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Hindi News ›   Events Coverage ›   From ‘Rising Sun’ to ‘Rising UP’: How Uttar Pradesh Is Emerging as a New Growth Powerhouse

विचार: ‘राइजिंग सन’ से ‘राइजिंग यूपी’

Wed, 19 Aug 2026 01:33 PM IST
रिया दुबे आलोक चंद्रा
आलोक चंद्रा Published by: रिया दुबे Updated Wed, 19 Aug 2026 01:33 PM IST
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From ‘Rising Sun’ to ‘Rising UP’: How Uttar Pradesh Is Emerging as a New Growth Powerhouse
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जापानी प्रतिनिधिमंडल के साथ - फोटो : ANI

दुनिया किसी राज्य को गंभीरता से तब लेती है, जब वह अपनी अर्थव्यवस्था को आगे ले जाने के लिए गंभीर होता है और उसके लिए आधारभूत संरचना तैयार करने में अपने सारे साधन झोंक देता है। ऐसा होने पर दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाएं उसे गंभीरता से लेने लगती हैं, और वह राज्य जब साझेदारी का हाथ आगे बढ़ाता है तो हर देश उसे थामने को आतुर हो जाता है। उत्तर प्रदेश ने पिछले नौ वर्षों में नीतिगत परिपक्वता, प्रशासनिक विश्वसनीयता और दीर्घकालिक दृष्टि से राज्य के आर्थिक संकल्प की यही कहानी सामने रखी है। इसी का परिणाम है कि जापान जैसा राष्ट्र, जो तकनीकी उत्कृष्टता, औद्योगिक अनुशासन और गुणवत्ता के मामले में वैश्विक मानक स्थापित करता है, उत्तर प्रदेश में निवेश और साझेदारी के अवसर देख रहा है। यह यूपी की लगातार विस्तारित होती आर्थिक क्षमता, बाजार की गहराई और भविष्य की तैयारियों पर भरोसे का प्रमाण है।

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इसी भरोसे के साथ जापान के यामानाशी प्रांत के 200 सदस्यीय विशाल प्रतिनिधिमंडल ने यहां कदम रखा है। यह केवल एक शिष्टाचार यात्रा नहीं, बल्कि उस दीर्घकालिक कूटनीतिक और आर्थिक प्रक्रिया की परिणति है, जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्षों की निरंतरता और स्पष्ट दृष्टिकोण से आगे बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत और जापान के बीच जो रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत होती जा रही है, योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने खुद को उस साझेदारी के सबसे भरोसेमंद धरातल के रूप में स्थापित किया है। यह एक सुनियोजित रणनीति का प्रतिफल है, जिसमें निवेश-अनुकूल वातावरण, भूमि की सुलभ उपलब्धता, कुशल एवं युवा श्रमशक्ति तथा सर्वोपरि राजनीतिक इच्छाशक्ति का समन्वय देखने को मिलता है।
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योगी सरकार ने अपनी विकास दृष्टि को स्पष्टता से सामने रखा है और इसे देखकर ही यामानाशी प्रांत के उप-राज्यपाल जुनिची इशिडोरा के नेतृत्व में आठ सदस्यीय उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पिछले जनवरी महीने में मुलाकात की थी। यह मुलाकात औपचारिकता से कहीं आगे की थी। इस बैठक ने उत्तर प्रदेश और यामानाशी के बीच उभरते सहयोग को नई गति दी और आने वाले भव्य आयोजनों की ठोस नींव रखी। यही वह दूरदर्शिता है, जिसमें उत्तर प्रदेश का आत्मविश्वास है और बिना हिचकिचाहट के वह निवेश के मुद्दे पर किसी भी प्रांत से बात करने में खुद को समर्थ पाता है। ऐसा इसलिए कि अब वह उत्तर प्रदेश नहीं रहा, जिसमें पहले नौकरशाही की जटिलताएं और औद्योगिक ठहराव दिखाई देते थे। आज का उत्तर प्रदेश जापान जैसे तकनीकी रूप से अग्रणी राष्ट्र के प्रांतों को अपने द्वार पर आमंत्रित कर रहा है। यह निरंतर नीति-निर्धारण और उसके ईमानदार क्रियान्वयन का परिणाम है, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपने प्रदेश के विकास के लिए जापान और सिंगापुर तक जाने में कोई हिचक नहीं।
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जापान की तकनीकी उत्कृष्टता को उत्तर प्रदेश की विशाल अर्थव्यवस्था, युवा मानव संसाधन का सशक्त साथ मिल रहा है। यह मेल केवल आर्थिक हित-साधन तक सीमित नहीं, बल्कि दो भिन्न कार्य-संस्कृतियों और विकास-दर्शनों के समन्वय की मिसाल है। इस सहयोग की सबसे उल्लेखनीय कड़ी ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक पर हुआ ऐतिहासिक समझौता है। यह भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं के प्रति उत्तर प्रदेश की दूरदृष्टि का प्रमाण है। यामानाशी के साथ इस अत्याधुनिक तकनीक पर हाथ मिलाना इस बात का द्योतक है कि उत्तर प्रदेश भविष्य की तकनीकों में भी अग्रणी भूमिका निभाना चाहता है। मुख्यमंत्री ने स्वयं स्पष्ट किया कि प्रदेश के उच्च तकनीकी संस्थानों के छात्र जापान में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे और इस तकनीक को प्रदेश की इंडस्ट्री, सार्वजनिक परिवहन तथा ऊर्जा क्षेत्र में लागू किया जाएगा। यह ज्ञान और कौशल के हस्तांतरण की एक व्यापक प्रक्रिया है, जो युवा पीढ़ी के भविष्य़ के लिए जरूरी है।
 
