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Ambala News: निगम की लापरवाही पड़ेगी भारी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 24 Jun 2023 12:03 AM IST
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Corporation's negligence will be heavy
अंबाला सिटी। अंबाला शहर में जलभराव हुआ तो नगर निगम प्रशासन पूरी तरह से जिम्मेदार होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि नगर निगम लगातार नालों की सफाई के लिए लापरवाही बरतता रहा और किसी ने इस पर संज्ञान तक नहीं लिया।
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इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नगर निगम ने नालों की सफाई के लिए 31 मई को टेंडर लगा दिया था। इनके पास पूरा एक महीना था, जिसमें वह नालों की सफाई करा सकते थे। हर साल अंबालावासी इस समस्या से लाखों रुपये का नुकसान कराते हैं। इस बार भी नगर निगम ने अपनी सुस्त कार्यप्रणाली से लोगों को फिर चिंता में डाल दिया है। हरियाणा में 30 जून को मानसून की बारिश का पूर्वानुमान है। ऐसे में अब नगर निगम के पास सात दिन का समय है और नालों की सफाई का कार्य तीन दिन पहले ही शुरू हुआ है। ऐसा तब है जब प्री मानसून ने हरियाणा में दस्तक दे दी है। अब सात दिनों में शहरभर के नाले साफ करने हैं, जोकि इतने कम समय में साफ करना मुश्किल हैं।
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वर्क ऑर्डर के इंतजार में अटका टेंडर

नगर निगम ने 31 मई को नालों की सफाई का टेंडर लग गया था। मगर 15 दिन तक इसका वर्क ऑर्डर भी नगर निगम के अफसरों ने जारी नहीं किया। इसके बाद नगर निगम कमिश्नर अंजू चौधरी अपनी ट्रेनिंग पूरी कर अंबाला आईं तो उन्होंने तत्काल वर्कआर्डर जारी किया। जबकि कमिश्नर की शक्तियां अगर आगे दी गई होती तो यह काम नहीं रुकता। हाल ही में जब अधिकारी नाले की सफाई कराने साजो सामान के साथ पहुंचे तो मामले में राजनीति हो गई। इसमें मेयर शक्तिरानी शर्मा ने भी नगर निगम अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। मगर इस सबमें अंबाला शहर के लोगों को डर सता रहा है कि कहीं मानसून की बारिश में उनके घरों में पानी न आ जाए।
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सफाई के टेंडर पर भी सवाल

नगर निगम ने जो सफाई का टेंडर लगाया है उस पर भी कुछ पार्षद सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले वर्ष सफाई का टेंडर करीब 90 लाख रुपये से अधिक के खर्चे पर हुआ था तो इस बार नगर निगम ने करीब 57 लाख रुपये में यह टेंडर कैसे लगा लिया। इसके साथ ही टेंडर में कई जानकारियों का जिक्र तक नहीं है कि नालों की सफाई होने के बाद गाद का क्या किया जाएगा। ऐसे में पार्षद इस मामले में भी जांच कराने की मांग कर रहे हैं।

ये कहते हैं शहर के पार्षद



जिस व्यक्ति को ठेका दिया है, उसमें ठेका की शर्तें नहीं बताई जा रही। ठेकेदार कितना समय काम करेगा यह भी स्पष्ट नहीं है। इसमें सेक्टरों के नाले भी शामिल हैं। सवाल ही नहीं होता कि यह मानसून आने तक एजेंसी सफाई कर ले। यह काम दो तीन एजेंसियों को दिया जाना चाहिए था। सेक्टर के लिए अलग, बाहरी सीमा के अलग-अलग एजेंसी को सफाई के टेंडर दिए जाने चाहिए थे। अब जनता को भुगतना होगा।
-संदीप सचदेवा, मनोनीत पार्षद


नगर निगम कमिश्नर नहीं थी, इस कारण से वर्कआर्डर में देरी हुई। अब अगर समय से नालों की सफाई हुई होती तो अब तक आधे से अधिक नाले साफ हो गए होते। अगर मानसून की बारिश आ गई तो गाद फिर से नाले में चली जाएगी।

विजय चौधरी, पार्षद





मैं प्रशिक्षण पर गई थी, इस कारण इसके वर्क ऑर्डर जारी करने में देरी हुई। मगर अब तेजी से कार्य कराया जा रहा है। ऐसे क्षेत्रों को चिह्नित किया है। जहां पर जलभराव होता है, वहां पहले सफाई कराई जाएगी। महाबीर पार्क के तालाब को भी खाली करा लिया है। चुनौती तो है, मगर कोशिश की जाएगी कि शहरवासी बाढ़ जैसी स्थिति से न जूझें।
-अंजू चौधरी, कमिश्नर, नगर निगम।
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