कि उनकी समस्या बरसों पुरानी है, लेकिन इस समस्या का आजतक कोई स्थाई समाधान नहीं हो पाया।
आसपास के क्षेत्रों की सड़कें ऊंची बनी हुई हैं, जबकि उनकी गलियां नीची हैं। इस कारण हल्की बारिश में ही पानी उनकी गलियों में भर जाता है जोकि लोगों के लिए परेशानी का सबब बन जाता है। इस संबंध में सीएम विंडो, उपायुक्त कार्यालय, एसडीएम और नप कार्यालय में शिकायत दी गई। कई बार विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक भी हुई लेकिन समस्या समाधान को लेकर धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई।
नहीं बन रही गली
ऐसी ही समस्या रामुपर सरसेहड़ी की तरफ जाने वाली सड़क पर बसी कॉलोनी कमल विहार की है। जहां सड़क निर्माण की लोग बाट जोह रहे हैं। हैरानी की बात है कि नगर परिषद कार्यालय में लिखित शिकायत दी हुई हैै और वो शिकायत फाइल में एक से दूसरी जगह पर घूम रही है। हालांकि विभागीय अधिकारी भी गली का मुआयना कर चुके हैं, बावजूद इसके एक माह बीत जाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं पाया है।
जो भी शिकायत नप कार्यालय में आती है, उसे पूरी गंभीरता से लिया जाता है। संबंधित विभाग के कर्मचारियों को उस क्षेत्र में भेजा जाता है ताकि मौके के हालात देखे जा सकें। इसके बाद गली या नाली निर्माण पर होने वाले खर्च की रुपरेखा तैयार की जाती है ताकि समस्या का समाधान हो सके। इसमें कुछ समय लग जाता है, लेकिन समस्या का उचित तरीके से समाधान किया जाता है।
रविंदर कुहाड़, कार्यकारी अधिकारी, नप सदर, अबाला।
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यही कारण है कि इन समस्याओं से जुड़ी फाइलें आज भी नगर परिषद कार्यालय में एक से दूसरे टेबल पर घूम रही हैं। इस बात से सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि लोगों की परेशानी दूर करने वाले विभाग में किस प्रकार से काम हो रहा है जबकि विभागीय अधिकारी प्रत्येक समस्या के समुचित समाधान का आश्वासन देते हैं।
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ऐसी ही परेशानी पिछले लगभग एक साल से टांगरी बांध के नजदीक बसी कॉलोनी के वासियों को भुगतनी पड़ रही है जोकि संतरी से लेकर मंत्री तक गुहार लगा चुके है, बावजूद इसके न तो उनकी गलियां ऊंची हो पाई हैं और न ही पानी निकासी के लिए नालियां बन पाई हैं।
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कागजों तक सीमित कार्रवाई
अर्जुन नगर निवासी कमल कांत व न्यू कॉलोनी निवासी जसविंदर सिंह ने बताया कि उनकी समस्या बरसों पुरानी है, लेकिन इस समस्या का आजतक कोई स्थाई समाधान नहीं हो पाया।
आसपास के क्षेत्रों की सड़कें ऊंची बनी हुई हैं, जबकि उनकी गलियां नीची हैं। इस कारण हल्की बारिश में ही पानी उनकी गलियों में भर जाता है जोकि लोगों के लिए परेशानी का सबब बन जाता है। इस संबंध में सीएम विंडो, उपायुक्त कार्यालय, एसडीएम और नप कार्यालय में शिकायत दी गई। कई बार विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक भी हुई लेकिन समस्या समाधान को लेकर धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई।
नहीं बन रही गली
ऐसी ही समस्या रामुपर सरसेहड़ी की तरफ जाने वाली सड़क पर बसी कॉलोनी कमल विहार की है। जहां सड़क निर्माण की लोग बाट जोह रहे हैं। हैरानी की बात है कि नगर परिषद कार्यालय में लिखित शिकायत दी हुई हैै और वो शिकायत फाइल में एक से दूसरी जगह पर घूम रही है। हालांकि विभागीय अधिकारी भी गली का मुआयना कर चुके हैं, बावजूद इसके एक माह बीत जाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं पाया है।
जो भी शिकायत नप कार्यालय में आती है, उसे पूरी गंभीरता से लिया जाता है। संबंधित विभाग के कर्मचारियों को उस क्षेत्र में भेजा जाता है ताकि मौके के हालात देखे जा सकें। इसके बाद गली या नाली निर्माण पर होने वाले खर्च की रुपरेखा तैयार की जाती है ताकि समस्या का समाधान हो सके। इसमें कुछ समय लग जाता है, लेकिन समस्या का उचित तरीके से समाधान किया जाता है।
रविंदर कुहाड़, कार्यकारी अधिकारी, नप सदर, अबाला।