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हर माह 80 लाख की दवा खा जाते हैं दिल के मरीज
अमर उजाला ब्यूरो/अंबाला सिटी
Updated Wed, 28 Sep 2016 11:50 PM IST
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अंबाला कैंट।
यदि छाती में हल्का दर्द है तो इसे नजरंदाज करना महंगा पड़ सकता है। यह हार्ट प्रॉब्लम की शुरुआत हो सकती है। ऐसे में अब लोगों को संभलना होगा, नहीं तो यह बीमारी आपको ऐसा दर्द दे सकती है, जिससे जीवन भर जूझना पड़ सकता है। स्थिति यह है कि युवा वर्ग भी अब इसकी चपेट में आ चुका है। एक अनुमान के अनुसार अंबाला जिला में करीब अस्सी लाख रुपये की दवाओं की खपत हर महीने हार्ट पेशेंट्स पर है।
तीन दशकों में बदल गई तस्वीर
बीते तीन दशकों में अंबाला में हार्ट पेशेंट्स की तस्वीर ही बदल गई है। चिकित्सकों की मानें तो हार्ट प्रॉब्लम 50 साल की उम्र के बाद ज्यादातर सामने आती थी, वह अब युवा अवस्था में भी दिखने लगी है। यह स्थिति पूरी तरह से लाइफ स्टाइल बदलने का ही नतीजा है। यदि शुरुआती लक्षणों को न समझा गया या फिर नजरंदाज कर दिया गया तो आगे चलकर यह खतरनाक साबित हो सकता है।
पहली स्टेज यानी एंजाइना
यह हार्ट प्रॉब्लम की पहली स्टेज मानी जाती है। इसमें यदि मरीज संभल जाता है तो ठीक है, नहीं तो आगे दिक्कतें आती हैं। इसमें चलने फिरने पर व्यक्ति को छाती में दर्द होता है और थोड़ा आराम करने पर यह ठीक भी हो जाता है।
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दूसरी स्टेज यानी कोरोनरी इनसफिशिएंसी
इसमें मरीज यदि बैठा है तो भी उसकी छाती में दर्द होता है, जो कईं बार ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसे मरीज की प्रॉबल्म ईसीजी में डिटेक्ट हो जाती है। इस स्टेज में खतरा बढ़ जाता है।
तीसरी स्टेज यानी मेजर अटैक
इस स्टेज में मरीज को मेजर अटैक आता है और कईं बार संभलने तक का मौका नहीं मिलता। कईं बार मरीज इस स्टेज में भी बच सकता है, लेकिन जरूरी है कि इससे पहले की अवस्थाओं में अपना इलाज शुरू करवा लें।
इस तरह से करवा सकते हैं जांच
छाती में हल्का दर्द होने पर ईसीजी, टीएमटी, ईको कॉर्डियोग्राफी या फिर एंजियोग्राफी से स्थिति का पता चल जाता है। इसके बाद ही मरीज को क्या उपचार दिया जाए, तय किया जाता है। लेकिन यह दवाएं जीवन भर चलती हैं, जबकि परहेज ज्यादा जरूरी है।
यह बरतें सावधानियंा
चिकित्सकों के अनुसार शरीर का वजन न बढ़ने दें, रोजाना कम से कम आधा घंटे तेज कदमों से सैर करें, खानपान में जंक फूड से बचें, ज्यादा ऑयली खाने से बचें। साथ ही रूटीन में बदलाव लाएं और एक्सरसाइज पर अवश्य ध्यान दें और नियमित रूप से दवाओं का इस्तेमाल करें।
एक करोड़ की दवाओं की है खतप
डॉ. सचिन गोयल व दवा विक्रेता बृजेंद्र मल्होत्रा का कहना है कि हार्ट पेशेंट्स की संख्या लगातार बढ़ रही है। एक अनुमान के अनुसार अंबाला में हर महीने करीब अस्सी लाख रुपये की दवाएं ऐसे पेशेंट्स खा रहे हैं। यह आंकड़ा बीते दो से तीन दशक पहले काफी कम था।
वर्जन
व्यक्ति खुद ही हार्ट प्रॉब्लम को दावत देता है। यदि जीवन शैली स्वस्थ होगी तो ऐसी समस्याएं नहीं आएंगी। अब तो युवा अवस्था में भी लोग इन बीमारियों से जूझ रहे हैं, जबकि मेरे पास भी ऐसे केस आते हैं। यदि हार्ट पेशेंट हैं, तो दवाओं का इस्तेमाल बंद न करें और नियमित रूप से खानपान और एक्सरसाइज पर ध्यान दें।
