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पीवीसी बैनरों से तौबा, अब बायोडिग्रेडेबल फैब्रिक बढ़ाएंगे शोभा
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राजेश शांडिल्य
अंबाला। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की सख्ती एक जुलाई से बढ़ने वाली है, इसलिए व्यावसायिक गतिविधियों के प्रचार-प्रसार में आयोजक पीवीसी बैनर से तौबा कर रहे हैं। ऐसे में ब्रांडिंग आदि के लिए उपयोगी पीवीसी बैनरों की जगह अब बायोडीग्रेडेबल फैब्रिक पर बने बैनर ही कार्यक्रम व अन्य जगहों की शोभा बनेंगे।
इधर खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग हरियाणा ने मंगलवार से ही पीवीसी बैनर हटाकर डिजिटल और बायोडीग्रेडेबल फैब्रिक पर बैनर तैयार कराने का अहम निर्णय लिया है। बायोडीग्रेडेबल वह सामग्री है, जो कि कपड़े और कागज से तैयार होती है। इस सामग्री से बने बैनर पूरी तरह से पर्यावरण अनुकूल होते हैं। यह आसानी से 45 दिनों के भीतर अपने आप ही नष्ट होने की क्षमता रखते हैं।
बता दें कि एक जुलाई से एकबार उपयोग के बाद फेंकी जाने वाली प्लास्टिक की बोतलें, चम्मच, कप प्लेट, गिलास और कांटा इत्यादि के अलावा पीवीसी बैनरों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध की तैयारी है। इसके लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और जिला प्रशासन के साथ निगम-नप-नपा ने भी कमर कस ली है। हालांकि बायोडिग्रेडेबल सामग्री से बैनर तैयार करने के लिए अंबाला में अभी बहुत कम यूनिट हैं, लेकिन कुछ यूनिट ऐसी हैं, जहां यह बैनर तैयार कराए जा सकते हैं। जानकारी के अनुसार अंबाला में करीब 40 से ज्यादा ऐसी यूनिट हैं जहां पीवीसी बैनर बनाए जाते हैं, लेकिन इनमें से महज 5 से 7 प्रतिशत ऐसी यूनिट हैं, जोकि बायोडीग्रेडेबल फैब्रिक पर बैनर तैयार करने में सक्षम हैं।
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खादी के प्रदेश कार्यालय ने हटवाए पीवीसी बैनर
पीवीसी का बैनर उतारने की पहल अंबाला कैंट स्थित खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग ने की है। दरअसल देशभर में 27 जून से 3 जुलाई तक खादी और ग्रामोद्योग आयोग की ओर से एमएसएमई वीक यानी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम सप्ताह मनाया जा रहा है। स्वदेशी वस्तुओं के बड़े उत्पादक केवीआईसी दिल्ली ने इस कार्यक्रम की ब्रांडिंग एवं प्रचार प्रसार सामग्री अंग्रेजी भाषा में तैयार कराकर भेजी है, ताकि इसका उपयोग मंच पर किया जा सके। अमर उजाला ने अंग्रेजी भाषा में तैयार किए गए प्रतिबंधित पीवीसी बैनर का मुद्दा आयोग के उच्चाधिकारी आई जवाहर के समक्ष रखा था। इसके बाद अंबाला कैंट स्थित खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग की ओर से इस दिशा में पहल की गई है।
अंग्रेजी भाषा में प्रिंट बैनर हटे, हिंदी को मिली जगह
खादी और ग्रामोद्योग आयोग हरियाणा के निदेशक आई जवाहर ने केवीआईसी दिल्ली द्वारा भेजे गए अंग्रेजी में प्रिंट प्रतिबंधित पीवीसी बैनर हटाने के निर्देश देने के साथ मंगलवार के आयोजन के लिए हिंदी भाषा में डिजिटल मैटर और दूसरे बैनर तैयार कराने के निर्देश दिए हैं। इसकी पुष्टि खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के तकनीकी विशेषज्ञ अमित चोपड़ा ने की है। उन्होंने बताया कि अन्य बैनर बायोडिग्रेडेबल सामग्री पर ही प्रिंट कराए जाएंगे।
