{"_id":"60f880548ebc3e6fdc5e2031","slug":"now-24-coach-train-will-be-washed-in-10-minutes-instead-of-two-and-a-half-hours-ambala-news-knl77289138","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब ढाई घंटे के बजाए 10 मिनट में ही धुलेगी 24 कोच की ट्रेन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब ढाई घंटे के बजाए 10 मिनट में ही धुलेगी 24 कोच की ट्रेन
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अंबाला। वॉशिंग लाइन में अब ढाई घंटे की बजाए 10 मिनट में 24 कोच ट्रेन की सफाई हो जाएगी। अभी एक कोच की धुलाई में औसतन प्रति 10 मिनट में 200 लीटर पानी खर्च होता है, लेकिन चंडीगढ़ कोचिंग डिपो में लगने वाले ऑटोमेटिक कोच वाशिंग प्लांट से एक कोच की धुलाई में 50-60 लीटर ही पानी खर्च होगा। मंडल के चंडीगढ़ स्टेशन की वॉशिंग लाइन में लगने वाले स्वचालित कोच वॉशिंग प्लांट से ट्रेनों के कोच की सफाई होगी।
प्लांट लगने से 90 फीसदी पानी की बचत होती है। प्लांट की एक और खासियत यह है कि इसके माध्यम से पानी को रिसाइकिल कर दोबारा उपयोग में लाया जा सकेगा। सेंसर युक्त प्लांट के साथ ही सीसीटीवी भी लगा होगा, जो ट्रेन के कोचों पर निगरानी रखेगा ताकि कोच की साफ-सफाई की सही जानकारी मिलती रहे। प्लांट में लगे बेलनाकार ब्रश और क्लीनिंग केमिकल अधिकतम आठ किमी की रफ्तार से चल रही ट्रेन की सफाई करने में सक्षम होंगे।
1.8 करोड़ का है प्रोजेक्ट
भारतीय रेलवे सीएंडडब्ल्यू डिपो चंडीगढ़, अंबाला मंडल का एक प्रमुख कोच रख-रखाव डिपो है। रोजाना 10 ट्रेनों की वाशिंग लाइन में धुलाई की जाती है। मंडल की तरफ से ऑटोमेटिक कोच वॉशिंग प्लांट सहित वाटर रिसाइक्लिंग प्लांट और वाटर सॉफ्टनिंग प्लांट के डिजाइन, आपूर्ति, स्थापना और कमीशन के प्रस्ताव को रेलवे बोर्ड भेजा गया है। 5 साल का वार्षिक रख-रखाब अनुबंध के साथ परियोजना की लागत लगभग 1.8 करोड़ रुपये होगी। मौजूदा समय में मैनुअल तरीके से बाहरी धुलाई के दौरान पानी की औसत खपत 4 कर्मचारियों के साथ लगभग 200 लीटर प्रति कोच है। प्राथमिक रख-रखाव के दौरान जेट मशीन का उपयोग करके 2.5 घंटे और 4800 लीटर पानी की खपत होती है जो अंतत: रसायनों के साथ नाली में चली जाती है। चंडीगढ़ में ही बाहर की धुलाई के लिए प्रतिदिन औसतन 80 डिब्बों का काम होता है और बाहर की धुलाई के लिए 16 हजार लीटर पानी की खपत होती है। कोच लगने के बाद 24 कोच की ट्रेन में सिर्फ 1400 लीटर ही इस्तेमाल होगा और इसका पुन: भी उपयोग किया जा सकेगा।
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इन ट्रेनों की होती है धुलाई
मंडल की अधिकांश ट्रेनों का ठहराव चंडीगढ़ स्टेशन पर है, इसलिए ट्रेनों की प्राइमरी और सेकेंडरी मरम्मत भी चंडीगढ़ वॉशिंग लाइन में की जाती है। इसमें शताब्दी ट्रेन नंबर 02045/46, चंडीगढ़-कोच्चिवली संपर्क क्रांति 02217/18, चंडीगढ़-मडगांव संपर्क क्रांति 02449/50, चंडीगढ़-बांद्रा टर्मिनस 02451/52, चंडीगढ़-अमृतसर सुपरफास्ट 02241/42, चंडीगढ़-अमृतसर इंटरसिटी 02411/12, चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ 05903/04, चंडीगढ़-मदुरई 02687/88, चंडीगढ़-यशवंतपुर संपर्क क्रांति 02685/86 व चंडीगढ़-हावड़ा मेल ट्रेन नंबर 02311/12 शामिल हैं।
