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Ambala News: निम्न प्रदर्शन करने वाले स्कूलों को देना होगा जवाब

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 28 Sep 2024 04:30 AM IST
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Low performing schools will have to answer
अंबाला सिटी। मौलिक शिक्षा विभाग ने जिले के सभी 478 प्राइमरी स्कूलों को निपुण बनाने के लिए कमर कस ली है। इस संबंध में शुक्रवार को जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सुधीर कालड़ा के नेतृत्व में निपुण अंबाला टीम की बैठक का जिला शिक्षा सदन में आयोजन किया। बैठक में डाइट मोहड़ा प्रधानाचार्या रेनू गुप्ता, जिला पर्यवेक्षण टीम के सदस्यों, सभी खंड एफएलएन समन्वयकों और एबीआरसी ने भाग लिया।
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जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सुधीर कालड़ा ने इस संबंध में जिला स्तर पर बनाई योजना पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अब हर माह जिले के सभी 478 प्राइमरी स्कूलों का पर्यवेक्षण सुनिश्चित किया जाएगा और यदि कोई स्कूल फिर भी पर्यवेक्षण से रह जाता है तो उसकी जिम्मेदारी स्कूल मुखिया और एबीआरसी की होगी। जिन स्कूलों के लिए संकुल मुखिया और एबीआरसी दोनों के पद खाली हैं, उन स्कूलों की मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी अथवा खंड संसाधन समन्वयक की होगी।
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ऐसे स्कूलों में यह अधिकारी बीआरपी, जिला पर्यवेक्षण टीम के सदस्यों और स्वयं अपनी ओर से पर्यवेक्षण सुनिश्चित करेंगे। प्रत्येक खंड शिक्षा अधिकारी का यह लक्ष्य होना चाहिए कि हर माह में प्रत्येक स्कूल का कम से कम एक बार आवश्यक रूप से पर्यवेक्षण हो जाना चाहिए।
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डीईईओ कालड़ा ने कहा कि प्रत्येक खंड मुखिया खंड स्तर की निपुण बैठक के दौरान अपने सभी एबीआरसी से यह डाटा भी लेगा कि एबीआरसी को उसके किस-किस स्कूल में बीआरपी के मार्गदर्शन की आवश्यकता है और उस आधार पर उस विद्यालय में बीआरपी और एबीआरसी की संयुक्त विजिट के बारे में निर्देश जारी करेगा। आवश्यकता होने पर जिला पर्यवेक्षण टीम के सदस्य के साथ भी संयुक्त पर्यवेक्षण किया जाएगा।
पर्यवेक्षण रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि कौन सा स्कूल निम्न और कौन सा स्कूल उच्च प्रदर्शन कर रहा है। संकुल मुखिया की ओर से निम्न और उच्च प्रदर्शन करने वाले स्कूलों की सूची मास के पहले सप्ताह में खंड शिक्षा अधिकारी व जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के साथ सांझा की जाएगी। उच्च प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों को प्रशंसा पत्र और निम्न प्रर्दशन करने वालों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाएंगे।

निम्न और उच्च प्रदर्शन करने वाले स्कूलों की सूची बनाने का आधार यह होगा कि अध्यापक की ओर से शिक्षक संदर्शिका का प्रयोग किया जा रहा है अथवा नहीं, बच्चों की अभ्यास पुस्तिका का साप्ताहिक व सावधिक आंकलन किया जा रहा है या नहीं, बच्चों के प्रगति चार्ट को बच्चों की वास्तविक प्रगति के अनुसार भरा गया हैं या नहीं और शिक्षकों की ओर से शिक्षण के दौरान विषय संबंधी शिक्षण अधिगम सामग्री और प्रिंट-रिच वातावरण का प्रयोग किया गया है या नहीं।

डीईईओ ने बैठक के दौरान उन 32 स्कूलों की सूची भी सभी के साथ सांझा की, जिनमें पिछले 30 दिनों किसी भी मेंटर या अधिकारी की ओर से पर्यवेक्षण नहीं किया गया। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ने 30 सितंबर तक इन सभी स्कूलों का पर्यवेक्षण कर इनका मॉनिटरिंग डाटा निपुण मॉनिटरिंग ऐप पर अपलोड करने के निर्देश दिए।
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