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Ambala News: नागरिक अस्पतालों में फैक्टर-9 की दवा खत्म , बाहर भेजे जा रहे हीमोफीलिया के मरीज
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हीमोफीलिया मरीजों के लिए अंबाला कैंट के नागरिक अस्पताल की तीसरी मंजिल पर बना स्पेशल वार्ड: संवा
अंबाला। हीमोफीलिया जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए जिले में फैक्टर-9 दवा की कमी चल रही है। एक माह से जिले के नागरिक अस्पताल में यह दवा उपलब्ध नहीं है।
स्थिति यह बन गई है कि हीमोफीलिया-बी से ग्रस्त मरीजों को इस दवा की जरूरत पड़ने पर अंबाला कैंट के नागरिक अस्पताल से चंडीगढ़ भेजना पड़ रहा है। जबकि मरीज स्तर पर दूसरे जिलों में चक्कर काटने को मजबूर है। जिले में हीमोफीलिया मरीजों की संख्या 30 है, जबकि पिछले एक माह से 16-17 मरीज नियमित तौर पर उपचार के लिए आ रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन की तरफ से हर बार डिमांड भेजने की बात बोलकर पल्लाझाड़ लिया जाता है। फैक्टर न मिलने से मरीजों को दर्द सहन नहीं हो पाता है।
इन मरीजों का खुद ही रक्त बहने लगता है। ऐसे में इन्हें फैक्टर 8 और 9 के इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं, ताकि रक्त बहने से रुक जाए।
कुरुक्षेत्र तो कोई यमुनानगर में जाकर लगवा रहा दवा : स्वास्थ्य विभाग की इन अनदेखी का खामियाजा मरीजों के साथ-साथ उनके तीमारदारों को भी भुगतना पड़ रहा है। अस्पताल से तो मरीज को चंडीगढ़ पीजीआई भेज दिया जाता है। बाद में मरीजों ने आसपास के शहरों यानी यमुनानगर व कुरुक्षेत्र आदि के मरीजों से भी सोशल मीडिया के जरिये संपर्क साधा हुआ है। जो दोनों शहरों के नागरिक अस्पताल में इस फेक्टर-9 की उपलब्धता का पता लगाकर वहां जाकर लगवा रहे हैं। हीमोफीलिया बीमारी लड़कों में ज्यादा पाई जाती है। इन मरीजों को विशेष प्रोटीन की कमी होती है। इससे मरीज में खून का थक्का जमाने वाला प्रोटीन फैक्टर नहीं बनता। इसकी वजह से चोट लगने पर लगातार खून बहता रहता है।
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स्थिति यह बन गई है कि हीमोफीलिया-बी से ग्रस्त मरीजों को इस दवा की जरूरत पड़ने पर अंबाला कैंट के नागरिक अस्पताल से चंडीगढ़ भेजना पड़ रहा है। जबकि मरीज स्तर पर दूसरे जिलों में चक्कर काटने को मजबूर है। जिले में हीमोफीलिया मरीजों की संख्या 30 है, जबकि पिछले एक माह से 16-17 मरीज नियमित तौर पर उपचार के लिए आ रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन की तरफ से हर बार डिमांड भेजने की बात बोलकर पल्लाझाड़ लिया जाता है। फैक्टर न मिलने से मरीजों को दर्द सहन नहीं हो पाता है।
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इन मरीजों का खुद ही रक्त बहने लगता है। ऐसे में इन्हें फैक्टर 8 और 9 के इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं, ताकि रक्त बहने से रुक जाए।
कुरुक्षेत्र तो कोई यमुनानगर में जाकर लगवा रहा दवा : स्वास्थ्य विभाग की इन अनदेखी का खामियाजा मरीजों के साथ-साथ उनके तीमारदारों को भी भुगतना पड़ रहा है। अस्पताल से तो मरीज को चंडीगढ़ पीजीआई भेज दिया जाता है। बाद में मरीजों ने आसपास के शहरों यानी यमुनानगर व कुरुक्षेत्र आदि के मरीजों से भी सोशल मीडिया के जरिये संपर्क साधा हुआ है। जो दोनों शहरों के नागरिक अस्पताल में इस फेक्टर-9 की उपलब्धता का पता लगाकर वहां जाकर लगवा रहे हैं। हीमोफीलिया बीमारी लड़कों में ज्यादा पाई जाती है। इन मरीजों को विशेष प्रोटीन की कमी होती है। इससे मरीज में खून का थक्का जमाने वाला प्रोटीन फैक्टर नहीं बनता। इसकी वजह से चोट लगने पर लगातार खून बहता रहता है।
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