- डॉ. डीएस गोयल, एमडी मेडिसन, हार्ट स्पेशलिस्ट
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यदि छाती में हल्का दर्द है तो इसे नजरंदाज करना महंगा पड़ सकता है। यह हार्ट प्रॉब्लम की शुरुआत हो सकती है। ऐसे में अब लोगों को संभलना होगा, नहीं तो यह बीमारी आपको ऐसा दर्द दे सकती है, जिससे जीवन भर जूझना पड़ सकता है। स्थिति यह है कि युवा वर्ग भी अब इसकी चपेट में आ चुका है। एक अनुमान के अनुसार अंबाला जिला में करीब अस्सी लाख रुपये की दवाओं की खपत हर महीने हार्ट पेशेंट्स पर है।
तीन दशकों में बदल गई तस्वीर
बीते तीन दशकों में अंबाला में हार्ट पेशेंट्स की तस्वीर ही बदल गई है। चिकित्सकों की मानें तो हार्ट प्रॉब्लम 50 साल की उम्र के बाद ज्यादातर सामने आती थी, वह अब युवा अवस्था में भी दिखने लगी है। यह स्थिति पूरी तरह से लाइफ स्टाइल बदलने का ही नतीजा है। यदि शुरुआती लक्षणों को न समझा गया या फिर नजरंदाज कर दिया गया तो आगे चलकर यह खतरनाक साबित हो सकता है।
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पहली स्टेज यानी एंजाइना
यह हार्ट प्रॉब्लम की पहली स्टेज मानी जाती है। इसमें यदि मरीज संभल जाता है तो ठीक है, नहीं तो आगे दिक्कतें आती हैं। इसमें चलने फिरने पर व्यक्ति को छाती में दर्द होता है और थोड़ा आराम करने पर यह ठीक भी हो जाता है।
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दूसरी स्टेज यानी कोरोनरी इनसफिशिएंसी
इसमें मरीज यदि बैठा है तो भी उसकी छाती में दर्द होता है, जो कईं बार ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसे मरीज की प्रॉबल्म ईसीजी में डिटेक्ट हो जाती है। इस स्टेज में खतरा बढ़ जाता है।
तीसरी स्टेज यानी मेजर अटैक
इस स्टेज में मरीज को मेजर अटैक आता है और कईं बार संभलने तक का मौका नहीं मिलता। कईं बार मरीज इस स्टेज में भी बच सकता है, लेकिन जरूरी है कि इससे पहले की अवस्थाओं में अपना इलाज शुरू करवा लें।
इस तरह से करवा सकते हैं जांच
छाती में हल्का दर्द होने पर ईसीजी, टीएमटी, ईको कॉर्डियोग्राफी या फिर एंजियोग्राफी से स्थिति का पता चल जाता है। इसके बाद ही मरीज को क्या उपचार दिया जाए, तय किया जाता है। लेकिन यह दवाएं जीवन भर चलती हैं, जबकि परहेज ज्यादा जरूरी है।
यह बरतें सावधानियंा
चिकित्सकों के अनुसार शरीर का वजन न बढ़ने दें, रोजाना कम से कम आधा घंटे तेज कदमों से सैर करें, खानपान में जंक फूड से बचें, ज्यादा ऑयली खाने से बचें। साथ ही रूटीन में बदलाव लाएं और एक्सरसाइज पर अवश्य ध्यान दें और नियमित रूप से दवाओं का इस्तेमाल करें।
एक करोड़ की दवाओं की है खतप
डॉ. सचिन गोयल व दवा विक्रेता बृजेंद्र मल्होत्रा का कहना है कि हार्ट पेशेंट्स की संख्या लगातार बढ़ रही है। एक अनुमान के अनुसार अंबाला में हर महीने करीब अस्सी लाख रुपये की दवाएं ऐसे पेशेंट्स खा रहे हैं। यह आंकड़ा बीते दो से तीन दशक पहले काफी कम था।
वर्जन
व्यक्ति खुद ही हार्ट प्रॉब्लम को दावत देता है। यदि जीवन शैली स्वस्थ होगी तो ऐसी समस्याएं नहीं आएंगी। अब तो युवा अवस्था में भी लोग इन बीमारियों से जूझ रहे हैं, जबकि मेरे पास भी ऐसे केस आते हैं। यदि हार्ट पेशेंट हैं, तो दवाओं का इस्तेमाल बंद न करें और नियमित रूप से खानपान और एक्सरसाइज पर ध्यान दें।
- डॉ. डीएस गोयल, एमडी मेडिसन, हार्ट स्पेशलिस्ट