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Ambala News: सेटेलाइट की नजर से दूर खेत में धधक रहे फाने
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अंबाला। छावनी से मुलाना जाते समय रास्ते में कालपी पड़ता है। यहां आपको खेतों में गेहूं के फाने जलते दिखाई देते हैं। यहां से लोग मुंह पर रुमाल बांधकर गुजरते नजर आए। इसके बाद आप सीएम नायब सिंह सैनी के गांव माजरा की तरफ बढ़ते हैं तो यहां दो-तीन जगह पर खेतों में गेहूं की कटाई के बाद फानों में आग मिली।
पेट्रोल पंप की भी नहीं परवाह
आसपास के लोगों से पूछने पर पता लगा कि उन्हें नहीं पता खेत में आग किसने लगाई। कुछ कहते हैं कि जमींदारों ने लगाई होगी। इतना ही नहीं जैसे-जैसे आप नारायणगढ़ की तरफ से अंबाला छावनी की तरफ बढ़ते हैं तो शहजादपुर के बाद आपको खेतों में सायं सात बजे आग धधकती दिखती है। यहां खेत के मालिक खुद ही खेतों में आग लगाते दिखाई देते हैं। इसके बाद गांव जटवाड़ से आगे बढ़ने पर पंजाब की सीमा पर चौकी के पास खेत में गेहूं के फानों को आग के हवाले कर दिया। यहां पास में ही पेट्रोल पंप भी है, अगर हवा से फाने उड़े तो आग भी घटना कभी भी हो सकती थी। जबकि इसके पास ही पंजाब पुलिस की पुलिस चौकी है।
कालपी से लेकर नारायणगढ़ और यहां से अंबाला छावनी तक कुल नौ स्थानों पर गेहूं के फानों में आग लगी नजर आई। हैरानी की बात तो यह है कि सेटेलाइट की निगरानी के बीच आग लग रही है मगर कोई नहीं पकड़ पा रहा है। कृषि विभाग के अनुसार रविवार को दो ही स्थानों पर आग को सेटेलाइट ने दर्ज किया है।
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कई मामले आए पकड़ में , कार्रवाई शून्य
कृषि विभाग हर साल धान और गेहूं के सीजन में खेतों में आग न लगे इसके लिए बड़े स्तर पर मॉनीटरिंग करता है। हरसेक की सेटेलाइट से यह मॉनीटरिंग की जाती है फिर कृषि अधिकारियों को भेजकर इस आग का सत्यापन कराया जाता है और खेतों में आग मिलने पर कार्रवाई का प्रावधान है। एक अप्रैल से लेकर पांच मई तक अभी तक करीब 21 स्थानों पर ही हरसेक सेटेलाइट ने आग पकड़ी है। मगर अभी तक एक खेत में भी कृषि विभाग को आग नहीं मिली। इसके साथ ही न ही अभी तक कोई कार्रवाई की गई। ऐसे में धड़ल्ले से खेतों में गेहूं के फानों को आग के हवाले किया जा रहा है।
सेटेलाइट से बचने का किसानों का तोड़
पड़ताल में सामने आया कि सुबह से लेकर दोपहर तीन बजे तक हरसेक की सेटेलाइट मॉनीटरिंग करती है। मगर इसके बाद सेटेलाइट मामलों को नहीं पकड़ पाती है। यही बात अब जमीदारों को भी समझ आ गई है और वह दोपहर तीन बजे से बाद अपने खेतों में गेहूं के फानों में आग लगा रहे हैं। इसका उदाहरण इसी बात से लगाया जा सकता है कि रविवार को सेटेलाइट ने सिर्फ दो ही जगह आग को पकड़ा। जबकि पड़ताल में कालपी से लेकर नारायणगढ़ और नारायणगढ़ से लेकर अंबाला छावनी तक कुल नौ स्थानों पर गेहूं के फानों में आग लगी मिली।
वर्जन
गेहूं के फानो में आग न लगे इसकी मॉनीटरिंग की जा रही है। सेटेलाइट से जो डाटा मिलता है उसको सत्यापित किया जा रहा है। अभी तक खेतों में आग नहीं मिली है। इस मामले को दिखवा लेते हैं।
-जसविंदर सिंह, डीडीए, कृषि और कल्याण विभाग
