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Ambala News: लघु सचिवालय के लिए 33.99 करोड़ रुपये जारी
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माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। लघु सचिवालय परिसर में प्रशासनिक ब्लॉक (फेस-3) के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। मुख्यमंत्री की घोषणा (कोड नं. 12646, दिनांक 28.05.2016) के तहत इस महत्वपूर्ण परियोजना के बचे हुए कार्यों को गति देने के लिए लोक निर्माण विभाग ने पत्र जारी कर दिया है। परियोजना पर 33,99,79,227 की लागत आएगी।
वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अंबाला में लघु सचिवालय बनाने की सौगात दी थी। मगर 10 वर्ष बीत जाने के बाद भी यह परियोजना पूरी नहीं हो सकी। जिस एजेंसी को काम दिया गया, उसने काम बीच में छोड़ दिया। मामला काेर्ट में चला गया था। तब से लघु सचिवालय का ढांचा खराब हाे रहा था।
इस कार्य के लिए 34,57,53,307 रुपये की डीएनआईटी स्वीकृत की गई थी। ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के तहत दूसरी कॉल में पंचकूला की एजेंसी एमएसएटी कंस्ट्रक्शंस ने सबसे कम बोली लगाई थी। शुरुआती दरें अधिक होने के कारण मामला उच्च स्तर पर नेगोशिएशन के लिए भेजा गया।
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मुख्यमंत्री हरियाणा की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक और मोलभाव के बाद दरों को घटाकर प्रतिस्पर्धी और तर्कसंगत बनाया गया। इसके तहत एचएसआर आइटम्स पर दरें घटाकर -1.670% कर दी गईं, जिससे शासन को वित्तीय राहत मिली है।
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अंबाला सिटी। लघु सचिवालय परिसर में प्रशासनिक ब्लॉक (फेस-3) के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। मुख्यमंत्री की घोषणा (कोड नं. 12646, दिनांक 28.05.2016) के तहत इस महत्वपूर्ण परियोजना के बचे हुए कार्यों को गति देने के लिए लोक निर्माण विभाग ने पत्र जारी कर दिया है। परियोजना पर 33,99,79,227 की लागत आएगी।
वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अंबाला में लघु सचिवालय बनाने की सौगात दी थी। मगर 10 वर्ष बीत जाने के बाद भी यह परियोजना पूरी नहीं हो सकी। जिस एजेंसी को काम दिया गया, उसने काम बीच में छोड़ दिया। मामला काेर्ट में चला गया था। तब से लघु सचिवालय का ढांचा खराब हाे रहा था।
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इस कार्य के लिए 34,57,53,307 रुपये की डीएनआईटी स्वीकृत की गई थी। ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के तहत दूसरी कॉल में पंचकूला की एजेंसी एमएसएटी कंस्ट्रक्शंस ने सबसे कम बोली लगाई थी। शुरुआती दरें अधिक होने के कारण मामला उच्च स्तर पर नेगोशिएशन के लिए भेजा गया।
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मुख्यमंत्री हरियाणा की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक और मोलभाव के बाद दरों को घटाकर प्रतिस्पर्धी और तर्कसंगत बनाया गया। इसके तहत एचएसआर आइटम्स पर दरें घटाकर -1.670% कर दी गईं, जिससे शासन को वित्तीय राहत मिली है।