फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Ambala News ›   दशकों बीते, आज भी %का्ी पलाटूरन’ का नाम जुबां पर

दशकों बीते, आज भी %का्ी पलाटूरन’ का नाम जुबां पर

Mon, 07 Jan 2019 12:29 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 07 Jan 2019 12:29 AM IST
विज्ञापन
दशकों बीते, आज भी %का्ी पलाटूरन’ का नाम जुबां पर
फोटो नंबर : 2, 5 व 6
विज्ञापन

‘काली प्लाटून’ अपमान भरा शब्द, पुल का नाम बदला जाए
जीटी रोड और रेलवे ट्रैक के ऊपर स्थित ब्रिज को आज भी बुलाते हैं काली प्लाटून पुल
अंग्रेजों के समय ब्रिटिश सेना में भारत के सैनिक रहते थे पुल के दूसरी तरफ
भारतीय सैनिकों को काले सैनिक कहकर बुलाते थे, और उनकी बैरक तक जाने के लिए इस ब्रिज को काली प्लाटून पुल की दी गई थी संज्ञा
रमिंद्र सिंह
अंबाला कैंट। ब्रिटिश हुकूमत को समाप्त हुए दशकों बीत गए। आजाद भारत की छलांग आज अंतरिक्ष तक पहुंच गई है, मगर अंग्रेजों के समय जो कटाक्ष भारतीय सैनिकों को किया जाता था, उसे आज भी अंबाला में सुना जा सकता है। ‘काली प्लाटून’ एक अपमान भरा शब्द है जोकि अंबाला में जीवंत है। ब्रिटिश हुकूमत के समय भारतीय सेना रेलवे पुल के दूसरे छोर पर अलग बैरकों में रहती थी। इसी पुल को अंग्रेजों द्वारा काली प्लाटून पुल का नाम दिया गया था, क्योंकि यह रास्ता भारतीय सैनिकों की बैरकों तक जाता था। भारतीय सैनिकों को उस समय काले सैनिक कहकर पुकारा जाता था। काली प्लाटून पुल को कुछ दिन पहले ही नया बनाकर खोला गया है, अब मांग उठने लगी है कि पुल का नाम बदला जाए ताकि अंग्रेजों के समय से चल रहे नाम यहां खत्म हों।
अलग-अलग बैरकों में रहते थे सैनिक
रेलवे लाइन के दूसरी ओर भारतीय सैनिकों की बैरकें अंग्रेजी हुकूमत के समय हुआ करती थीं। यहां पर आने-जाने के लिए एकमात्र रास्ता यह पुल था और इसी वजह से इस पुल को काली प्लाटून का नाम अंग्रेजों द्वारा दिया गया था। पुल का एक हिस्सा रेलवे के अधीन है जबकि दूसरा नेशनल हाईवे के। हालांकि किताबों में ऐसा कोई नाम दर्ज नहीं है, मगर इस पुल का यही नाम पहले प्रचलित था जोकि आज भी अंबाला के निवासियों की जुबां पर है। पुल के दोनों तरफ सेना क्षेत्र लगता है और सेना या कैंटोनमेंट बोर्ड चाहे तो इसका नाम कुछ ओर रखा जा सकता है।
विज्ञापन

पूर्व में भी बदले गए कई सड़कों के नाम
अंबाला में अंग्रेजी सेना थी जिस कारण उनके नाम से सड़कें एवं कई अन्य प्रतिष्ठान यहां पर थे। पूर्व में एलेक्जेंडरा रोड का नाम बदलकर जवाहर लाल नेहरू मार्ग, माल रोड का नाम बदलकर महात्मा गांधी मार्ग, स्टाफ रोड का सरदार पटेल मार्ग, रेसकोर्स रोड का एयर मार्शल मुखर्जी मार्ग, इसी तरह नेपियर रोड का नाम बदलकर विवेकानंद मार्ग रखा गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

बदला जाए काली प्लाटून पुल का नाम : मुलतानी
एक्स सर्विसमैन वेलफेयर कमेटी के अध्यक्ष एवं रिटायर्ड सूबेदार अतर सिंह मुलतानी ने कहा कि ब्रिटिश हुकूमत के समय ब्रिटिश सैनिक भारतीय फौजियों को काले लोग कहकर पुकारते थे। उनकी बैरक तक जाने के लिए पुल से होकर जाना पड़ता था जिस वजह से पुल को काली प्लाटून नाम दिया गया। यह नाम भारतीय सैनिकों के अपमान के बराबर है। इसका नाम कुछ ओर होना चाहिए।
पुल को दूसरा नाम देने की प्रक्रिया शुरू हो : आरडी सिंह
ऐतिहासिक धरोहरों के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने वाली संस्था इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरीटेज के अंबाला में कन्वीनर एवं रिटायर्ड कर्नल आरडी सिंह कहते हैं कि अंबाला में कई ऐसे नाम हैं जोकि अंग्रेजों की देन हैं, इन्हें बदलना चाहिए। काली प्लाटून का नाम भारतीय सेना को अंग्रेजों ने दिया था जोकि ठीक नहीं है। यह नाम बदलने की प्रक्रिया शीघ्र शुरू होनी चाहिए।

(फोटो नंबर : 1)
पुल का हिस्सा अब भी क्षतिग्रस्त
अक्तूबर से जर्जर हुए काली प्लाटून पुल की अप्रोच रोड का हिस्सा अब भी जर्जर पड़ा है। इसे ठीक करने के लिए रेलवे द्वारा कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। हिस्सा जर्जर होने के कारण सेना एवं अन्य वाहन चालकों को प्रतिदिन लंबा चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ रहा है। बता दें कि अक्तूबर में पुल का हिस्सा धंस गया था जिसके बाद इसको बंद कर दिया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed