{"_id":"68718826cd6aa54917096a64","slug":"approval-given-to-special-institute-for-handicapped-children-ambala-news-c-36-1-ame1006-145887-2025-07-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambala News: दिव्यांग बच्चों के विशेष संस्थान को मिली मंजूरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambala News: दिव्यांग बच्चों के विशेष संस्थान को मिली मंजूरी
Sat, 12 Jul 2025 03:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Sat, 12 Jul 2025 03:24 AM IST
विज्ञापन
अंबाला सिटी। जिला प्रशासन और बाल कल्याण समिति के सहयोग से बेसहारा दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूट (एससीसीआई) को शुक्रवार को मंजूरी मिल गई है। संस्थान में बेसहारा हुए दिव्यांग बच्चों को रहने खाने और पढ़ने की व्यवस्था रहेगी। जिसके लिए संस्थान को ही शुरू में खर्च उठाना होगा। हालांकि विभाग द्वारा सामाजिक संस्थाओं के जरिये संस्थान को आर्थिक मदद व अन्य संसाधनों को जुटाने के लिए मदद दिलवाई जाएगी। मंजूरी मिलने के बाद अब जल्द ही बच्चों को भेजना शुरू कर दिया गया है। फिलहाल संस्थान में एक ही बच्चा मिला है।
सुविधा बढ़ाने के लिए शुरू होगा कार्य
बाल कल्याण समिति को दिव्यांग बच्चे मिलते हैं। जिन्हें आश्रम में ही निवास दिया जाता है। मगर इन आश्रमों में रहने की व्यवस्था तो रहती है मगर बच्चों को पढ़ने के लिए कोई सुविधा नहीं मिलती। इसलिए यह कदम उठाया गया है। इसके लिए विभाग के पास विशेष एजुकेटर भी हैं। जो बच्चों को पढ़ाने का कार्य करेंगे।
तीन वर्ष के बाद मिलेगी ग्रांट
जिला बाल कल्याण समिति की चेयरपर्सन रंजीता सचदेवा ने बताया कि तीन वर्षों तक निजी संस्थानों को अपने स्तर पर ही यह इंस्टीट्यूट चलाना होगा। इसके बाद विभाग की ओर से प्रमाणित होने के बाद ग्रांट दी जाएगी। इस समय अवधी के दौरान विभाग की टीमें समय- समय पर व्यवस्थाओं का जायजा भी लेंगी। इसी आधार पर प्रमाणित होने के नंबर दिए जांएगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
सुविधा बढ़ाने के लिए शुरू होगा कार्य
बाल कल्याण समिति को दिव्यांग बच्चे मिलते हैं। जिन्हें आश्रम में ही निवास दिया जाता है। मगर इन आश्रमों में रहने की व्यवस्था तो रहती है मगर बच्चों को पढ़ने के लिए कोई सुविधा नहीं मिलती। इसलिए यह कदम उठाया गया है। इसके लिए विभाग के पास विशेष एजुकेटर भी हैं। जो बच्चों को पढ़ाने का कार्य करेंगे।
विज्ञापन
तीन वर्ष के बाद मिलेगी ग्रांट
जिला बाल कल्याण समिति की चेयरपर्सन रंजीता सचदेवा ने बताया कि तीन वर्षों तक निजी संस्थानों को अपने स्तर पर ही यह इंस्टीट्यूट चलाना होगा। इसके बाद विभाग की ओर से प्रमाणित होने के बाद ग्रांट दी जाएगी। इस समय अवधी के दौरान विभाग की टीमें समय- समय पर व्यवस्थाओं का जायजा भी लेंगी। इसी आधार पर प्रमाणित होने के नंबर दिए जांएगे।
विज्ञापन