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Ambala News: पिता बोले- तूने मेरा संस्कार करना था तू अपना करा गया

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 26 Jan 2025 12:19 AM IST
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Father said- you had to perform my last rites, you performed your own
अंतिम संस्कार के समय शमशान घाट में विलाप करते हरबिलास के पिता सुरजीत सिंह। संवाद
नारायणगढ़। बसपा के प्रदेश सचिव हरबिलास रज्जू माजरा का शनिवार को उनके गांव में अंतिम संस्कार किया। इस दौरान वहां मौजूद हर किसी की आंखें थीं। इस घटना ने हरबिलास के पिता सुरजीत सिंह को तो तोड़ ही दिया।
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वे अपने बेटे का अंतिम संस्कार करने लड़खड़ाते कदमों से पहुंचे। इस दौरान उन्हें रिश्तेदार संभाल रहे थे। बेटे हरबिलास को चिता पर लेटा देख उनका कलेजा फटा जा रहा था। वह लोगों की मदद से चिता तक हिम्मत कर बढ़ते हैं और दाग देने से पहले फफक-फफक कर रोने लगते हैं। उनके मुंह से बेटे के लिए एक ही बात निकली कि रे मेरे बेटे तूने क्या किया। तुझे अपने हाथों से मेरा संस्कार करना था मगर तूने तो मेरे हाथों से अपना ही संस्कार करा दिया। हाय मेरा क्या हाेगा।
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इस बात को सुनकर हर कोई उनके गम में शामिल हो गया और लोगों की आंखों से आंसू गिरने लगे। लगभग शाम पांच बजे हरबिलास का पिता ने अंतिम संस्कार कर दिया।

संस्कार में पहुंचे हजारों, चार किमी तक जाम

हरबिलास के अंतिम दर्शन करने को हजारों लोगों की भीड़ रज्जू माजरा गांव में पहुंची थी। यहां आलम यह था कि करीब चार किलोमीटर तक गाड़ियों की जाम लगा दिखाई दिया। इसके साथ ही गांव के श्मशान स्थल पर पैर रखने की जगह नहीं थी। नारायणगढ़ से सढौरा रूट पर डेहर से लेकर बरसूमाजरा तक लगभग चार किलोमीटर तक जाम की स्थिति दिखाई दी। इस दौरान हर कोई हरबिलास के परोपकारी कार्यों को याद कर रहा था। इस दाैरान पूर्व विधायक अर्जुन सिंह, पूर्व विधायक रामपाल माजरा, पूर्व विधायक जसबीर मलौर, बसपा प्रदेश अध्यक्ष धर्मपाल तिगरा, सीएम नायब सैनी के भाई चंदन सैनी, पूर्व जिला परिषद के चेयरमैन सुरेंद्र राणा और भाजपा के पूर्व विधायक पवन सैनी उपस्थित रहे।
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गांव में किसी के घर नहीं जला चूल्हा

रज्जूमाजरा में शुक्रवार की रात काटना ग्रामीणों और हरबिलास के परिजनों के लिए भारी हो गया था। इस बात पर किसी को विश्वास ही नहीं हो रहा था कि हरबिलास की मौत हो गई है। शनिवार को हरबिलास का अंतिम संस्कार नहीं हो गया तब किसी भी घर का चूल्हा नहीं जला। वहीं दूसरी तरफ हरबिलास के परिजनों का रोरोकर बुरा हाल था। हरबिलास के बच्चों का भी बुरा हाल है। उन्हें परिजन बार-बार संभालने की कोशिश कर रहे थे।
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