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लुटेरे : बैंडिट्स ऑफ ब्रिटिश इंडिया का तीसरा सीजन शुरू, जानें 3 जरूरी बातें
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Updated Sat, 23 Jun 2018 01:32 PM IST
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लुटेरे: बैंडिट्स ऑफ ब्रिटिश इंडिया
दो सीजन की सफलता के बाद ‘लुटेरे: बैंडिट्स ऑफ ब्रिटिश इंडिया’ का यह तीसरा सीजन है। एपिक चैनल पर इसका प्रसारण हर बृहस्पतिवार सुबह 10 बजे होता है। इसमें भारत के चर्चित बैंडिट्स की कहानियां शामिल हैं, जिन्हें अंग्रेजों ने डाकू बनने पर मजबूर कर दिया था।
दरअसल 19वीं शताब्दी में बहुत ज्यादा उथल-पुथल थी। मुगलों की ताकत और ब्रिटिश साम्राज्य का उछाल पुराने तरीकों को खत्म कर रहा था, नए रुझान स्थापित हो रहे थे। संस्कृतियों के इस बदलाव से बहुत से लोग पीड़ित थे। कुछ ने अपने आपको अमीरों को लूटने के लिए बदल लिया था, लेकिन वो लूटी हुई सामग्री को हमेशा गरीबों के बीच नहीं बांटते थे। लुटेरे इस दौरान पुलिस से परेशान थे, जो हमेशा लुटेरों का पीछा करती थी।
शो के बारे में जानकारी देते हुए एपिक टीवी के कंटेंट एंड प्रोग्रामिंग हेड अकुल त्रिपाठी ने कहा, ‘स्थानीय समुदायों और जनजातियों जैसे कि वाघेर, भील और बंजारों को सामाजिक और राजनीतिक उथल-पुथल के समय लूटपाट करने के लिए प्रेरित किया। कुछ लोगों के कारनामों की वजह से पूरी जनजातियों को पेशेवर डकैत के रूप में बताया जाता रहा। उनके पूरे समाज को किनारे कर दिया गया। ये एक ऐसी गलती थी, जिसे आजादी के बाद सुधारा गया। लुटेरे का तीसरा सीजन इन्हीं जनजातियों की कहानी है।’
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दरअसल 19वीं शताब्दी में बहुत ज्यादा उथल-पुथल थी। मुगलों की ताकत और ब्रिटिश साम्राज्य का उछाल पुराने तरीकों को खत्म कर रहा था, नए रुझान स्थापित हो रहे थे। संस्कृतियों के इस बदलाव से बहुत से लोग पीड़ित थे। कुछ ने अपने आपको अमीरों को लूटने के लिए बदल लिया था, लेकिन वो लूटी हुई सामग्री को हमेशा गरीबों के बीच नहीं बांटते थे। लुटेरे इस दौरान पुलिस से परेशान थे, जो हमेशा लुटेरों का पीछा करती थी।
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शो के बारे में जानकारी देते हुए एपिक टीवी के कंटेंट एंड प्रोग्रामिंग हेड अकुल त्रिपाठी ने कहा, ‘स्थानीय समुदायों और जनजातियों जैसे कि वाघेर, भील और बंजारों को सामाजिक और राजनीतिक उथल-पुथल के समय लूटपाट करने के लिए प्रेरित किया। कुछ लोगों के कारनामों की वजह से पूरी जनजातियों को पेशेवर डकैत के रूप में बताया जाता रहा। उनके पूरे समाज को किनारे कर दिया गया। ये एक ऐसी गलती थी, जिसे आजादी के बाद सुधारा गया। लुटेरे का तीसरा सीजन इन्हीं जनजातियों की कहानी है।’
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