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Reels Craze: Gen Z की स्क्रीन पर रील्स का राज, क्या वीडियो बन गया नई खोज और शॉपिंग का जरिया?

Wed, 23 Sep 2026 09:51 PM IST
रिया दुबे न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Wed, 23 Sep 2026 09:51 PM IST
सार

Gen Z के लिए रील्स अब सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि नए ट्रेंड, प्रोडक्ट और खरीदारी के फैसले लेने का जरिया भी बन रही हैं। ब्यूटी, फैशन, फिटनेस और कॉमेडी जैसे कंटेंट के साथ रील्स अब नए प्रोडक्ट खोजने और खरीदारी के फैसलों को भी प्रभावित कर रहा है। यह वीडियो-फर्स्ट ट्रेंड शहरों से निकलकर छोटे शहरों और गांवों तक पहुंच रहा है।

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Gen Z’s Reels Era: Are Videos Becoming the New Way to Search and Shop?
रील्स का क्रेज - फोटो : Ai

विस्तार

भारत में वीडियो देखने का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब सोशल मीडिया सिर्फ दोस्तों से जुड़ने या टाइमपास करने का जरिया नहीं रह गया है। खासकर Gen Z के लिए शॉर्ट-फॉर्म वीडियो रोजमर्रा की डिजिटल लाइफ का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं। क्या देखना है, कौन-सा ट्रेंड चल रहा है, किस क्रिएटर को फॉलो करना है और यहां तक कि कौन-सा प्रोडक्ट खरीदना है, इन फैसलों पर भी वीडियो कंटेंट का असर बढ़ रहा है।

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मेटा की ओर से कराई गई IPSOS स्टडी के मुताबिक, भारत में वीडियो अब कंटेंट देखने का सबसे आम तरीका बन गया है। खास बात यह है कि यह बदलाव सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी तेजी से पहुंचा है।

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शहर हो या गांव, वीडियो का क्रेज बराबर

स्टडी के मुताबिक, भारत में रोजाना वीडियो देखने के मामले में शहरी और ग्रामीण इलाकों के बीच का अंतर काफी कम हो गया है। शहरों में 98% और ग्रामीण इलाकों में 94% लोग रोजाना वीडियो देखते हैं। यानी वीडियो-फर्स्ट कल्चर अब सिर्फ मेट्रो सिटीज तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे शहरों और गांवों में भी इसकी पकड़ मजबूत हो रही है।

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स्टडी में मेट्रो, टियर-2, टियर-3 शहरों और ग्रामीण भारत समेत 23 शहरों के 4,000 से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया था। सर्वे में शामिल कम से कम 97% यूजर्स रोजाना मेटा के प्लेटफॉर्म्स पर वीडियो देखते हैं। Gen Z में भी यह आंकड़ा 97% रहा, जबकि महिलाओं में 97% और NCCS A ऑडियंस में 98% यूजर्स रोजाना वीडियो देखते हैं।

Gen Z के लिए Reels बना शॉर्ट वीडियो का बड़ा प्लेटफॉर्म

Gen Z की बात करें तो Reels अब शॉर्ट-फॉर्म वीडियो देखने और नए कंटेंट को एक्सप्लोर करने का एक प्रमुख प्लेटफॉर्म बन चुका है। स्टडी के मुताबिक, 89% Gen Z रोजाना Reels पर अलग-अलग तरह के कंटेंट, कल्चर और क्रिएटर्स को देखते और खोजते हैं।

Reels पर सिर्फ एंटरटेनमेंट ही नहीं, बल्कि अलग-अलग तरह के कंटेंट की डिमांड है। ब्यूटी और मेकअप 52%, फैशन और ट्रेंड्स 52%, लाइफस्टाइल और फिटनेस 42%, कॉमेडी 39% और स्पोर्ट्स 38% प्रमुख कैटेगरी हैं।

रील्स से क्या हो रहा तय?

Reels का असर सिर्फ यह तय करने तक नहीं है कि यूजर क्या देखेगा। यह लोगों को नए प्रोडक्ट्स के बारे में जानने और खरीदारी के फैसले लेने में भी प्रभावित कर रहा है। स्टडी के मुताबिक, Reels के जरिए किसी प्रोडक्ट के बारे में पता चलने की संभावना 81% ज्यादा है, जबकि खरीदारी के फैसले पर इसका प्रभाव 47% ज्यादा है। यानी जिस वीडियो को यूजर कुछ सेकंड के लिए स्क्रॉल करते हुए देखता है, वही उसके अगले सर्च या शॉपिंग डिसीजन की वजह भी बन सकता है।

वीडियो अब सिर्फ मनोरंजन नहीं, डिजिटल लाइफ का हिस्सा

आंकड़ों से साफ है कि भारत में वीडियो की पहुंच तेजी से बढ़ी है। शहरों से लेकर गांवों तक यूजर्स का बड़ा हिस्सा रोजाना वीडियो देख रहा है और Gen Z के लिए Reels कंटेंट, क्रिएटर्स, ट्रेंड्स और नए प्रोडक्ट्स को एक्सप्लोर करने का अहम जरिया बन रहा है।

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