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Ambala News: गुरुद्वारे श्री में नवाया शीश, दस्तारबंदी भी हुई

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 13 Oct 2024 03:35 AM IST
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Head bowed in Gurudwara Shri, turban was also tied
लखनौर साहिब गुरुद्वारा साहिब मेंदशहरे पर समागम में पहुंची संगत।
अंबाला सिटी। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के ननिहाल गुरुद्वारा श्री लखनौर साहिब में दशहरा पर्व पर मेले का आयोजन किया। इसमें हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और आसपास के कई गांवों की संगत ने गुरुद्वारा साहिब में माथा टेक कर मन्नतें मांगी।
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इस मौके पर संगत ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष माथा टेककर शीश नवाया। सुबह तड़के से संगत गुरुद्वारा साहिब में पहुंचनी शुरू हो गई थी और देर शाम तक संगत ने माथा टेका। गुरुद्वारा साहिब में समागम में कीर्तन जत्थों ने संगत को गुरुबाणी से निहाल किया। वहीं, वर्षों से चली रही दस्तारबंदी परंपरा के मुताबिक बच्चों की दस्तारबंदी भी कराई गई। संगतों के लिए अटूट लंगर भी बरताया गया। वहीं, अंबाला शहर विधायक निर्मल सिंह भी गुरुद्वारा साहिब में पहुंचे। उनको यहां पर सम्मानित भी किया गया।
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गुरु गोबिंद सिंह की यहीं हुई थी दस्तारबंदी
10वें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का लखनौर साहिब गांव में ननिहाल था। जब वह पटना से वापस पंजाब की तरफ जा रहे थे तो उस दौरान गुरु गोबिंद सिंह जी करीब छह महीने अंबाला में अपने ननिहाल गांव लखनौर साहिब में माता गुजरी कौर जी के साथ रुके थे। बताया जाता है कि गुरु गोबिंद सिंह उस दौरान करीब नौ वर्ष के थे। सिख धर्म के अनुसार भांजा की सबसे पहले दस्तारबंदी उसका मामा अपने हाथों से करता है। माता गुजरी कौर ने अपने बेटे गुरु गोबिंद सिंह जी की पहली दस्तारबंदी यहीं लखनौर साहिब में दशहरे वाले दिन करवाने का फैसला किया था। लखनौर साहिब में विधि-विधान के साथ उनके मामा कृपाल चंद ने दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी को सबसे पहले दस्तार पहनाई थी। तभी से इस आस्था से जोड़कर गुरुद्वारा लखनौर साहिब में दशहरा पर्व पर मेला आयोजित किया जाता है। मेले में बड़े उत्साह के साथ संगत पहुंचकर मन्नतें मांगती है। बच्चों की उनके परिजन लखनौर साहिब में दस्तारबंदी करते हैं। यहां परंपरा आज भी जारी है।

लखनौर साहिब गुरुद्वारा साहिब मेंदशहरे पर समागम में पहुंची संगत।

लखनौर साहिब गुरुद्वारा साहिब मेंदशहरे पर समागम में पहुंची संगत।

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