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Ambala News: आवारा कुत्तों का आतंक, 10 माह में 9,956 लोग बने शिकार
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कुत्तों के काटने के बाद इंजेक्शन लगवाने को अपनी बारी का इंतजार करते पीड़ित। संवाद
शम्मी मेहरोल
अंबाला सिटी। नागरिकों के लिए आवारा कुत्तों का आतंक किसी महामारी से कम नहीं बनता जा रहा है। शहर की हर गली, बाजार, सार्वजनिक स्थलों और रिहायशी इलाकों में कुत्तों का खौफ इस कदर हावी है कि लोगों का घर से बाहर निकलना दूभर हो गया है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अंबाला शहर में जनवरी से लेकर अक्तूबर तक मात्र 10 महीनों के भीतर आवारा कुत्तों ने कुल 9,956 लोगों को अपना शिकार बनाया है।
इनमें अकेले 885 पुरुषों को कुत्तों ने निशाना बनाया है। इसके अलावा, आवारा कुत्तों के हमलों में 382 महिलाएं और 347 मासूम बच्चे भी गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं। शहर की लगभग हर गली में 20 से 30 आवारा कुत्ते झुंड बनाकर घूम रहे हैं, जिससे विशेषकर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों में भारी दहशत का माहौल है। आए दिन सामने आ रहे इन मामलों ने नगर निगम और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वीरवार सुबह आवारा कुत्तों ने मनमोहन नगर इलाके में एक युवक पर हमला कर दिया। युवक घर से रोज की तरह काम पर जा रहा था। जैसे ही वह गली से गुजर रहा था, तभी एक आवारा कुत्ते ने अचानक हमला बोल दिया और बुरी तरह काट खाया। आसपास के लोगों ने किसी तरह उसे कुत्ते के चंगुल से छुड़ाया। घायल युवक को नागरिक अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाई।
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प्रशासन से सख्त कार्रवाई की गुहार
अंबाला सिटी निवासी निवासी रवि तनेजा, पियुष, मोहन मखीजा का कहना है कि कुत्तों के डर से बच्चों का खेलना और महिलाओं का सुबह-शाम अकेले घर से बाहर निकलना बंद हो गया है। कई बार प्रशासन से शिकायत के बावजूद धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखाई दे रही है। शहरवासियों ने जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों से जोरदार मांग की है कि इस गंभीर समस्या से जल्द से जल्द निजात दिलाई जाए, ताकि किसी बड़े हादसे को रोका जा सके।
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कुत्ताें के काटने के मामले
माह मामले
जनवरी 1209
फरवरी 1228
मार्च 1078
अप्रैल 1154
मई 1143
जून 1118
जुलाई 1089
अगस्त 743
सितंबर 813
अक्तूबर (अब तक) 361
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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद काकडू में आवारा कुत्तों के लिए शेल्टर और ऑपरेशन थिएटर बना दिया है। एजेंसी कुत्तों को पकड़ कर ला रही है, फिर उसका बधियाकरण किया जाता है। इसके बाद उसे आठ दिन तक वहीं ठीक किया जाता है। इसके बाद कुत्ते को उसी क्षेत्र में नियमानुसार छोड़ दिया जाता है।
- वीरेंद्र सहरावत, आयुक्त, नगर निगम।
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अंबाला सिटी। नागरिकों के लिए आवारा कुत्तों का आतंक किसी महामारी से कम नहीं बनता जा रहा है। शहर की हर गली, बाजार, सार्वजनिक स्थलों और रिहायशी इलाकों में कुत्तों का खौफ इस कदर हावी है कि लोगों का घर से बाहर निकलना दूभर हो गया है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अंबाला शहर में जनवरी से लेकर अक्तूबर तक मात्र 10 महीनों के भीतर आवारा कुत्तों ने कुल 9,956 लोगों को अपना शिकार बनाया है।
इनमें अकेले 885 पुरुषों को कुत्तों ने निशाना बनाया है। इसके अलावा, आवारा कुत्तों के हमलों में 382 महिलाएं और 347 मासूम बच्चे भी गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं। शहर की लगभग हर गली में 20 से 30 आवारा कुत्ते झुंड बनाकर घूम रहे हैं, जिससे विशेषकर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों में भारी दहशत का माहौल है। आए दिन सामने आ रहे इन मामलों ने नगर निगम और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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वीरवार सुबह आवारा कुत्तों ने मनमोहन नगर इलाके में एक युवक पर हमला कर दिया। युवक घर से रोज की तरह काम पर जा रहा था। जैसे ही वह गली से गुजर रहा था, तभी एक आवारा कुत्ते ने अचानक हमला बोल दिया और बुरी तरह काट खाया। आसपास के लोगों ने किसी तरह उसे कुत्ते के चंगुल से छुड़ाया। घायल युवक को नागरिक अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाई।
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प्रशासन से सख्त कार्रवाई की गुहार
अंबाला सिटी निवासी निवासी रवि तनेजा, पियुष, मोहन मखीजा का कहना है कि कुत्तों के डर से बच्चों का खेलना और महिलाओं का सुबह-शाम अकेले घर से बाहर निकलना बंद हो गया है। कई बार प्रशासन से शिकायत के बावजूद धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखाई दे रही है। शहरवासियों ने जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों से जोरदार मांग की है कि इस गंभीर समस्या से जल्द से जल्द निजात दिलाई जाए, ताकि किसी बड़े हादसे को रोका जा सके।
कुत्ताें के काटने के मामले
माह मामले
जनवरी 1209
फरवरी 1228
मार्च 1078
अप्रैल 1154
मई 1143
जून 1118
जुलाई 1089
अगस्त 743
सितंबर 813
अक्तूबर (अब तक) 361
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद काकडू में आवारा कुत्तों के लिए शेल्टर और ऑपरेशन थिएटर बना दिया है। एजेंसी कुत्तों को पकड़ कर ला रही है, फिर उसका बधियाकरण किया जाता है। इसके बाद उसे आठ दिन तक वहीं ठीक किया जाता है। इसके बाद कुत्ते को उसी क्षेत्र में नियमानुसार छोड़ दिया जाता है।
- वीरेंद्र सहरावत, आयुक्त, नगर निगम।

कुत्तों के काटने के बाद इंजेक्शन लगवाने को अपनी बारी का इंतजार करते पीड़ित। संवाद