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अंबाला। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की सख्ती एक जुलाई से बढ़ने वाली है, इसलिए व्यावसायिक गतिविधियों के प्रचार-प्रसार में आयोजक पीवीसी बैनर से तौबा कर रहे हैं। ऐसे में ब्रांडिंग आदि के लिए उपयोगी पीवीसी बैनरों की जगह अब बायोडीग्रेडेबल फैब्रिक पर बने बैनर ही कार्यक्रम व अन्य जगहों की शोभा बनेंगे।
इधर खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग हरियाणा ने मंगलवार से ही पीवीसी बैनर हटाकर डिजिटल और बायोडीग्रेडेबल फैब्रिक पर बैनर तैयार कराने का अहम निर्णय लिया है। बायोडीग्रेडेबल वह सामग्री है, जो कि कपड़े और कागज से तैयार होती है। इस सामग्री से बने बैनर पूरी तरह से पर्यावरण अनुकूल होते हैं। यह आसानी से 45 दिनों के भीतर अपने आप ही नष्ट होने की क्षमता रखते हैं।
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बता दें कि एक जुलाई से एकबार उपयोग के बाद फेंकी जाने वाली प्लास्टिक की बोतलें, चम्मच, कप प्लेट, गिलास और कांटा इत्यादि के अलावा पीवीसी बैनरों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध की तैयारी है। इसके लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और जिला प्रशासन के साथ निगम-नप-नपा ने भी कमर कस ली है। हालांकि बायोडिग्रेडेबल सामग्री से बैनर तैयार करने के लिए अंबाला में अभी बहुत कम यूनिट हैं, लेकिन कुछ यूनिट ऐसी हैं, जहां यह बैनर तैयार कराए जा सकते हैं। जानकारी के अनुसार अंबाला में करीब 40 से ज्यादा ऐसी यूनिट हैं जहां पीवीसी बैनर बनाए जाते हैं, लेकिन इनमें से महज 5 से 7 प्रतिशत ऐसी यूनिट हैं, जोकि बायोडीग्रेडेबल फैब्रिक पर बैनर तैयार करने में सक्षम हैं।
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खादी के प्रदेश कार्यालय ने हटवाए पीवीसी बैनर
पीवीसी का बैनर उतारने की पहल अंबाला कैंट स्थित खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग ने की है। दरअसल देशभर में 27 जून से 3 जुलाई तक खादी और ग्रामोद्योग आयोग की ओर से एमएसएमई वीक यानी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम सप्ताह मनाया जा रहा है। स्वदेशी वस्तुओं के बड़े उत्पादक केवीआईसी दिल्ली ने इस कार्यक्रम की ब्रांडिंग एवं प्रचार प्रसार सामग्री अंग्रेजी भाषा में तैयार कराकर भेजी है, ताकि इसका उपयोग मंच पर किया जा सके। अमर उजाला ने अंग्रेजी भाषा में तैयार किए गए प्रतिबंधित पीवीसी बैनर का मुद्दा आयोग के उच्चाधिकारी आई जवाहर के समक्ष रखा था। इसके बाद अंबाला कैंट स्थित खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग की ओर से इस दिशा में पहल की गई है।
अंग्रेजी भाषा में प्रिंट बैनर हटे, हिंदी को मिली जगह
खादी और ग्रामोद्योग आयोग हरियाणा के निदेशक आई जवाहर ने केवीआईसी दिल्ली द्वारा भेजे गए अंग्रेजी में प्रिंट प्रतिबंधित पीवीसी बैनर हटाने के निर्देश देने के साथ मंगलवार के आयोजन के लिए हिंदी भाषा में डिजिटल मैटर और दूसरे बैनर तैयार कराने के निर्देश दिए हैं। इसकी पुष्टि खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के तकनीकी विशेषज्ञ अमित चोपड़ा ने की है। उन्होंने बताया कि अन्य बैनर बायोडिग्रेडेबल सामग्री पर ही प्रिंट कराए जाएंगे।