क्या आप भी हुए हैं घोस्ट?: न लड़ाई, न ब्रेकअप, बस अचानक गायब, जेन-जी के बीच क्यों बढ़ रहा है Ghosting Culture?
बिना लड़ाई या ब्रेकअप के अचानक किसी की जिंदगी से गायब हो जाना ही Ghosting है। Gen-Z में यह डेटिंग के साथ दोस्ती और प्रोफेशनल रिश्तों में भी देखने को मिल रहा है। आइए जानते हैं कि आखिर क्या है यह ghosting और इसके नुकसान क्या हैं?
विस्तार
सोचिए, आपकी किसी से रोज बात हो रही है। दिनभर की छोटी-बड़ी बातें शेयर हो रही हैं, चैट भी बढ़िया चल रही है। फिर अचानक सामने वाले के मैसेज कम होने लगते हैं। रिप्लाई लेट होने लगते हैं और एक दिन वो पूरी तरह गायब हो जाता है। न कोई लड़ाई, न कोई वजह, न कोई क्लोजर। बस अचानक से गायब। यही है ‘Ghosting’ और Gen-Z की डेटिंग और सोशल लाइफ में ये शब्द अब काफी आम हो चुका है।
Ghosting आखिर होता क्या है?
जब कोई इंसान अचानक आपके मैसेज, कॉल और कॉन्टैक्ट को इग्नोर करना शुरू कर दे। इसकी कोई वजह भी न बताए, तो इसे Ghosting कहते हैं। यानी बिना कुछ कहे, बिना कोई सफाई दिए और बिना बातचीत खत्म किए ही सामने वाला आपकी जिंदगी से गायब हो जाता है।
Ghosting सिर्फ डेटिंग तक सीमित है?
Ghosting सिर्फ प्यार या डेटिंग तक सीमित नहीं है। ये दोस्ती और प्रोफेशनल रिश्तों में भी देखने को मिलता है। भारत में भी Ghosting अब सिर्फ Gen-Z का ट्रेंडिंग शब्द नहीं रह गया है। इसका लोगों की मानसिक स्थिति पर क्या असर पड़ता है। इसे लेकर रिसर्च भी हो रही है। 2025 में International Journal of Indian Psychology में प्रकाशित एक स्टडी में 18 से 25 साल की उम्र के 119 भारतीय युवाओं को शामिल किया गया, जिन्हें डेटिंग का अनुभव था।
रिसर्च में Ghosting, रिजेक्शन के डर और आत्मविश्वास के बीच संबंध को समझने की कोशिश की गई। इसमें पाया गया कि जो लोग रिजेक्शन को लेकर ज्यादा संवेदनशील होते हैं, उनमें Ghosting का अनुभव होने की संभावना भी ज्यादा देखी गई। स्टडी में Ghosting और व्यक्ति के आत्मविश्वास के बीच भी संबंध पाया गया। यानी किसी का बिना वजह अचानक गायब हो जाना सिर्फ बातचीत खत्म होने की बात नहीं है। इसका असर सामने वाले की सोच, भावनाओं और खुद को देखने के नजरिए पर भी पड़ रहा है।

अधूरी कहानी दिमाग को ज्यादा क्यों परेशान करती है?
कभी आपने नोटिस किया है कि किसी बात का जवाब न मिले तो हम उसे बार-बार सोचते रहते हैं? मन में यही चलता रहता है-‘आखिर हुआ क्या था?’ इसकी एक मनोवैज्ञानिक वजह Zeigarnik Effect बताई जाती है। मनोवैज्ञानिक ब्लूमा जाइगार्निक के मुताबिक, हमारा दिमाग अधूरी बातों और अधूरे अनुभवों को पूरा हुई चीजों के मुकाबले ज्यादा याद रखता है।
Ghosting में भी कुछ ऐसा ही होता है। सामने वाला बिना कोई वजह बताए अचानक गायब हो जाता है। न साफ रिजेक्शन मिलता है, न ब्रेकअप की बातचीत और न ही कोई आखिरी जवाब। यानी कहानी अचानक बीच में ही रुक जाती है। फिर दिमाग उस अधूरी कहानी को पूरा करने के लिए पुरानी चैट दोबारा पढ़ता है, बातचीत को याद करता है और छोटी-छोटी बातों में कोई हिंट खोजने लगता है। जैसे किसी कॉलेज स्टूडेंट की कई हफ्तों तक किसी से चैट चल रही हो और अचानक सामने वाला गायब हो जाए। इसके बाद वो महीनों तक यही सोच सकता है कि ‘आखिर ऐसा क्या बदल गया?’
Ghosting इतना दर्द क्यों देता है?
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इसकी एक वजह इंसान की किसी से जुड़ने और अपनापन महसूस करने की जरूरत भी है। मनोवैज्ञानिक रॉय बाउमिस्टर की Belongingness Theory के मुताबिक, हर इंसान चाहता है कि उसके जीवन में कुछ ऐसे लोग हों, जिनसे उसका मजबूत और meaningful connection हो।
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जब कोई इंसान अचानक बिना बताए आपकी जिंदगी से गायब हो जाता है, तो सिर्फ एक रिश्ता खत्म नहीं होता, बल्कि जुड़ाव और अपनापन महसूस करने की जरूरत को भी झटका लगता है।
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रिसर्च में यह भी पाया गया है कि Social Rejection यानी किसी का ठुकराना या दूरी बनाना, दिमाग के कुछ उन्हीं हिस्सों को एक्टिव कर सकता है जो शारीरिक तकलीफ को महसूस करने से जुड़े होते हैं।
क्या Ghosting करना हमेशा गलत होता है?
Gen-Z की Ghosting को हमेशा पर्सनल लेना भी सही नहीं है। जरूरी नहीं कि सामने वाले ने कुछ गलत कहा हो या कोई बात बुरी लगी हो, इसलिए उसे Ghost कर दिया गया। कई बार Gen-Z अपने कंफर्ट और मूड के हिसाब से तय करते हैं कि किससे बात करनी है और किसके मैसेज का जवाब देना है। अगर किसी के साथ उनकी वाइब मैच नहीं करती, तो कई लोग सीधे ये कहने के बजाय कि ‘हमारी नहीं बन रही’, धीरे-धीरे दूरी बनाने लगते हैं। मैसेज के रिप्लाई कम हो जाते हैं, बातचीत बंद हो जाती है और कभी-कभी कनेक्शन पूरी तरह खत्म कर देते हैं।