सेटेलाइट जब जहां से गुजरती है अगर वहां पर आग लगी है तो वह उसे पकड़ लेती है। इसके अलावा तो आग को चिह्नित करने का कोई विकल्प होता नहीं है।
-डॉ. वीएस आर्या, पूर्व निदेशक, हरसेक
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पेट्रोल पंप की भी नहीं परवाह
आसपास के लोगों से पूछने पर पता लगा कि उन्हें नहीं पता खेत में आग किसने लगाई। कुछ कहते हैं कि जमींदारों ने लगाई होगी। इतना ही नहीं जैसे-जैसे आप नारायणगढ़ की तरफ से अंबाला छावनी की तरफ बढ़ते हैं तो शहजादपुर के बाद आपको खेतों में सायं सात बजे आग धधकती दिखती है। यहां खेत के मालिक खुद ही खेतों में आग लगाते दिखाई देते हैं। इसके बाद गांव जटवाड़ से आगे बढ़ने पर पंजाब की सीमा पर चौकी के पास खेत में गेहूं के फानों को आग के हवाले कर दिया। यहां पास में ही पेट्रोल पंप भी है, अगर हवा से फाने उड़े तो आग भी घटना कभी भी हो सकती थी। जबकि इसके पास ही पंजाब पुलिस की पुलिस चौकी है।
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कालपी से लेकर नारायणगढ़ और यहां से अंबाला छावनी तक कुल नौ स्थानों पर गेहूं के फानों में आग लगी नजर आई। हैरानी की बात तो यह है कि सेटेलाइट की निगरानी के बीच आग लग रही है मगर कोई नहीं पकड़ पा रहा है। कृषि विभाग के अनुसार रविवार को दो ही स्थानों पर आग को सेटेलाइट ने दर्ज किया है।
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कई मामले आए पकड़ में , कार्रवाई शून्य
कृषि विभाग हर साल धान और गेहूं के सीजन में खेतों में आग न लगे इसके लिए बड़े स्तर पर मॉनीटरिंग करता है। हरसेक की सेटेलाइट से यह मॉनीटरिंग की जाती है फिर कृषि अधिकारियों को भेजकर इस आग का सत्यापन कराया जाता है और खेतों में आग मिलने पर कार्रवाई का प्रावधान है। एक अप्रैल से लेकर पांच मई तक अभी तक करीब 21 स्थानों पर ही हरसेक सेटेलाइट ने आग पकड़ी है। मगर अभी तक एक खेत में भी कृषि विभाग को आग नहीं मिली। इसके साथ ही न ही अभी तक कोई कार्रवाई की गई। ऐसे में धड़ल्ले से खेतों में गेहूं के फानों को आग के हवाले किया जा रहा है।
सेटेलाइट से बचने का किसानों का तोड़
पड़ताल में सामने आया कि सुबह से लेकर दोपहर तीन बजे तक हरसेक की सेटेलाइट मॉनीटरिंग करती है। मगर इसके बाद सेटेलाइट मामलों को नहीं पकड़ पाती है। यही बात अब जमीदारों को भी समझ आ गई है और वह दोपहर तीन बजे से बाद अपने खेतों में गेहूं के फानों में आग लगा रहे हैं। इसका उदाहरण इसी बात से लगाया जा सकता है कि रविवार को सेटेलाइट ने सिर्फ दो ही जगह आग को पकड़ा। जबकि पड़ताल में कालपी से लेकर नारायणगढ़ और नारायणगढ़ से लेकर अंबाला छावनी तक कुल नौ स्थानों पर गेहूं के फानों में आग लगी मिली।
वर्जन
गेहूं के फानो में आग न लगे इसकी मॉनीटरिंग की जा रही है। सेटेलाइट से जो डाटा मिलता है उसको सत्यापित किया जा रहा है। अभी तक खेतों में आग नहीं मिली है। इस मामले को दिखवा लेते हैं।
-जसविंदर सिंह, डीडीए, कृषि और कल्याण विभाग
सेटेलाइट जब जहां से गुजरती है अगर वहां पर आग लगी है तो वह उसे पकड़ लेती है। इसके अलावा तो आग को चिह्नित करने का कोई विकल्प होता नहीं है।
-डॉ. वीएस आर्या, पूर्व निदेशक, हरसेक

उर्मिला

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