{"_id":"6133c7b08ebc3e01e45ba0f4","slug":"more-than-10-thousand-farmers-will-leave-for-muzaffarnagar-ambala-news-knl821654186","type":"story","status":"publish","title_hn":"आज 10 हजार से अधिक किसान बसों व गाड़ियों की मदद से होंगे मुजफ्फरपुर के लिए रवाना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आज 10 हजार से अधिक किसान बसों व गाड़ियों की मदद से होंगे मुजफ्फरपुर के लिए रवाना
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुजफ्फरनगर में होने वाली किसान महापंचायत में शामिल होने के लिए किसानों ने कमर कस ली है। आज अंबाला जिला से करीब 10 हजार से अधिक किसान बसों व गाड़ियों के माध्यम से मुजफ्फरनगर के लिए रवाना होंगे। मुजफ्फरनगर जाने के लिए भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी के आह्वान किया था। इसके बाद से ही जिलेभर के किसानों ने गांव-गांव एकत्रित होकर मुजफ्फरनगर जाने की योजना बनाई। केवल अंबाला वन ब्लॉक की बात करें तो यहीं से ही 20 से अधिक बसों के माध्यम से किसान रवाना होंगे। इसके अलावा जिलेभर से 100 से अधिक बसों, गाड़ियों व ट्रेक्टरों के माध्यम से किसान मुजफ्फरनगर के लिए निकलेंगे। भाकियू के जिला प्रधान मलकीत सिंह ने कहा कि उन्होंने गांव-गांव दौरा कर किसानों को मुजफ्फरनगर जाने की सूचना दी। शनिवार दोपहर तक 7 हजार से अधिक किसानों ने जाने के लिए अपने नाम दर्ज करवाएं हैं। इसके अलावा निजी वाहनों से जाने वालों की संख्या अलग है। बाकी समय पर और कितने किसान होते हैं। यह तभी पता लग सकेगा।
भाकियू के जिला अध्यक्ष मलकीत सिंह ने कहा कि जब तक सरकार इन कृषि कानूनों को वापस नहीं ले लेती है। हमारा प्रदर्शन और धरना इसी प्रकार जारी रहेगा। महापंचायत में जो भी निर्णय लिए जाएंगे और उन सभी निर्णयों का पालन करते हुए किसान इन कृषि कानूनों के विरोध में अपनी आवाज बुलंद करेंगे और जब तक इन कृषि कानूूनों को पूरी तरह से रद्द नहीं कर दिया जाता है हमारा न तो दिल्ली से और न ही अन्य किसी बॉर्डर से हटने वाले हैं।
विज्ञापन
भाकियू के जिला अध्यक्ष मलकीत सिंह ने कहा कि जब तक सरकार इन कृषि कानूनों को वापस नहीं ले लेती है। हमारा प्रदर्शन और धरना इसी प्रकार जारी रहेगा। महापंचायत में जो भी निर्णय लिए जाएंगे और उन सभी निर्णयों का पालन करते हुए किसान इन कृषि कानूनों के विरोध में अपनी आवाज बुलंद करेंगे और जब तक इन कृषि कानूूनों को पूरी तरह से रद्द नहीं कर दिया जाता है हमारा न तो दिल्ली से और न ही अन्य किसी बॉर्डर से हटने वाले हैं।
विज्ञापन