चंडीगढ़ वॉशिंग लाइन में ऑटोमेटिक वॉशिंग प्लांट लगाने का प्रपोजल हेडक्वार्टर भेजा हुआ है। उम्मीद है कि जल्द ही स्वीकृति मिल जाएगी। प्लांट के लगने से पानी और समय दोनों की बचत होगी। अंबाला में एक या दो ही ट्रेनों की वॉशिंग होती है। इसलिए अभी यहां कोई ऐसी योजना नहीं है।
-गुरिंदर मोहन सिंह, मंडल रेल प्रबंधक, अंबाला।
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प्लांट लगने से 90 फीसदी पानी की बचत होती है। प्लांट की एक और खासियत यह है कि इसके माध्यम से पानी को रिसाइकिल कर दोबारा उपयोग में लाया जा सकेगा। सेंसर युक्त प्लांट के साथ ही सीसीटीवी भी लगा होगा, जो ट्रेन के कोचों पर निगरानी रखेगा ताकि कोच की साफ-सफाई की सही जानकारी मिलती रहे। प्लांट में लगे बेलनाकार ब्रश और क्लीनिंग केमिकल अधिकतम आठ किमी की रफ्तार से चल रही ट्रेन की सफाई करने में सक्षम होंगे।
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1.8 करोड़ का है प्रोजेक्ट
भारतीय रेलवे सीएंडडब्ल्यू डिपो चंडीगढ़, अंबाला मंडल का एक प्रमुख कोच रख-रखाव डिपो है। रोजाना 10 ट्रेनों की वाशिंग लाइन में धुलाई की जाती है। मंडल की तरफ से ऑटोमेटिक कोच वॉशिंग प्लांट सहित वाटर रिसाइक्लिंग प्लांट और वाटर सॉफ्टनिंग प्लांट के डिजाइन, आपूर्ति, स्थापना और कमीशन के प्रस्ताव को रेलवे बोर्ड भेजा गया है। 5 साल का वार्षिक रख-रखाब अनुबंध के साथ परियोजना की लागत लगभग 1.8 करोड़ रुपये होगी। मौजूदा समय में मैनुअल तरीके से बाहरी धुलाई के दौरान पानी की औसत खपत 4 कर्मचारियों के साथ लगभग 200 लीटर प्रति कोच है। प्राथमिक रख-रखाव के दौरान जेट मशीन का उपयोग करके 2.5 घंटे और 4800 लीटर पानी की खपत होती है जो अंतत: रसायनों के साथ नाली में चली जाती है। चंडीगढ़ में ही बाहर की धुलाई के लिए प्रतिदिन औसतन 80 डिब्बों का काम होता है और बाहर की धुलाई के लिए 16 हजार लीटर पानी की खपत होती है। कोच लगने के बाद 24 कोच की ट्रेन में सिर्फ 1400 लीटर ही इस्तेमाल होगा और इसका पुन: भी उपयोग किया जा सकेगा।
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इन ट्रेनों की होती है धुलाई
मंडल की अधिकांश ट्रेनों का ठहराव चंडीगढ़ स्टेशन पर है, इसलिए ट्रेनों की प्राइमरी और सेकेंडरी मरम्मत भी चंडीगढ़ वॉशिंग लाइन में की जाती है। इसमें शताब्दी ट्रेन नंबर 02045/46, चंडीगढ़-कोच्चिवली संपर्क क्रांति 02217/18, चंडीगढ़-मडगांव संपर्क क्रांति 02449/50, चंडीगढ़-बांद्रा टर्मिनस 02451/52, चंडीगढ़-अमृतसर सुपरफास्ट 02241/42, चंडीगढ़-अमृतसर इंटरसिटी 02411/12, चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ 05903/04, चंडीगढ़-मदुरई 02687/88, चंडीगढ़-यशवंतपुर संपर्क क्रांति 02685/86 व चंडीगढ़-हावड़ा मेल ट्रेन नंबर 02311/12 शामिल हैं।
चंडीगढ़ वॉशिंग लाइन में ऑटोमेटिक वॉशिंग प्लांट लगाने का प्रपोजल हेडक्वार्टर भेजा हुआ है। उम्मीद है कि जल्द ही स्वीकृति मिल जाएगी। प्लांट के लगने से पानी और समय दोनों की बचत होगी। अंबाला में एक या दो ही ट्रेनों की वॉशिंग होती है। इसलिए अभी यहां कोई ऐसी योजना नहीं है।
-गुरिंदर मोहन सिंह, मंडल रेल प्रबंधक, अंबाला।