{"_id":"5f95df908ebc3e9bb9259de8","slug":"crime-ambala-news-knl48758492","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुरादाबाद से निकलने वाली गाड़ियां रहती थीं लाखन के निशाने पर, पहले भी कई वारदातों में है शामिल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुरादाबाद से निकलने वाली गाड़ियां रहती थीं लाखन के निशाने पर, पहले भी कई वारदातों में है शामिल
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अंबाला। मुरादाबाद से सहारनपुर और अंबाला में वारदात करना लाखन का पेशा बन चुका था। पहले भी लाखन गिरोह ट्रेनों में इस प्रकार की वारदातों को अंजाम देकर भोले-भाले यात्रियों का लाखों रुपये का सोना लेकर फरार हो चुका है। यह खुलासा गाजियाबाद जीआरपी थाने में दर्ज एफआईआर से सामने आया है।
सूत्रों से जानकारी मिली है कि मुरादाबाद सेक्शन में चलने वाली गाड़ियों में आपराधिक वारदातों को अंजाम देेने में लाखन मास्टरमाइंड है। उसकी पूरी जानकारी वहां के आरपीएफ व जीआरपी स्टाफ को अच्छी तरह से है। अंबाला आरपीएफ की सीआईबी टीम द्वारा किए गए 14 तोले सोना और 1.30 लाख रुपये के गोलमाल की गाज बेशक पोस्ट प्रभारी पर गिर गई है लेकिन असलियत यह पूरा खेल ही सीआईबी टीम का है। 20 सितंबर को घटना के दिन मुरादाबाद के 2 कर्मचारियों ने तुरंत इसकी जानकारी अंबाला सीआईबी टीम को दे दी थी। लाखन को पकड़ने के बाद भी सीआईबी टीम ने उसकी पूरी जानकारी आरपीएफ पोस्ट प्रभारी से छिपाई और सिर्फ रेलवे एक्ट में आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पूरा केस ही बदल दिया। पोस्ट प्रभारी श्याम सुंदर को भी जरा शक नहीं हुआ कि सीआईबी द्वार खेले जा रहे इस खेल की गाज उस पर गिर जाएगी और प्रभारी ने भी टीम पर विश्वास कर फोन लेना जरूरी नहीं समझा।
पोस्ट के किसी कर्मचारी को नहीं लाखन की पहचान
जांच में यह जानकारी सामने आई कि पूर्व सीआईबी अधिकारी व जीआरपी के कुछ कर्मचारी लाखन को बखूबी जानते हैं लेकिन अब छावनी आरपीएफ पोस्ट पर न तो कोई पुराना कर्मचारी है और न ही अधिकारी। न ही लाखन की कोई फोटो आरपीएफ पोस्ट पर है। इस वजह से चोरी के मास्टर माइंड को पहचानने में आरपीएफ पोस्ट की टीम चूक गई। सबसे बड़ा धोखा तो उनके साथ उनके ही साथियों ने ने किया है।
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सूत्रों से जानकारी मिली है कि मुरादाबाद सेक्शन में चलने वाली गाड़ियों में आपराधिक वारदातों को अंजाम देेने में लाखन मास्टरमाइंड है। उसकी पूरी जानकारी वहां के आरपीएफ व जीआरपी स्टाफ को अच्छी तरह से है। अंबाला आरपीएफ की सीआईबी टीम द्वारा किए गए 14 तोले सोना और 1.30 लाख रुपये के गोलमाल की गाज बेशक पोस्ट प्रभारी पर गिर गई है लेकिन असलियत यह पूरा खेल ही सीआईबी टीम का है। 20 सितंबर को घटना के दिन मुरादाबाद के 2 कर्मचारियों ने तुरंत इसकी जानकारी अंबाला सीआईबी टीम को दे दी थी। लाखन को पकड़ने के बाद भी सीआईबी टीम ने उसकी पूरी जानकारी आरपीएफ पोस्ट प्रभारी से छिपाई और सिर्फ रेलवे एक्ट में आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पूरा केस ही बदल दिया। पोस्ट प्रभारी श्याम सुंदर को भी जरा शक नहीं हुआ कि सीआईबी द्वार खेले जा रहे इस खेल की गाज उस पर गिर जाएगी और प्रभारी ने भी टीम पर विश्वास कर फोन लेना जरूरी नहीं समझा।
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पोस्ट के किसी कर्मचारी को नहीं लाखन की पहचान
जांच में यह जानकारी सामने आई कि पूर्व सीआईबी अधिकारी व जीआरपी के कुछ कर्मचारी लाखन को बखूबी जानते हैं लेकिन अब छावनी आरपीएफ पोस्ट पर न तो कोई पुराना कर्मचारी है और न ही अधिकारी। न ही लाखन की कोई फोटो आरपीएफ पोस्ट पर है। इस वजह से चोरी के मास्टर माइंड को पहचानने में आरपीएफ पोस्ट की टीम चूक गई। सबसे बड़ा धोखा तो उनके साथ उनके ही साथियों ने ने किया है।
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