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इलायची विज्ञापन मामला: शाहरुख-टाइगर-अजय को राहत मिली या नहीं? नोटिस के खिलाफ याचिका पर कोर्ट का फैसला सुरक्षित

Mon, 07 Sep 2026 08:16 PM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति राघव Updated Mon, 07 Sep 2026 08:16 PM IST
सार

Vimal Elaichi ad Controversy: महाराष्ट्र FDA ने बॉलीवुड सितारों शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को विमल इलायची विज्ञापन मामले में नोटिस भेजा था। विज्ञापन से जुड़ी कंपनी ने भी अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए इसके खिलाफ याचिका दायर की, जिस पर अदालत ने फैसला सुरक्षित कर लिया है।

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Vimal Elaichi ad Delhi High Court reserves verdict on plea against notices to SRK Ajay Devgn Tiger Shroff
शाहरुख, अजय और टाइगर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलायची के बहाने पान मसाला के सरोगेट विज्ञापन को लेकर बॉलीवुड सितारे शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ कानूनी शिकंजे में फंसे हैं। बीते दिनों महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने तीनों को नोटिस जारी किया था। इसके बाद इलायची विज्ञापन से जुड़ी कंपनी ने भी नोटिस को चुनौती देते हुए याचिका दायर की। इस पर दिल्ली होईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है। 

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दिल्ली हाईकोर्ट ने सुरक्षित किया फैसला
समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक, दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को अधिकार क्षेत्र (ज्यूरिस्डिक्शन) के मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह मामला 'विमल इलायची' से जुड़ी कंपनी की उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें एफडीए द्वारा तीन बॉलीवुड एक्टर्स को नोटिस जारी किए गए थे। 
बता दें कि शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को जारी एफडीए ने 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया था। विज्ञापन से जुड़ी कंपनी की तरफ से इसे चुनौती दी गई थी। ये नोटिस 'विमल पान मसाला' के कथित सरोगेट विज्ञापन के लिए जारी किए गए थे।

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याचिकाकर्ता कंपनी ने क्या की थी मांग?
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की सिंगल-जज बेंच ने इस बात पर आदेश सुरक्षित रखा कि क्या दिल्ली हाई कोर्ट याचिकाकर्ता कंपनी की उस याचिका पर सुनवाई कर सकता है या नहीं, जिसमें महाराष्ट्र FDA द्वारा जारी 'शो-कॉज नोटिस' को रद्द करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
कंपनी ने आगे यह भी कहा कि महाराष्ट्र FDA के पास विज्ञापन रोकने के निर्देश जारी करने का अधिकार क्षेत्र नहीं था।

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CCPA ने क्या तर्क दिया?
दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका की स्वीकार्यता का विरोध करते हुए, केंद्र और सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने तर्क दिया कि याचिका बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर की जानी चाहिए थी, क्योंकि संबंधित कार्रवाई महाराष्ट्र FDA द्वारा की गई थी। CCPA ने कहा कि भले ही वह इस मामले की स्वतंत्र रूप से जांच कर रहा था, लेकिन उसे महाराष्ट्र FDA द्वारा नोटिस जारी करने पर कोई आपत्ति नहीं थी।
दिल्ली हाई कोर्ट को यह भी बताया गया कि CCPA विज्ञापन से जुड़े ऐसे ही आरोपों पर अपनी कार्यवाही कर रहा था, लेकिन उसने इस कैंपेन के खिलाफ कोई निर्देश जारी नहीं किया था।

क्या था मामला, किस बात पर थी आपत्ति?
बता दें कि यह मामला महाराष्ट्र FDA द्वारा तीन अभिनेताओं को 'विमल इलायची' के विज्ञापन में दिखने के लिए जारी किए गए 'कारण बताओ नोटिस' से जुड़ा है। रेगुलेटर का आरोप था कि यह कैंपेन 'विमल पान मसाला' के लिए सरोगेट विज्ञापन जैसा था,  एक ऐसा प्रोडक्ट जिस पर महाराष्ट्र में प्रतिबंध है और उसने अभिनेताओं से विज्ञापन में उनकी भागीदारी के बारे में स्पष्टीकरण मांगा था।

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