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मुनाफे के खेल ने बढ़ाई पुलिस की चुनौती, युवा वर्ग टारगेट पर
Updated Thu, 23 Aug 2018 01:05 AM IST
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मुनाफे के खेल ने बढ़ाई पुलिस की चुनौती, युवा वर्ग टारगेट पर
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। नशे के तौर पर इस्तेमाल होने वाली दवाइयों का रैकेट तोड़ने में पुलिस के पसीने छूट रहे हैं। इस गोरखधंधे से जुड़े लोगों ने मोटे मुनाफे के चक्कर में पुलिस की चुनौती को बढ़ा दिया है। हरियाणा के साथ लगते राज्यों से सप्लाई होने वाला यह नशा अब युवाओं को बुरी तरह से अपनी जकड़ में ले रहा है। पुलिस मामला दर्ज करने के बाद कार्रवाई कर रही है, लेकिन इस रैकेट को तोड़ना पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है। बीते चार माह में करीब आधा दर्जन केस सामने आ चुके हैं, जबकि इसके बावजूद यह गोरखधंधा लगातार बढ़ रहा है।
यह है स्थिति
अंबाला में बिना बिल की दवाइयों (जिनका इस्तेमाल नशे के तौर पर होता है) का गोरखधंधा खूब फलफूल रहा है। एलप्राजोलाम व स्पासमोप्रोक्सीवन की स्ट्रिप रिटेल में नौ से बारह रुपये तक मिलती है। इन दवाओं की तस्करी करके मेरठ, मुजफ्फरनगर, दिल्ली से अंबाला तक लाया जाता है, जबकि पूर्व में पकड़े गए तस्करों ने रिमांड के दौरान यह माना भी है। रिटेल में इन दवाओं की जो कीमत है, अनलाइसेंस्ड विक्रेता (जो अवैध रूप से बेचते हैं, केमिस्ट नहीं) इनको सौ से सवा सौ रुपये प्रति स्ट्रिप बेचते हैं। तस्करों की यह पहली पसंद बनता जा रहा है कि एक छोटे से बैग में ही हजारों रुपये की दवा भरकर आसानी से अंबाला पहुंचाई जाती हैं।
चार माह में आधा दर्जन केस पकड़े
अवैध रूप से इन दवाओं को बेचने के गोरखधंधे में जिला औषधि नियंत्रण विभाग द्वारा करीब आधा दर्जन मामले बीते चार माह में सामने आ चुके हैं। इनसे हजारों कैप्सूल और गोलियां बरामद हुईं हैं, जिनका इस्तेमाल नशे के तौर पर किया जाता है। पुलिस ने इसकी पुष्टि औषधि नियंत्रण विभाग से भी की है। पुलिस ने यह मामले नन्हेड़ा, रंगिया मंडी, बराड़ा से काबू किए गए हैं। इसके अलावा कैंट, सिटी नारायणगढ़, साहा, बराड़ा, मुलाना, शहजादपुर में भी यह कारोबार अपनी जड़ें जमा चुका है।
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हमारा विभाग लाइसेंस्ड यानी केमिस्ट शॉप को चेक कर सकता है कि वहां पर इन दवाओं की नशे के लिए बिक्री तो नहीं हो रही। इसके अलावा पुलिस भी यदि ऐसा मामला पकड़ती है (जो घरों आदि से इन दवाओं को बेचते हैं) तो एनडीपीएस एक्ट में मामला दर्ज होता है, जिसमें दवाओं की पुष्टि विभाग करता है।
-रिपन मेहता, सीनियर ड्रग कंट्रोल ऑफिसर।
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यदि कहीं पर भी नशे की बिक्री किसी भी रूप में होती है, तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए कमेटी बनाई गई है, जो ऐसे मामलों पर नजर रखेगी। जिसकी भी संलिप्तता पाई जाती है, उस पर कार्रवाई होगी।
-अशोक कुमार, एसपी, अंबाला।
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। नशे के तौर पर इस्तेमाल होने वाली दवाइयों का रैकेट तोड़ने में पुलिस के पसीने छूट रहे हैं। इस गोरखधंधे से जुड़े लोगों ने मोटे मुनाफे के चक्कर में पुलिस की चुनौती को बढ़ा दिया है। हरियाणा के साथ लगते राज्यों से सप्लाई होने वाला यह नशा अब युवाओं को बुरी तरह से अपनी जकड़ में ले रहा है। पुलिस मामला दर्ज करने के बाद कार्रवाई कर रही है, लेकिन इस रैकेट को तोड़ना पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है। बीते चार माह में करीब आधा दर्जन केस सामने आ चुके हैं, जबकि इसके बावजूद यह गोरखधंधा लगातार बढ़ रहा है।
यह है स्थिति
अंबाला में बिना बिल की दवाइयों (जिनका इस्तेमाल नशे के तौर पर होता है) का गोरखधंधा खूब फलफूल रहा है। एलप्राजोलाम व स्पासमोप्रोक्सीवन की स्ट्रिप रिटेल में नौ से बारह रुपये तक मिलती है। इन दवाओं की तस्करी करके मेरठ, मुजफ्फरनगर, दिल्ली से अंबाला तक लाया जाता है, जबकि पूर्व में पकड़े गए तस्करों ने रिमांड के दौरान यह माना भी है। रिटेल में इन दवाओं की जो कीमत है, अनलाइसेंस्ड विक्रेता (जो अवैध रूप से बेचते हैं, केमिस्ट नहीं) इनको सौ से सवा सौ रुपये प्रति स्ट्रिप बेचते हैं। तस्करों की यह पहली पसंद बनता जा रहा है कि एक छोटे से बैग में ही हजारों रुपये की दवा भरकर आसानी से अंबाला पहुंचाई जाती हैं।
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चार माह में आधा दर्जन केस पकड़े
अवैध रूप से इन दवाओं को बेचने के गोरखधंधे में जिला औषधि नियंत्रण विभाग द्वारा करीब आधा दर्जन मामले बीते चार माह में सामने आ चुके हैं। इनसे हजारों कैप्सूल और गोलियां बरामद हुईं हैं, जिनका इस्तेमाल नशे के तौर पर किया जाता है। पुलिस ने इसकी पुष्टि औषधि नियंत्रण विभाग से भी की है। पुलिस ने यह मामले नन्हेड़ा, रंगिया मंडी, बराड़ा से काबू किए गए हैं। इसके अलावा कैंट, सिटी नारायणगढ़, साहा, बराड़ा, मुलाना, शहजादपुर में भी यह कारोबार अपनी जड़ें जमा चुका है।
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हमारा विभाग लाइसेंस्ड यानी केमिस्ट शॉप को चेक कर सकता है कि वहां पर इन दवाओं की नशे के लिए बिक्री तो नहीं हो रही। इसके अलावा पुलिस भी यदि ऐसा मामला पकड़ती है (जो घरों आदि से इन दवाओं को बेचते हैं) तो एनडीपीएस एक्ट में मामला दर्ज होता है, जिसमें दवाओं की पुष्टि विभाग करता है।
-रिपन मेहता, सीनियर ड्रग कंट्रोल ऑफिसर।
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यदि कहीं पर भी नशे की बिक्री किसी भी रूप में होती है, तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए कमेटी बनाई गई है, जो ऐसे मामलों पर नजर रखेगी। जिसकी भी संलिप्तता पाई जाती है, उस पर कार्रवाई होगी।
-अशोक कुमार, एसपी, अंबाला।