उत्तर प्रदेश में निवेश की इच्छुक जापानी कंपनियों की लंबी फेहरिस्त है। कोबोटा कॉरपोरेशन, मिंडा कॉरपोरेशन, जापान एविएशन इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री, नागासे एंड कंपनी लिमिटेड, सीको एडवांस, ओएंडओ ग्रुप, फूजी जैपनीज जेवी और फूजीसिल्वरटेक कंक्रीट जैसी कंपनियों का यूपी में निवेश का इरादा जताना वैश्विक औद्योगिक जगत में प्रदेश की विश्वसनीयता को दर्शाता है। ये समझौते कृषि यंत्र निर्माण, औद्योगिक मशीनरी, जल एवं पर्यावरण अवसंरचना समाधान, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, औद्योगिक प्रिंटिंग-ग्राफिक्स, आतिथ्य और रियल एस्टेट जैसे विविध क्षेत्रों तक फैले हैं। इस समूची कवायद का शिखर बिंदु 18 से 23 अगस्त तक आयोजित होने जा रहा 'यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026' है, जिसमें यामानाशी के गवर्नर कोटारो नागासाकी के नेतृत्व में 200 से अधिक जापानी उद्योगपति और सीईओ उत्तर प्रदेश में निवेश के अवसर तलाशेंगे। यह आयोजन मैन्युफैक्चरिंग से लेकर सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी, डिजिटल अवसंरचना और पर्यटन तक, हर उस क्षेत्र पर केंद्रित होगा जो इक्कीसवीं सदी की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। 

सबसे महत्वाकांक्षी परिकल्पना यीडा क्षेत्र में 500 एकड़ भूमि पर आकार लेने जा रही 'जापानी सिटी' की है। यह केवल एक औद्योगिक क्षेत्र नहीं, बल्कि दो सभ्यताओं, दो कार्य-संस्कृतियों और दो आर्थिक दर्शनों के संगम का प्रतीक बनेगा। जापानी उद्योगों की गुणवत्ता, अनुशासन और नवाचार की परंपरा जब उत्तर प्रदेश की विशाल श्रमशक्ति और बाजार क्षमता से मिलेगी, तो यह संयोजन भारत के औद्योगिक मानचित्र पर उत्तर प्रदेश को एक अंतरराष्ट्रीय विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।


जापान के यामानाशी प्रांत से साझेदारी केवल पूंजी और कारोबार तक सीमित नहीं है। यह तकनीक से प्रतिभा तक, उद्योग से रोजगार तक और निवेश से नवाचार तक- दोनों देशों की साझा विकास यात्रा का एक नया अध्याय है। जब जापान जैसा देश उत्तर प्रदेश में अवसर तलाशता है तो पूरी दुनिया को संदेश जाता है कि यह नया उत्तर प्रदेश है, जो वैश्विक निवेश के लिए पूरी तरह तैयार है। निवेश विश्वास का प्रवाह भी होता है और विश्वास तभी बनता है जब नीतियां स्थिर हों, प्रशासन उत्तरदायी हो और नेतृत्व दूरदर्शी हो।

(अस्वीकरण: ये लेखक के निजी विचार हैं। लेखक आलोक चंद्रा  भारतीय प्रबंध संस्थान, कोलकाता के पूर्व मुख्य प्रशासनिक अधिकारी रहे हैं।)

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