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गुरु पर्व पर छोटी सरदारनी के कलाकारों ने सर्बिया में चखा लंगर, 100 एपिसोड की केक काटकर मनाईं खुशियां
Tue, 12 Nov 2019 04:10 PM IST
Avinash Pal
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Published by: Avinash Pal
Updated Tue, 12 Nov 2019 04:10 PM IST
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छोटी सरदारनी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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छोटे परदे के चर्चित धारावाहिक छोटी सरदारनी ने गुरु नानक जयंती पर सौ एपिसोड पूरे किए। जाहिर सी बात है कि मौका जश्न का होना ही चाहिए। लेकिन, छोटी सरदारनी की टीम यहां भारत में नहीं बल्कि इन दिनों सर्बिया में शूटिंग कर रही है। विदेश में देसी अंदाज से त्योहार मनाने में दिक्कतें तो होती हैं लेकिन छोटी सरदारनी की टीम ने इसका भी तोड़ ढूंढ निकाला।
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धारावाहिक छोटी सरदारनी के कलाकारों और तकनीशियनों ने दिन की शुरुआत सर्बिया में एक सामूहिक प्रार्थना से ही। इसके बाद सर्बिया के स्थानीय लोगों की मदद से टीम ने वहां लंगर लगाया। सबने पंगत में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया और इसके बाद शुरू हुआ सेलिब्रेशन बिल्कुल मुंबइया स्टाइल में। लोकेशन पर ही केट कटा, म्यूजिक बजा और फिर खूब सारी मस्ती हुई।
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छोटी सरदारनी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
धारावाहिक में मुख्य भूमिका में दिखने वाले अविनेश रेखी कहते हैं, 'इस साल की गुरु नानक जयंती मैं कभी नहीं भूलंगा। हमारे शो ने सौ एपिसोड इसी दिन पूरे किए हैं। हर साल में इस दिन गुरुद्वारे जाता हूं और पूरे परिवार के साथ वहां माथा टेकता हूं। इस बार मैं यहां मीलों दूर सर्बिया में भले हूं लेकिन हमने यहां भी अपनी परंपरा नहीं भूली।'
वहीं सीरियल में मेहेर बनीं निमृत कौर कहती हैं, 'मैं तो हूं ही चंडीगढ़ से और गुरु परब हमारे यहां पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। पिछले दो साल से मैं मुंबई में रह रही हूं और इस दिन वहां भी गुरुद्वारे में माथा टेककर ही अपना दिन शुरू करती हूं। यहां सर्बिया में मैं इस दिन अपने परिवार को मिस करती रही लेकिन हम सब यहां एक परिवार की तरह हैं और हम सबने साथ प्रार्थना की और साथ लंगर चखा।'
वहीं सीरियल में मेहेर बनीं निमृत कौर कहती हैं, 'मैं तो हूं ही चंडीगढ़ से और गुरु परब हमारे यहां पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। पिछले दो साल से मैं मुंबई में रह रही हूं और इस दिन वहां भी गुरुद्वारे में माथा टेककर ही अपना दिन शुरू करती हूं। यहां सर्बिया में मैं इस दिन अपने परिवार को मिस करती रही लेकिन हम सब यहां एक परिवार की तरह हैं और हम सबने साथ प्रार्थना की और साथ लंगर चखा।'