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Ambala News: बस अड्डे पर धूल फांक रही 10 नई इलेक्ट्रिक बसें
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अंबाला सिटी बस अड्डा परिसर में खड़ी नई इलेक्ट्रिक बसें। संवाद
- फोटो : Archive
कागजी औपचारिकताएं पूरी न होने के कारण अब तक मार्गों पर नहीं हो पाया संचालन
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। डिपो में पहुंची दस इलेक्ट्रिक बसें दस दिन से अधिक समय से खड़ी हैं। परिवहन विभाग की लापरवाही के कारण अभी तक इनका पंजीकरण और बीमा नहीं हो पाया है। करोड़ों रुपये की लागत वाली ये पर्यावरण-अनुकूल बसें परिसर में धूल फांक रही हैं।
अंबाला में पहले से ही पच्चीस इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं। ये बसें कालका, बद्दी, पंचकूला, यमुनानगर, नारायणगढ़, बराड़ा, अंबाला सिटी और अंबाला कैंट जैसे मार्गों पर चलती हैं। इनसे रोजाना यात्री सुगम और आरामदायक सफर का लाभ उठा रहे हैं। इसके बावजूद, नई दस बसों के संचालन में देरी हो रही है। जब डिपो में पहले से इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा है, तो नई बसों के दस्तावेज पहले से तैयार न रखना बड़ी लापरवाही है।
परिवहन विभाग की लेट लतीफी के कारण बसों के पंजीकरण और बीमा जैसे जरूरी दस्तावेज तैयार नहीं हो पाए हैं। इन करोड़ों रुपये की बसों को डिपो में पहुंचे दस दिन से अधिक हो चुके हैं। ये बसें परिसर में खड़ी केवल धूल फांक रही हैं। इस देरी से जनता को मिलने वाली सुविधा में अनावश्यक विलंब हो रहा है। यह विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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मौजूदा बेड़ा और नई बसों की जरूरत
अंबाला में पहले से पच्चीस इलेक्ट्रिक बसें सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं। ये बसें विभिन्न मार्गों पर यात्रियों को आरामदायक यात्रा प्रदान करती हैं। नई दस बसें इस बेड़े को और मजबूत करने के लिए लाई गई हैं। हालांकि, इनके संचालन में हो रही देरी से सरकार के इलेक्ट्रिक वाहन प्रोत्साहन के प्रयासों को झटका लग रहा है। तैयार बेड़े का उपयोग न होना प्रदूषण नियंत्रण के लक्ष्यों के विपरीत है।
बसों के पंजीकरण और परमिट से जुड़ी औपचारिकताएं लगभग पूरी हो चुकी हैं। विभागीय प्रक्रिया के अंतिम चरण के बाद इन सभी बसों को मार्गों पर उतारा जाएगा।
- परविंद्र सिंह, इंचार्ज यातायात ब्रांच, अंबाला
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। डिपो में पहुंची दस इलेक्ट्रिक बसें दस दिन से अधिक समय से खड़ी हैं। परिवहन विभाग की लापरवाही के कारण अभी तक इनका पंजीकरण और बीमा नहीं हो पाया है। करोड़ों रुपये की लागत वाली ये पर्यावरण-अनुकूल बसें परिसर में धूल फांक रही हैं।
अंबाला में पहले से ही पच्चीस इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं। ये बसें कालका, बद्दी, पंचकूला, यमुनानगर, नारायणगढ़, बराड़ा, अंबाला सिटी और अंबाला कैंट जैसे मार्गों पर चलती हैं। इनसे रोजाना यात्री सुगम और आरामदायक सफर का लाभ उठा रहे हैं। इसके बावजूद, नई दस बसों के संचालन में देरी हो रही है। जब डिपो में पहले से इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा है, तो नई बसों के दस्तावेज पहले से तैयार न रखना बड़ी लापरवाही है।
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परिवहन विभाग की लेट लतीफी के कारण बसों के पंजीकरण और बीमा जैसे जरूरी दस्तावेज तैयार नहीं हो पाए हैं। इन करोड़ों रुपये की बसों को डिपो में पहुंचे दस दिन से अधिक हो चुके हैं। ये बसें परिसर में खड़ी केवल धूल फांक रही हैं। इस देरी से जनता को मिलने वाली सुविधा में अनावश्यक विलंब हो रहा है। यह विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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मौजूदा बेड़ा और नई बसों की जरूरत
अंबाला में पहले से पच्चीस इलेक्ट्रिक बसें सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं। ये बसें विभिन्न मार्गों पर यात्रियों को आरामदायक यात्रा प्रदान करती हैं। नई दस बसें इस बेड़े को और मजबूत करने के लिए लाई गई हैं। हालांकि, इनके संचालन में हो रही देरी से सरकार के इलेक्ट्रिक वाहन प्रोत्साहन के प्रयासों को झटका लग रहा है। तैयार बेड़े का उपयोग न होना प्रदूषण नियंत्रण के लक्ष्यों के विपरीत है।
बसों के पंजीकरण और परमिट से जुड़ी औपचारिकताएं लगभग पूरी हो चुकी हैं। विभागीय प्रक्रिया के अंतिम चरण के बाद इन सभी बसों को मार्गों पर उतारा जाएगा।
- परविंद्र सिंह, इंचार्ज यातायात ब्रांच, अंबाला